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अमेरिका ने भारत को रिफाइनिंग सुपरपावर बताया: विदेश मंत्री बोले- यहां वेनेजुएला का कच्चा तेल साफ होगा; दुनिया की तेल आपूर्ति बढ़ाने में मदद मिलेगी

October 20, 2026

अमेरिका ने भारत को रिफाइनिंग सुपरपावर बताया:विदेश मंत्री बोले- यहां वेनेजुएला का कच्चा तेल साफ होगा; दुनिया की तेल आपूर्ति बढ़ाने में मदद मिलेगीनई दिल्ली3 घंटे पहले कॉपी लिंकभारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनके समकक्ष मार्को रुबियो की मंगलवार को मुंबई में मुलाकात हुई।

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लॉस एंजिल्स में Apple का Pro and Tell इवेंट, इस बार कौन-कौन से नए गैजेट्स होंगे लॉन्च, जानें यहां | IBC24

October 20, 2026

दुनिया: Apple अपने नए डिवाइस पेश करने के लिए 28 अक्टूबर को लॉस एंजिल्स में 'Pro and Tell’ इवेंट आयोजित करने जा रहा है। भारतीय समय के अनुसार, यह कार्यक्रम रात 10:30 बजे शुरू होगा। कंपनी के वर्ल्डवाइड मार्केटिंग के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट ग्रेग जोस्वियाक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी जानकारी दी है। इस इवेंट को लेकर टेक्नोलॉजी की दुनिया में काफी चर्चा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Apple इस दौरान MacBook, iMac और iPad Mini के नए मॉडल पेश कर सकता है। हालांकि, कंपनी ने अभी तक लॉन्च होने वाले सभी प्रोडक्ट्स की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

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Tiger Shroff की फायरिंग घटना के बाद टीम का पहला बड़ा बयान, किसे दी गई वॉर्निंग? क्या है मामला?

October 20, 2026

Published: Tuesday, October 20, 2026, 21:32 [IST] Tiger Shroff Firing Case: बॉलीवुड एक्टर टाइगर श्रॉफ से जुड़ी गोलीबारी की घटना के बाद अब उनकी टीम ने सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक खबरों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। एक्टर की टीम ने इस मामले में अपना पहला आधिकारिक बयान जारी करते हुए साफ किया है कि टाइगर श्रॉफ की ओर से घटना को लेकर न तो कोई बयान दिया गया है और न ही कोई वीडियो या मैसेज शेयर किया गया है।

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मक्का मस्जिद में Kiss करने पर कपल को मृत्युदंड, जवान बेटे की मौत से बिलख उठी मां

October 20, 2026

Nazrul Islam Bangladesh: सऊदी अरब में नजरुल इस्लाम को मृत्युदंड दिए जाने की खबर से परिवार सदमे में है। पिता पर 7 लाख टका का कर्ज है और परिवार ने जांच की मांग की है।Mecca Mosque Kiss Controversy: बांग्लादेश के 22 वर्षीय नजरुल इस्लाम को सऊदी अरब में मृत्युदंड दिए जाने की खबर से उनका परिवार सदमे में है। नजरुल की मां रहीमा बेगम बेटे की मौत की खबर सुनकर रो-रोकर बेहाल हैं। परिवार का आरोप है कि सऊदी अधिकारियों ने उन्हें पहले कोई सूचना नहीं दी और न ही उन्हें मामले की पूरी जानकारी मिली। परिवार को 14 अक्टूबर को मक्का में नजरुल को फांसी दिए जाने की खबर मीडिया रिपोर्टों के जरिए मिली।

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युवा मोर्चा की राष्ट्रीय टीम में एमपी के 3 नेता: आशीष झाला राष्ट्रीय मंत्री, भक्ति शर्मा और गजेंद्र तोमर BJYM के कार्यकारिणी सदस्य बने - Bhopal News

October 20, 2026

भारतीय जनता पार्टी ने युवा मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी घोषित कर दी है। मध्यप्रदेश से आशीष झाला को राष्ट्रीय मंत्री बनाया गया है, जबकि भक्ति शर्मा और गजेंद्र सिंह तोमर को राष्ट्रीय कार्यकारिणी का सदस्य नियुक्त किया गया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्य

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पूर्णिया- कोरटबारी में मन्नत पूरी होने पर बकरों की बलि: 2007 से हो रही दुर्गा पूजा, नवमी पर खिचड़ी महाभोग, सप्तमी से नवमी तक सांस्कृतिक कार्यक्रम - Purnia News

October 20, 2026

पूर्णिया के मधुबनी में स्थित कोरटबारी का माता शीतला मंदिर पुराना धार्मिक स्थल है। यहां श्रद्धालुओं की गहरी आस्था है। दूर-दूर से लोग अपनी मन्नतें लेकर मंदिर पहुंचते हैं। .

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नशामुक्त उत्तराखंड की दिशा में गुटखा-तंबाकू प्रतिबंध जरूरी - प्रवक्‍ता.कॉम - Pravakta.Com

October 20, 2026

सौरभ वाष्र्णेय युवाओं का स्वास्थ्य, प्रशासन की जवाबदेही और प्रतिबंध के प्रभावी क्रियान्वयन से ही साकार होगा । स्वस्थ देवभूमि का संकल्प धामी सरकार के लिए अच्छे दिशा में ले जाने वाला निर्णय है। उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है। इसकी पहचान केवल धार्मिक आस्था, आध्यात्मिक परंपराओं और प्राकृतिक सौंदर्य तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वस्थ समाज और संस्कारित युवा पीढ़ी भी इसकी वास्तविक शक्ति है। ऐसे में गुटखा, पान मसाला और तंबाकू उत्पादों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कदम को केवल सरकारी आदेश के रूप में नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जाना चाहिए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने इन उत्पादों के निर्माण और बिक्री पर एक वर्ष का प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाना और समाज को तंबाकू के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना है। तंबाकू का सेवन आज एक गंभीर सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी चुनौती बन चुका है। गुटखा और अन्य तंबाकू उत्पादों की आसान उपलब्धता के कारण बड़ी संख्या में लोग इसकी आदत का शिकार हो जाते हैं। विशेष रूप से किशोरों और युवाओं में इसका बढ़ता प्रचलन चिंता का विषय है। शुरुआत अक्सर शौक, मित्रों के दबाव या प्रयोग के रूप में होती है, लेकिन धीरे-धीरे यह आदत स्वास्थ्य और आर्थिक जीवन दोनों को प्रभावित करने लगती है। तंबाकू का सेवन मुंह के कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ाता है। इससे न केवल व्यक्ति का जीवन प्रभावित होता है, बल्कि परिवार पर उपचार का आर्थिक बोझ भी पड़ता है। ऐसी स्थिति में सरकार का दायित्व केवल कानून बनाना नहीं, बल्कि लोगों को उन परिस्थितियों से बचाना भी है जो उन्हें गंभीर बीमारियों और व्यसनों की ओर धकेलती हैं। यदि प्रतिबंध के माध्यम से तंबाकू उत्पादों की उपलब्धता कम होती है और युवाओं को इनके सेवन से दूर रखने में मदद मिलती है, तो यह जनहित में महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी। हालांकि, किसी भी प्रतिबंध की सफलता उसके घोषित उद्देश्य से नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाले परिणामों से तय होती है। सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस निर्णय को प्रभावी ढंग से लागू करने की होगी। केवल अधिसूचना जारी कर देने से बाजार में तंबाकू उत्पादों की उपलब्धता समाप्त नहीं हो जाती। इसके लिए निर्माण इकाइयों, थोक विक्रेताओं, दुकानों और वितरण व्यवस्था पर नियमित निगरानी आवश्यक है। यदि प्रतिबंधित उत्पाद चोरी-छिपे बिकते रहे, तो सरकारी निर्णय का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाएगा। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई हो। साथ ही, प्रतिबंध के नाम पर अनावश्यक उत्पीडऩ या मनमानी की गुंजाइश भी नहीं होनी चाहिए। कार्रवाई पारदर्शी, निष्पक्ष और कानूनसम्मत होनी चाहिए। संबंधित विभागों के बीच समन्वय तथा आम जनता की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई से इस अभियान को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। यह भी जरूरी है कि प्रतिबंध के दौरान अवैध बिक्री और दूसरे उत्पादों के नाम पर प्रतिबंधित सामग्री की आपूर्ति जैसी संभावित चुनौतियों पर नजर रखी जाए। सरकार को समय-समय पर इसकी समीक्षा करनी चाहिए, ताकि यह पता चल सके कि प्रतिबंध से वास्तव में खपत में कितनी कमी आई और युवाओं को कितना लाभ मिला। किसी भी नशे की आदत को केवल कानूनी कार्रवाई से पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता। तंबाकू की लत से जूझ रहे लोगों को परामर्श, उपचार और परिवार के सहयोग की भी आवश्यकता होती है। इसलिए राज्य सरकार को स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाने चाहिए। युवाओं को तंबाकू के नुकसान समझाने के साथ-साथ खेल, शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के अवसरों से जोडऩा भी जरूरी है। मुख्यमंत्री धामी ने युवाओं को प्रगति के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया है। इस दिशा में सरकार को ठोस कार्यक्रमों के माध्यम से आगे बढऩा चाहिए। जब युवाओं के सामने बेहतर भविष्य के विकल्प होंगे, तब वे नकारात्मक आदतों से दूर रहने के लिए अधिक प्रेरित होंगे। नशामुक्ति केंद्रों, स्वास्थ्य सेवाओं और परामर्श सुविधाओं को मजबूत बनाना भी इस अभियान का अभिन्न हिस्सा होना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नशामुक्त भारत के संकल्प को साकार करने के लिए राज्यों की भूमिका महत्वपूर्ण है। उत्तराखंड जैसे राज्य में, जहां पर्यटन, तीर्थाटन और आध्यात्मिक जीवन की विशेष पहचान है, वहां स्वस्थ जीवनशैली का संदेश और भी व्यापक प्रभाव डाल सकता है। लेकिन नशामुक्ति का अर्थ केवल गुटखा और तंबाकू तक सीमित नहीं होना चाहिए। शराब, मादक पदार्थों और अन्य व्यसनों से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए भी जागरूकता, रोकथाम और पुनर्वास की समग्र नीति आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक बैठक में मानसून के बाद जनजीवन सामान्य बनाने और खराब सड़कों की शीघ्र मरम्मत के निर्देश भी दिए हैं। यह विषय भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उत्तराखंड में बारिश, भूस्खलन और क्षतिग्रस्त सड़कों के कारण अनेक क्षेत्रों में आवागमन प्रभावित होता है। ग्रामीणों, विद्यार्थियों, मरीजों और तीर्थयात्रियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसलिए सड़कों की मरम्मत केवल विकास कार्य नहीं, बल्कि जनसुरक्षा और आवश्यक सेवाओं की उपलब्धता से जुड़ा विषय है। जन चौपाल, रात्रि चौपाल और तहसील दिवस के माध्यम से जनता की समस्याएं सुनने का निर्देश भी तभी सार्थक होगा, जब अधिकारी वास्तव में गांवों और दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंचें। जनता को बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण हो। सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास कार्यों की निगरानी, बुनियादी सुविधाओं का विस्तार और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल रहना चाहिए। लोकतंत्र में सरकार की विश्वसनीयता घोषणाओं से नहीं, बल्कि उनके क्रियान्वयन से बनती है। गुटखा और तंबाकू पर एक वर्ष का प्रतिबंध एक महत्वपूर्ण पहल हो सकती है, लेकिन इसका वास्तविक मूल्यांकन तभी संभव है जब बाजार में उपलब्धता घटे, युवाओं में सेवन कम हो और स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता बढ़े। उत्तराखंड देवभूमि को नशामुक्त बनाने की जिम्मेदारी केवल सरकार या प्रशासन की नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग की है। अभिभावकों, शिक्षकों, सामाजिक संगठनों, व्यापारियों और युवाओं को भी इसमें अपनी भूमिका निभानी होगी। सरकार को प्रतिबंध के प्रभावों की नियमित समीक्षा कर उसके परिणाम जनता के सामने रखने चाहिए। यदि सख्त निगरानी, जनजागरूकता, उपचार और बेहतर अवसरों को साथ लेकर चला जाए, तो यह पहल स्वस्थ उत्तराखंड की दिशा में ठोस कदम बन सकती है। देवभूमि की असली पहचान तभी मजबूत होगी, जब यहां की युवा पीढ़ी नशे से मुक्त, स्वस्थ, शिक्षित और अपने भविष्य के प्रति आश्वस्त होगी।

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IND-W vs ZIM-W: 15 चौके-छक्के... हरमनप्रीत कौर का तूफान, 41 गेंदों में कूट दिए इतने रन

October 20, 2026

हरमनप्रीत कौर ने खेली तूफानी पारी. (फोटो- PTI)