Aug 22, 2026 04:39 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
मुख्य बातें
- भारत में LPG की सप्लाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए PNGRB ने करीब 1,800 किमी
- नई LPG पाइपलाइन परियोजनाओं को मंजूरी दी है
- इन पर लगभग ₹7,000 करोड़ का निवेश होगा
- तीनों परियोजनाएं तेलंगाना, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, कर्नाटक और गोवा को जोड़ेंगी

भारत में LPG की सप्लाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए PNGRB ने करीब 1,800 किलोमीटर नई LPG पाइपलाइन परियोजनाओं को दी मंजूरी।
भारत में LPG की सप्लाई को और मजबूत करने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) ने करीब 1,800 किलोमीटर लंबी LPG पाइपलाइन बनाने की मंजूरी दी है। इन प्रोजेक्ट पर लगभग ₹7,000 करोड़ का निवेश किया जाएगा। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि देश में LPG को लंबी दूरी तक पहुंचाने के लिए सड़क मार्ग और LPG टैंकरों पर निर्भरता कम होगी। नई पाइपलाइन बनने के बाद देश का PNGRB-अधिकृत कॉमन-कैरियर LPG पाइपलाइन नेटवर्क करीब 7,700 किलोमीटर से बढ़कर लगभग 9,500 किलोमीटर हो जाएगा, यानी नेटवर्क में करीब 23.5 फीसदी की बढ़ोतरी होगी। इन तीनों परियोजनाओं को सरकारी कंपनी GAIL (India) लिमिटेड विकसित करेगी।
PNGRB के मुताबिक, तीन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण LPG पाइपलाइन परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें पहली 556 किलोमीटर लंबी चेर्लापल्ली (तेलंगाना) से नागपुर (महाराष्ट्र) तक होगी। दूसरी 611 किलोमीटर की पाइपलाइन झांसी (उत्तर प्रदेश) से सितारगंज (उत्तराखंड) को जोड़ेगी। वहीं, तीसरी 633 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन महाराष्ट्र के शिकरापुर से गोवा और हुबली (कर्नाटक) तक LPG पहुंचाने में मदद करेगी। ये पाइपलाइन देश के अलग-अलग हिस्सों को जोड़ने के साथ LPG की सप्लाई को ज्यादा व्यवस्थित और भरोसेमंद बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
दरअसल, भारत अपनी LPG जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। आयात की गई LPG मुख्य रूप से समुद्र तट के पास स्थित टर्मिनलों पर पहुंचती है और वहां से इसे देश के अंदरूनी इलाकों में पहुंचाया जाता है। अभी लंबी दूरी तक LPG की ढुलाई में सड़क परिवहन और टैंकरों का इस्तेमाल काफी होता है। ऐसे में नई पाइपलाइन व्यवस्था से समुद्री आयात टर्मिनलों को बड़े उपभोक्ता केंद्रों और बॉटलिंग प्लांट से सीधे जोड़ना आसान होगा। इससे LPG की सप्लाई में रुकावट का जोखिम कम होगा और डिमांड बढ़ने के समय भी ईंधन को तेजी से अलग-अलग क्षेत्रों तक पहुंचाया जा सकेगा।
पाइपलाइन से LPG परिवहन का एक बड़ा फायदा सड़क सुरक्षा भी है। LPG एक ज्वलनशील ईंधन है और टैंकरों के जरिए लंबी दूरी तक इसकी आवाजाही में दुर्घटना का जोखिम रहता है। सड़क से पाइपलाइन की ओर परिवहन शिफ्ट होने पर LPG टैंकरों की संख्या कम हो सकती है, जिससे सड़क पर ट्रैफिक, दुर्घटना का खतरा और प्रदूषण भी घटेगा। साथ ही लॉजिस्टिक्स लागत कम होने से LPG की सप्लाई ज्यादा प्रभावी हो सकती है।
नई पाइपलाइन नेटवर्क को एक तरह के अतिरिक्त बफर के रूप में भी देखा जा रहा है। पाइपलाइन में मौजूद LPG को ‘लाइन-पैक स्टोरेज’ की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे अचानक मांग बढ़ने या सप्लाई में थोड़ी देर के लिए बाधा आने पर सिस्टम को संभालने में मदद मिल सकती है। इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी। इन परियोजनाओं के साथ पहले से मंजूर 2,757 किलोमीटर लंबी कांडला-गोरखपुर LPG पाइपलाइन, जो देश की सबसे लंबी LPG पाइपलाइन है, जैसे नेटवर्क को भी मजबूती मिलेगी। कुल मिलाकर ₹7,000 करोड़ का यह निवेश LPG परिवहन को सड़क से पाइपलाइन की ओर ले जाने और देश की ऊर्जा आपूर्ति को ज्यादा सुरक्षित, सस्ता और भरोसेमंद बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
