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Who is Seema Kaliramna: मां भी, रिसर्च स्कॉलर भी और अब कॉमनवेल्थ में पदक विजेता भी; सीमा की कहानी दिल जीत लेगी

July 31, 2026

Fri, 31 Jul 2026 10:26 AM IST

स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, ग्लास्गो Published by: स्वप्निल शशांक Updated Fri, 31 Jul 2026 10:26 AM IST

सार

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में महिला चक्का फेंक में कांस्य जीतने वाली सीमा कालीरामना की कहानी सिर्फ एक पदक की नहीं, बल्कि संघर्ष, मातृत्व और जज्बे की मिसाल है। मां बनने के बाद उन्होंने महज 11 महीने में वापसी की, पीएचडी की पढ़ाई जारी रखी और अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का गौरव बढ़ाया।

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की सीमा कालीरामना ने महिला चक्का फेंक स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। लेकिन यह पदक सिर्फ 58.65 मीटर की एक सफल थ्रो की कहानी नहीं है। इसके पीछे मां बनने के बाद की वापसी, पढ़ाई और खेल के बीच संतुलन, अनगिनत संघर्ष और कभी हार न मानने का जज्बा छिपा है।

Mother, Scholar, Medallist: Seema Kaliramna's Remarkable Comeback Wins Commonwealth Bronze

सीमा - फोटो : Twitter

ग्लासगो में जब सीमा का मुकाबला खत्म हुआ, तब उनके खाते में 58.65 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो दर्ज था। इसके बाद उन्होंने लगातार तीन प्रयास फाउल कर दिए। अब उनकी नजरें सिर्फ प्रतिद्वंद्वियों पर थीं। कैमरून की मोनी नोरा अटिम अगर अंतिम प्रयास में 58.65 मीटर से आगे निकल जातीं तो सीमा का पदक छिन जाता। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जैसे ही अटिम का अंतिम प्रयास असफल रहा, सीमा के चेहरे पर मुस्कान लौट आई। वर्षों की मेहनत आखिरकार कॉमनवेल्थ गेम्स के कांस्य पदक में बदल चुकी थी।

Mother, Scholar, Medallist: Seema Kaliramna's Remarkable Comeback Wins Commonwealth Bronze

सीमा - फोटो : Twitter

मां बनने के बाद नहीं छोड़ा सपना
 

  • हरियाणा की 27 वर्षीय सीमा कालीरामना की वापसी भारतीय एथलेटिक्स की सबसे प्रेरणादायक कहानियों में गिनी जा रही है। वह सिर्फ अंतरराष्ट्रीय स्तर की एथलीट ही नहीं हैं, बल्कि भिवानी स्थित चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय से शारीरिक शिक्षा में पीएचडी भी कर रही हैं।
  • इसी दौरान उनकी जिंदगी में एक और बड़ी जिम्मेदारी आई। वह बेटे रुद्र की मां बनीं। कई खिलाड़ियों के लिए मातृत्व के बाद खेल में वापसी आसान नहीं होती, लेकिन सीमा ने हार नहीं मानी।
  • उन्होंने बेटे के जन्म के सिर्फ 11 महीने बाद फिर से प्रतिस्पर्धी प्रशिक्षण शुरू किया। गर्भावस्था के बाद शरीर को पहले जैसी ताकत और तकनीक में वापस लाना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने लगातार मेहनत जारी रखी।

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Mother, Scholar, Medallist: Seema Kaliramna's Remarkable Comeback Wins Commonwealth Bronze

सीमा - फोटो : Twitter

पति बने कोच, हर कदम पर दिया साथ
सीमा की इस वापसी में उनके पति रविंद्र (मोनू कालीरामना) की अहम भूमिका रही। पूर्व राष्ट्रीय स्तर के चक्का फेंक खिलाड़ी रविंद्र ही आज उनके कोच हैं। उन्होंने सीमा को न सिर्फ तकनीकी रूप से तैयार किया, बल्कि मानसिक रूप से भी मजबूत बनाया। धीरे-धीरे सीमा ने अपनी पुरानी लय हासिल की और 2025 के राष्ट्रीय खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर संकेत दे दिया कि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पदक जीतने के लिए तैयार हैं।

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सीमा - फोटो : Twitter

एक थ्रो जिसने बदल दी किस्मत

  • ग्लासगो में सीमा की शुरुआत अच्छी नहीं रही। पहला प्रयास फाउल रहा। दूसरे प्रयास में उन्होंने 57.32 मीटर का थ्रो किया, लेकिन तीसरे प्रयास में उन्होंने 58.65 मीटर की शानदार दूरी तय कर कांस्य पदक की मजबूत दावेदारी पेश कर दी।
  • इसके बाद चौथा, पांचवां और छठा प्रयास फाउल रहा। अब सब कुछ प्रतिद्वंद्वियों के प्रदर्शन पर निर्भर था। आखिरी क्षणों का इंतजार बेहद तनावपूर्ण था, लेकिन अंत में 58.65 मीटर का वही एक थ्रो उन्हें पोडियम तक ले गया।