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यूसुफ पठान से सायोनी तक कहां गायब हो गए? TMC के 10 बागी MPs क्यों नहीं दे रहे नोटिस का जवाब, क्या जाएगी सांसदी

October 9, 2026

Time Published: Friday, October 9, 2026, 9:23 [IST]

तृणमूल कांग्रेस (TMC) से अलग होकर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) के साथ गठबंधन करने वाले 20 सांसदों पर अब अयोग्यता की तलवार लटक रही है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की ओर से भेजे गए नोटिस का जवाब देने की समयसीमा खत्म हो गई है। इसके बावजूद सांसदों ने अपना पक्ष दाखिल नहीं किया।

उन्होंने जवाब देने के लिए दो सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा है। इसी बीच कोलकाता में हुई बागी सांसदों की बैठक ने एक नया सवाल खड़ा कर दिया। बैठक में 20 में से सिर्फ 10 सांसद पहुंचे। बाकी आधे सांसदों में यूसुफ पठान और सायोनी घोष जैसे चर्चित नाम भी शामिल हैं।

TMC Rebel MPs Yusuf Pathan

कोलकाता की मीटिंग में कौन आया, कौन गायब?

वरिष्ठ सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने कोलकाता के एक होटल में बागी नेताओं की बैठक बुलाई थी। इस बैठक में अबू ताहिर, खलीलुर रहमान, शर्मिला सरकार, जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया, शताब्दी रॉय, प्रसून बनर्जी, बापी हलदर, रचना बनर्जी और अरूप चक्रवर्ती शामिल हुए।

दूसरी तरफ, यूसुफ पठान, सायोनी घोष, काकोली घोष दस्तीदार, माला रॉय, जून मालिया, पार्थ भौमिक, मिताली बाग, कालीपद सोरेन, देव और असीत माल जैसे 10 बड़े चेहरे बैठक से नदारद रहे।

बैठक में मौजूद सांसदों ने क्या कहा?

बैठक का मकसद आगे की कानूनी लड़ाई और राजनीतिक रणनीति पर चर्चा करना था। लेकिन 20 में से केवल 10 सांसद ही पहुंचे। इससे बागी खेमे के भीतर मतभेद की अटकलें शुरू हो गईं। बैठक में शामिल सांसदों ने इन अटकलों को खारिज किया।

उनका कहना था कि गैरमौजूदगी को आपसी विवाद से जोड़कर नहीं देखना चाहिए। कुछ सांसद विदेश में हैं, कुछ के परिवार में परेशानी है और कुछ दूसरे कार्यक्रमों में व्यस्त हैं। बैठक में मौजूद नेताओं के मुताबिक, अनुपस्थित सांसदों से फोन पर संपर्क भी किया गया था।

सांसद शताब्दी रॉय ने कहा कि उनके लिए यह देखना जरूरी नहीं है कि बैठक में कौन आया और कौन नहीं। वहीं, शर्मिला सरकार ने भी साफ किया कि गैरहाजिर सदस्यों के साथ किसी तरह की गलतफहमी नहीं है।

सांसद रचना बनर्जी ने बैठक को दुर्गा पूजा से पहले आपसी मुलाकात का मौका बताया। उन्होंने कहा कि संसद के दौरान सभी सांसद साथ रहते हैं, लेकिन बंगाल लौटने के बाद हर कोई अपने क्षेत्र के काम में व्यस्त हो जाता है। ऐसे में पूजा से पहले मिलना-जुलना भी इस बैठक का एक मकसद था।

ओम बिरला के नोटिस का जवाब क्यों नहीं दिया?

इन 20 सांसदों के खिलाफ लोकसभा अध्यक्ष के सामने अयोग्यता याचिकाएं दायर की गई हैं। हर सांसद के खिलाफ अलग-अलग शिकायतें रखी गई हैं। नोटिस में उनसे पूछा गया है कि TMC से अलग होकर NCPI के साथ गठबंधन करने का आधार क्या है और दल-बदल विरोधी कानून के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए।

लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय ने सुप्रीम कोर्ट में हुई कार्यवाही के बाद ये नोटिस जारी किए थे। TMC का ममता बनर्जी समर्थक खेमा भी इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है। रिपोर्टों के मुताबिक, सितंबर की शुरुआत में सांसदों ने जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा था। लेकिन उन्हें केवल दो सप्ताह की मोहलत मिली। गुरुवार को यह समयसीमा खत्म हो गई। अब उन्होंने दो सप्ताह और मांगे हैं। यह समय बढ़ाने के लिए उनकी चौथी मांग बताई जा रही है।

क्या एक साल में जा सकती है 20 सांसदों की सदस्यता?

TMC के वरिष्ठ नेता और सांसद कल्याण बनर्जी पहले दावा कर चुके हैं कि इन 20 सांसदों को एक साल के भीतर अयोग्य ठहराया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा था कि ऐसा होने पर संबंधित सभी 20 लोकसभा सीटों पर उपचुनाव कराने पड़ेंगे। हालांकि, यह कल्याण बनर्जी का दावा है। अभी तक सांसदों की अयोग्यता पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है। आगे की कार्रवाई लोकसभा अध्यक्ष के फैसले और मामले की कानूनी स्थिति पर निर्भर करेगी।

अगर ओम बिरला अतिरिक्त समय देने की मांग स्वीकार कर लेते हैं, तो सांसदों को अपना जवाब तैयार करने के लिए दो सप्ताह और मिल सकते हैं। उन्हें यह बताना होगा कि TMC से अलग होकर NCPI के साथ जाने का उनका फैसला दल-बदल विरोधी कानून के दायरे में क्यों नहीं आना चाहिए।

फिलहाल दो सवाल सबसे अहम हैं। पहला, क्या सभी 20 सांसद मिलकर अपनी कानूनी लड़ाई लड़ेंगे? दूसरा, क्या लोकसभा अध्यक्ष उनकी सदस्यता पर जल्द फैसला लेंगे? बैठक से 10 सांसदों की गैरमौजूदगी चर्चा का विषय जरूर बनी है, लेकिन असली तस्वीर अयोग्यता मामले में आगे होने वाली कार्रवाई से साफ होगी।