Published: Tuesday, October 27, 2026, 19:14 [IST]
30 अक्टूबर को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) की कुछ खास सीरीज से प्री-मैच्योर रिडेम्प्शन (समय से पहले निकलने) का मौका मिल रहा है। अगर आपने अपने ब्रोकर की तय डेडलाइन तक रिडेम्प्शन रिक्वेस्ट जमा कर दी थी, तो पैसे 30 अक्टूबर को आपके बैंक अकाउंट में आ जाएंगे। अगर यह मौका छूट गया है, तो फिर अब आपको अगली ब्याज की तारीख (इंटरेस्ट विंडो) का इंतजार करना होगा। 2026 में हुए टैक्स नियमों के बदलावों के बाद अब निवेशकों के सामने यह सोचने का बड़ा सवाल है कि क्या बॉन्ड को मैच्योरिटी तक होल्ड किया जाए या फिर गोल्ड ETF, गोल्ड फंड या फिजिकल गोल्ड में स्विच करना सही रहेगा।
किन सीरीज को मिल रहा है मौका? RBI के कैलेंडर के मुताबिक, अक्टूबर में चार सीरीज से बाहर निकलने का रास्ता खुला है। इसमें 30 अक्टूबर के लिए 2019-20 सीरीज VI और 28 अक्टूबर के लिए 2020-21 सीरीज I शामिल हैं। CDSL के सर्कुलर के मुताबिक, 30 अक्टूबर वाली सीरीज के लिए DP रिक्वेस्ट स्वीकार करने की विंडो 21 अक्टूबर को खत्म हो चुकी है। आपकी होल्डिंग किस सीरीज की है, इसकी सटीक जानकारी के लिए अपना डिमैट स्टेटमेंट चेक करें। ध्यान रहे कि रिडेम्प्शन की रिक्वेस्ट तय समयसीमा के भीतर ही DP तक पहुंचनी चाहिए।

1 अप्रैल 2026 से, रिडेम्प्शन पर मिलने वाली कैपिटल गेंस टैक्स छूट का फायदा केवल उन्हीं व्यक्तिगत निवेशकों को मिलेगा, जिन्होंने ओरिजिनल इश्यू के समय निवेश किया था और इसे लगातार आठ साल तक होल्ड करके रखा। समय से पहले (प्री-मैच्योर) बाहर निकलने पर टैक्स देना होगा; वहीं SGB पर मिलने वाला 2.5% सालाना ब्याज भी पूरी तरह से टैक्सेबल रहता है। रिडेम्प्शन वैल्यू का हिसाब भुगतान की तारीख से ठीक पहले के तीन कामकाजी दिनों के IBJA (999 प्योरिटी) गोल्ड के औसत रेट के आधार पर तय होता है।
गोल्ड ETF, फंड और फिजिकल गोल्ड की तुलना
तीनों में रिटर्न मिलने का गणित अलग-अलग है। SGB में इश्यू प्राइस पर 2.5% का फिक्स्ड सालाना कूपन ब्याज मिलता है, साथ ही मैच्योरिटी की वैल्यू सोने के दाम से जुड़ी होती है। दूसरी ओर, गोल्ड ETF घरेलू बाजार में सोने के भाव को ट्रैक करते हैं, जिसमें से एक्सपेंस रेशियो काट लिया जाता है; बड़े फंड्स का TER 0.40% से 0.81% के बीच रहता है। गोल्ड फंड-ऑफ-फंड्स (FoF) में अतिरिक्त TER लगता है और 15 दिनों के भीतर निकलने पर 1% जैसा एग्जिट लोड भी लग सकता है। अगर आप ज्वेलरी खरीदते हैं, तो इनवॉइस वैल्यू पर 3% GST लगता है, जबकि अलग से मेकिंग (जॉब-वर्क) कराने पर 5% तक GST लग सकता है। लिक्विडिटी की बात करें तो SGB की सेकेंडरी ट्रेडिंग आमतौर पर ETF की तुलना में थोड़ी सुस्त रहती है।
SGB का ब्याज बनाम बैंक FD
| ऑप्शन | मौजूदा सालाना ब्याज | खास बातें |
|---|---|---|
| SGB कूपन | 2.5% | शुरुआती निवेश राशि पर हर छह महीने में भुगतान; पूरी तरह टैक्सेबल। |
| बैंक FD (1-3 साल) | ~6.25%–6.75% | अक्टूबर 2026 में बड़े बैंकों की दरें इसी स्तर के आसपास हैं; टैक्सेबल। |
ऊपर दिखाई गई दरें बड़े बैंकों के मौजूदा रेट कार्ड पर आधारित हैं; अपनी FD बुक करने से पहले अपने बैंक के ताजा रेट्स की पुष्टि जरूर कर लें।
अगर आप टैक्स-फ्री मैच्योरिटी के योग्य हैं और आपकी मैच्योरिटी में एक साल से भी कम समय बचा है, तो बॉन्ड को होल्ड रखना ही टैक्स छूट बचाने का सही रास्ता है। अगर आपसे अक्टूबर की विंडो मिस हो गई है, तो अगली ब्याज की तारीख के लिए अलर्ट लगा लें; अपने यूनिट्स को अनप्लेज करें, बैंक डिटेल्स चेक करें और समय रहते DP रिडेम्प्शन फॉर्म जमा कर दें। वहीं, अगर आपको तुरंत कैश (इंस्टेंट लिक्विडिटी) चाहिए, तो किसी दूसरे विकल्प में जाने से पहले ETF स्प्रेड, ब्रोकरेज चार्ज और अपने टैक्स स्लैब का गणित जरूर समझ लें।
Story first published: Tuesday, October 27, 2026, 19:14 [IST]
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