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Rupee Crash: 97 का लेवल टूटा तो 99 पर जाएगा रुपया, विदेशी निवेशकों ने बढ़ा दी टेंशन

October 1, 2026

Rupee Crash: 97 का लेवल टूटा तो 99 पर जाएगा रुपया, विदेशी निवेशकों ने बढ़ा दी टेंशन

डॉलर के मुकाबले 96 के पार गया रुपया

Rupee Crash: भारतीय अर्थव्यवस्था वैसे तो मजबूत स्थिति में है, लेकिन ग्लोबल मार्केट के हालात घरेलू मुद्रा के लिए मुश्किलें पैदा कर रहे हैं. डॉलर के मुकाबले रुपये में लगातार कमजोरी देखने को मिल रही है. अब कोटक सिक्योरिटीज ने एक ऐसा अनुमान जताया है जिसने बाजार की चिंता बढ़ा दी है. कोटक सिक्योरिटीज के रिसर्च हेड अनिंद्य बनर्जी के मुताबिक, रुपया जल्द ही डॉलर के सामने 97 के स्तर तक आ सकता है. अगर एक बार 97 का लेवल टूटा, तो गिरावट और गहरी होगी. इसके बाद रुपया 98.5 से लेकर 99 तक के स्तर पर जा सकता है. फिलहाल रुपया आज अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96.442 पर आ चुका है.इस गिरावट के पीछे कई अहम कारण काम कर रहे हैं.

विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली

रुपये पर सबसे बड़ा दबाव विदेशी संस्थागत निवेशकों (FPI) की बिकवाली का है. इस महीने के आंकड़ों पर नजर डालें तो विदेशी निवेशक अब तक करीब 6.1 अरब डॉलर के भारतीय शेयर बेच चुके हैं. बनर्जी बताते हैं कि पिछले दो महीनों में विदेशी निवेशकों ने जितना पैसा भारतीय बाजार में लगाया था, उसका लगभग 90 फीसदी हिस्सा अब वापस निकाला जा चुका है. हाल ही में FCNR(B) के जरिए भी देश में पैसा आया है, लेकिन इसका फायदा सीधे तौर पर रुपये को नहीं मिला. ये पैसा बाजार में जाने के बजाय सीधे आरबीआई के फॉरेक्स रिजर्व में चला गया है.

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें

रुपये की सेहत बिगड़ने का दूसरा बड़ा कारण कच्चा तेल है. इसे केवल ब्रेंट क्रूड के भाव से नहीं आंका जाना चाहिए. असल में स्पॉट क्रूड, फ्रेट चार्जेज के साथ रिफाइंड प्रोडक्ट्स की कीमतें भी काफी अहम होती हैं. इस समय दुनिया भर की रिफाइनरियों में दिक्कतें चल रही हैं. इसके चलते डीजल से लेकर एविएशन फ्यूल तक की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं. जब भारत का ईंधन आयात बिल बढ़ता है, तो सीधा असर महंगाई पर पड़ता है. ईंधन महंगा होने से कारोबार से लेकर आम लोगों तक की लागत बढ़ती है, जिससे रुपये पर और ज्यादा दबाव पड़ने लगता है.

आरबीआई का अगला बड़ा कदम

अगर रुपये में ये गिरावट ऐसे ही जारी रही, तो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) को बीच-बचाव के लिए उतरना पड़ेगा. दबाव बढ़ने पर आरबीआई करेंसी मार्केट में अपना दखल बढ़ा सकता है. इसके अलावा बनर्जी को उम्मीद है कि आने वाले महीनों में आरबीआई ब्याज दरों में भी बढ़ोतरी कर सकता है. दिसंबर के महीने में भी दरें बढ़ने की पूरी संभावना है. हालांकि, आरबीआई अपना फैसला सिर्फ अमेरिकी फेडरल रिजर्व को देखकर नहीं लेगा. रिजर्व बैंक का मुख्य फोकस घरेलू महंगाई को काबू में रखने पर होगा. महंगाई को ध्यान में रखते हुए पॉजिटिव रियल इंटरेस्ट रेट बनाए रखना आरबीआई की प्राथमिकता होगी.

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड से टेंशन

भारत ही नहीं, पूरी दुनिया के बाजारों के लिए अमेरिका से एक बुरी खबर आ रही है. अमेरिका में लंबी अवधि के बॉन्ड की यील्ड काफी तेजी से बढ़ रही है. खास तौर पर 10 साल या उससे ज्यादा समय वाले बॉन्ड पर काफी दबाव देखने को मिल रहा है. बड़ी अमेरिकी टेक कंपनियां भारी उधारी ले रही हैं, जिससे बाजार में फंड की मांग बढ़ गई है. इसी वजह से लंबी अवधि की यील्ड ऊंची रहने की आशंका है. जब तक कच्चे तेल की कीमतें नीचे नहीं आतीं, ग्लोबल यील्ड पर ये दबाव बना रहेगा. ऊंची यील्ड से ग्लोबल ग्रोथ प्रभावित होती है जिसका सीधा खामियाजा रुपये को भी भुगतना पड़ रहा है.

विभव शुक्ला

विभव शुक्ला

विभव शुक्ला वर्तमान में TV9 हिंदी में सीनियर सब-एडिटर के तौर पर बिजनेस डेस्क पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता में उन्हें छह वर्षों का अनुभव है. विभव मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के रहने वाले हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की थी. इसके बाद वह Inshorts और गुजरात फर्स्ट जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़े रहे हैं.

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