Aug 11, 2026 11:20 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान
मुख्य बातें
- अगर माता-पिता ने अपने बच्चे के नाम पर PPF अकाउंट खुलवाया है, तो क्या वे जमा पैसा अपनी मर्जी से निकाल सकते हैं? इस सवाल का जवाब दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले से समझिए

पीपीएफ खाताधारकों को जानना जरूरी
अगर पैरेंट्स अपने बच्चे के नाम पर PPF (पब्लिक प्रोविडेंट फंड ) अकाउंट चला रहे हैं तो यह जरूरी नहीं कि वो अपनी मर्जी से जमा पैसे निकाल सकें। ऐसा ही एक मामला दिल्ली हाईकोर्ट में आया था। इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने जो आदेश दिया है, वो काफी अहम है। ये फैसला हर PPF खाताधारक को जानना जरूरी है।
क्या है मामला?
यह मामला एक पिता और बेटी के बीच PPF खाते को लेकर कानूनी विवाद का है। दरअसल, सुधीर कवात्रा ने वर्ष 1999 में अपनी बेटी शामली कवात्रा के नाम पर PPF अकाउंट खुलवाया था। इस खाते में समय के साथ रकम जमा होती रही और वर्ष 2016 तक इसका कुल फंड 8 लाख रुपये से अधिक हो गया था। 15 साल की मैच्योरिटी के बाद 2016 में शामली के पिता ने पूरी रकम निकाल ली और अकाउंट बंद कर दिया। इसका खुलासा तब हुआ जब शामली PPF अकाउंट से मैच्योरिटी के पैसे निकालने बैंक पहुंची। तब उसे पता चला कि अकाउंट अब मौजूद ही नहीं है, जिससे वह परेशान हो गई।
पिता की इस हरकत से नाराज होकर बेटी शामली ने अदालत का रुख किया। पीड़ित का आरोप था कि पिता ने उसकी शिक्षा और भलाई के नाम पर PPF की रकम निकाली जबकि वह खुद अपनी पढ़ाई के खर्च को पूरा करने में परेशानी का सामना कर रही थी। शामली के मुताबिक आपसी कलह के कारण उसके माता-पिता अलग हो गए थे। अब वह अपनी मां के साथ रहती है।
निचली अदालत ने दिया था फैसला
यह मामला सबसे पहले जिला अदालत में पहुंचा। जिला अदालत ने पिता को न सिर्फ पीपीएफ की पूरी रकम बेटी को वापस करने का आदेश दिया, बल्कि 8% ब्याज देने के लिए भी कहा। जिला अदालत के फैसले से असंतुष्ट होकर पिता ने उस आदेश को चुनौती देने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
दिल्ली हाईकोर्ट ने क्या कहा?
अब दिल्ली हाईकोर्ट ने भी निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया है। जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की अध्यक्षता वाली दिल्ली हाईकोर्ट की बेंच ने कहा कि पिता अपनी बेटी की शिक्षा के लिए निवेश की गई रकम का इस्तेमाल अपनी बेटी और अलग रह रही पत्नी को गुजारा-भत्ता (मेंटेनेंस) देने की अपनी कानूनी जिम्मेदारी पूरी करने के लिए नहीं कर सकता। कोर्ट ने कहा कि बच्चे के नाम पर किया गया निवेश भविष्य की जरूरतों के लिए बनाया गया फंड है। वहीं, भरण-पोषण बच्चे की रोजमर्रा की देखभाल और पालन-पोषण से जुड़ी जिम्मेदारी है। दोनों को एक-दूसरे के बदले इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
