यवतमाल लोहारा हत्याकांड: चार आरोपियों को उम्रकैद की सजा, कोर्ट ने माना दोषी
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Written By:
आंचल लोखंडे
Updated On: Jul 22, 2026 | 04:14 PM IST
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सार
Yavatmal Court Verdict: यवतमाल के चर्चित लोहारा हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायालय ने चार आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। छह साल बाद मामले में फैसला आया।

यवतमाल लोहारा हत्याकां- फाइल फोटो (सोर्सः सोशल मीडिया)
विस्तार
Yavatmal Lohara Murder Case: यवतमाल जिले के बहुचर्चित लोहारा हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायालय ने चार आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है। यह फैसला 21 जुलाई को प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एल. ए. यावलकर ने सुनाया। दोषी करार दिए गए आरोपियों में सिद्धार्थ रामदास वानखेडे (40), दीपक राममनोहर यादव (40), सिद्धांत उर्फ हेमंत राजेश रावेकर (35) तथा अजय धर्माजी वासनिक (30), सभी निवासी देवीनगर, लोहारा शामिल हैं।
मृतक का नाम देविदास उर्फ देवा निरंजन चव्हाण था। अभियोजन के अनुसार 26 अगस्त 2020 को दोपहर करीब 1 से 2 बजे के बीच देविदास कर्ज की राशि जमा कर घर लौट रहे थे। इसी दौरान यवतमाल-लोहारा मार्ग स्थित मारुति शोरूम के पास चारों दोषियों ने उनकी गाड़ी का पीछा किया। सिद्धार्थ वानखेडे ने कार से टक्कर मारकर उन्हें गिरा दिया। जब वे उठकर भागने लगे तो दीपक यादव ने दोबारा कार से टक्कर मार दी।
लोहारा हत्याकांड में चारों आरोपी दोषी करार
इसके बाद सिद्धांत रावेकर ने धारदार हथियार से उनका गला काट दिया, जबकि अजय वासनिक ने कटर जैसी धारदार वस्तु से कई वार किए। वहीं, सिद्धार्थ वानखेडे ने भी चाकू से हमला किया। हत्या की पुष्टि करने के बाद चारों आरोपी मौके से फरार हो गए। घटना के बाद शरद बेंद्रे की शिकायत पर लोहारा पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 एवं 34 के तहत मामला दर्ज किया, तत्कालीन सहायक पुलिस निरीक्षक सचिन लुले और पुलिस उपनिरीक्षक संतोष जायभाये ने जांच पूरी कर न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया। करीब छह वर्ष तक चली सुनवाई के बाद 21 जुलाई 2026 को न्यायालय ने फैसला सुनाया।
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परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को विश्वसनीय माना
न्यायालय ने अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों, प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, चिकित्सीय प्रमाणों तथा अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को विश्वसनीय मानते हुए चारों आरोपियों को दोषी ठहराया। प्रत्येक आरोपी को आजीवन कारावास के साथ दो-दो हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई मामले में सरकार की और से सहायक सरकारी वकील यू. के. पांडे ने पैरवी की। फरियादी पक्ष की ओर से अधिवक्ता समीर गावंडे और अधिवक्ता राजवर्धन गाडे ने सहयोग किया, जबकि जांच में सहायक पुलिस उपनिरीक्षक जगदीश भगत की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
