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न जमीन, न कागज और न कानून की मंजूरी: हवा में सौदे और पांच हजार रु. में करोड़ों की संपत्ति का मालिक बनाने का दावा - Indore News

October 27, 2026

शहर में कुछ कंपनियां बड़ी प्रॉपर्टी में छोटे निवेश और अच्छे मुनाफे का झांसा दे रही हैं। इंदौर की प्रॉपटेक कंपनी iBricx भी ऐसे ही ऑफर कर निवेशकों को ज्यादा मुनाफे का दावा कर रही है। भास्कर रिपोर्टर ने निवेशक बनकर कंपनी का एग्रीमेंट, सरकारी रिकॉर्ड और ज

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  • फ्रैक्शनल ओनरशिप के नाम पर पैसा जुटा रहे, कागजों में निवेशक सिर्फ कंपनी को कर्ज देने वाला

कंपनी प्रचार में छोटे निवेश से ‘प्रॉपर्टी का मालिक बनिए’ का ऑफर दे रही हैं। दस्तावेज बताते हैं कि निवेशक सिर्फ कंपनी के लिए असुरक्षित कर्जदाता है। यानी सिर्फ पैसा निवेशक का, लेकिन न जमीन उसकी, न हक...। एक्सपर्ट्स का कहना है कि देश में फ्रैक्शनल ओनरशिप निवेश के लिए अलग से स्पष्ट कानून नहीं है।

देश में टोकनाइजेशन पर स्पष्ट कानून नहीं, इसी का फायदा उठा रहे

iBricx छोटे निवेशकों से फ्रैक्शनल ओनरशिप इनवेस्टमेंट के नाम पर पैसा जुटा रही है। यह ऐसा है जैसे एक बड़ी प्रॉपर्टी को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटा जाए। हर टुकड़े को ‘डिजिटल टोकन’ कहा जाता है। आप 5000 रुपए देकर एक टोकन खरीद लें। कंपनी दावा करती है कि आप उस प्रॉपर्टी के हिस्सेदार बन गए। कंपनी तकनीक (ब्लॉकचेन और टोकन) की आड़ में SEBI के नियमों को ठेंगा दिखा रही है। भारत में टोकनाइजेशन पर स्पष्ट कानून नहीं है। कंपनी इसी कमी का फायदा उठा रही है।

कंपनी की अपनी पूंजी सिर्फ एक लाख

  • सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार कंपनी की अपनी पूंजी सिर्फ 1 लाख रुपए है। सरकार के तय मॉडल में न्यूनतम निवेश 10 लाख रुपए रखा गया है।
  • कंपनी 940 रुपए (अभी एक हजार रुपए) से निवेश शुरू कराती है। यदि कंपनी बंद हो जाए, विवाद हो जाए या पैसा फंस जाए, तो निवेशक किसके पास जाएगा? भास्कर की जांच में ऐसा कोई नियामकीय पंजीकरण सामने नहीं आया।
  • यदि कोई कंपनी लोगों से पैसा लेकर उसे किसी योजना में लगाती है, मुनाफे का दावा करती है तो सामान्य तौर पर यह कलेक्टिव इनवेस्टमेंट स्कीम (CIS) के अंतर्गत आता है। इसके लिए सेबी के तहत पंजीकरण जरूरी होता है।
  • कंपनी साबलिया खेड़ी की ‘निर्वाणा फार्म्स’ परियोजना में निवेश करा रही है। जांच में सामने आया कि जिस परियोजना में निवेश कराया जा रहा है, सरकारी रिकॉर्ड में वह अभी भी कृषि भूमि दर्ज है। रेरा रजिस्ट्रेशन भी नहीं है।

हम पूरे लीगल नहीं : आशुतोष अग्रवाल- iBricx को-फाउंडर

  • रिपोर्टर(निवेशक बनकर): किस कानून में आप रियल एस्टेट को टोकनाइज कर रहे?
  • आशुतोष: यह एक ‘ग्रे एरिया’ है। भारत में इसके लिए कोई कानून नहीं है। इसलिए हम न तो पूरी तरह लीगल हैं, न गैर कानूनी।
  • रिपोर्टर: क्या टोकन लेने पर प्रॉपर्टी में मालिकाना हक मिलता है?
  • आशुतोष: मालिकाना हक नहीं, हम यूटिलिटी टोकन दे रहे हैं। यह आपको रेंटल इनकम देता है। प्रॉपर्टी बढ़ने पर उसका हिस्सा भी देता है।
  • रिपोर्टर: आप कृषि भूमि (निर्वाणा फार्म्स) पर प्रोजेक्ट के दावे से टोकन कैसे बेच रहे हैं?
  • आशुतोष: वह मेरी अपनी जमीन है। मैं इसे कर सकता हूं।

कंपनी के बारे में जांच कर रहे हैं : सेबी iBricx के संबंध में भास्कर की ओर से पूछे गए सवाल पर सेबी के इंदौर कार्यालय के डीजीएम शैलेश पिंगले ने कहा- कंपनी के संबंध में हमें क्वेरी प्राप्त हुई है। हमारी टीम इस पर काम कर रही है।

भास्कर एक्सपर्ट

अमर जैन, चार्टर्ड अकाउंटेंट कानूनी दायरे के बाहर काम नहीं कर सकते

यदि कोई कंपनी निवेश के नाम पर आम लोगों से पैसा जुटा रही है, तो उसे SEBI के तहत पंजीकृत होना चाहिए। आरबीआई के लागू दिशा-निर्देशों का भी पालन करना चाहिए। फ्रैक्शनल रियल एस्टेट निवेश के लिए सरकार ने SM REIT (स्मॉल एंड मीडियम रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट) का नियामकीय ढांचा उपलब्ध कराया है। कानूनी ढांचों के बाहर काम नहीं कर सकते।

चंचल गुप्ता, एडवोकेट विधि विशेषज्ञ निवेशकों के कानूनी अधिकार प्रभावित

यदि ऐसी कंपनियां SEBI या किसी अन्य सक्षम नियामक प्राधिकरण के तहत पंजीकृत नहीं हैं, तो निवेशक या ऋणदाता के साथ विवाद, धोखाधड़ी या शिकायत की स्थिति में उसकी सुनवाई किस मंच पर होगी? कंपनी प्रचार में मालिकाना हक का दावा करती है, पर दस्तावेजों में वास्तविक स्वामित्व नहीं देती, तो निवेशकों के कानूनी अधिकार सीमित हो सकते हैं।