अन्नदाता को राहत...सामान्य धान 2550 व ग्रेड-ए 2570 रु. में बिकने की उम्मीद, आज कैबिनेट में आ सकता है यह प्रस्ताव
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झारखंड के किसानों के लिए अच्छी खबर है। धान खरीद पर उन्हें मिलनेवाला बोनस बढ़ेगा। इसे 84 रु. से बढ़ा कर 109 रुपए करने का प्रस्ताव है। मंगलवार को होनेवाली कैबिनेट की बैठक में यह प्रस्ताव पारित हो सकता है। वर्ष 2026-27 के लिए केंद्र सरकार ने सामान्य धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,441 रुपए प्रति क्विंटल और ग्रेड ‘ए’ धान का 2,461 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है।
इस प्रस्ताव के अनुसार सामान्य धान पर कुल 2,550 रुपए प्रति क्विंटल और ग्रेड ‘ए’ धान पर 2,570 रुपए प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जाएगा। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार किसानों को प्रति क्विंटल 25 रुपए का अतिरिक्त लाभ मिल सकेगा। इस बार 40 लाख क्विंटल धान खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। लक्ष्य के अनुसार 109 रुपए प्रति क्विंटल बोनस भुगतान के लिए 43 करोड़ 60 लाख रुपए की संभावित राशि का आकलन किया गया है। इस राशि की स्वीकृति के लिए योजना प्राधिकृत समिति के समक्ष प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया है। विभाग ने राज्य के सभी 24 जिलों के लिए धान खरीद की जिला-वार योजना भी तैयार की है।
दिसंबर माह से धान खरीद की तैयारी, प्रशासन तैयारियों में जुटा जामताड़ा जिले में दिसंबर से संभावित धान खरीद को लेकर जिला प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान जिले को दो लाख क्विंटल धान खरीद का लक्ष्य मिला था। ई-उपार्जन पोर्टल के अनुसार, जिले में 1,95,365.91 क्विंटल यानी लगभग 97.68 प्रतिशत लक्ष्य के करीब धान की खरीद हुई थी। इस सरकारी व्यवस्था के तहत कुल 2793 किसानों ने अपना धान बेचा था, जिसके एवज में पोर्टल पर लगभग 47.86 करोड़ रुपए के भुगतान का आंकड़ा दर्ज है। प्रशासन इस बार भी खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।
लैंपस चयन, राइस मिलों की टैगिंग और भंडारण व्यवस्था में सुधार दिसंबर से शुरू होने वाली धान अधिप्राप्ति को लेकर प्रशासन प्रखंडवार लैंपस, पैक्स और एफपीओ के चयन के साथ राइस मिलों की टैगिंग की प्रक्रिया में तेजी से जुटा हुआ है। इस बार खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने केंद्र सरकार के एनएफएसए सेंट्रल पूल के लिए 19.60 लाख क्विंटल तथा झारखंड राज्य खाद्य सुरक्षा योजना के लिए 19,79,412 क्विंटल धान की आवश्यकता का अनुमान लगाया है। इस प्रकार कुल आवश्यकता 39,39,412 क्विंटल होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए लक्ष्य को 40 लाख क्विंटल निर्धारित किया गया है।