भारत में इजरायल फ्लाइट जैसा खौफ, जयपुर में इमर्जेंसी लैंडिंग
भारतीय विमानन इतिहास और सुरक्षा तंत्र से इस वक्त एक बहुत बड़ी, सनसनीखेज और रोंगटे खड़े कर देने वाली खबर सामने आ रही है, जिसने देश भर के एविएशन सेक्टर में हड़कंप मचा दिया है। राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उस वक्त अफरा-तफरी और डर का माहौल बन गया जब आसमान में उड़ रहे एक विमान में अचानक हाईजैक अलर्ट (Hijack Alert) जैसी आपात स्थिति पैदा हो गई। विमान के भीतर सवार यात्रियों और क्रू मेंबर की सांसें तब अटक गईं जब पायलट को किसी गंभीर खतरे या सुरक्षा संबंधी गंभीर संदेश का आभास हुआ। पिछले कुछ सालों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इजरायली उड़ानों और विमान सुरक्षा को लेकर जिस तरह के हाई-प्रोफाइल खतरे देखने को मिले हैं, ठीक वैसा ही खौफ इस घटना के दौरान जयपुर के आसमान में महसूस किया गया। बिना किसी देरी के त्वरित कार्रवाई करते हुए एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) और सुरक्षा एजेंसियों ने तत्परता दिखाई और विमान को जयपुर एयरपोर्ट पर सुरक्षित रूप से इमरजेंसी लैंडिंग (Emergency Landing) कराई।
क्या था पूरा वाकया? आसमान में कैसे बना इजरायल फ्लाइट जैसा खौफनाक और तनावपूर्ण माहौल
प्राप्त शुरुआती जानकारियों और खुफिया सूत्रों के मुताबिक, यह विमान अपनी निर्धारित उड़ान पर था, तभी अचानक कॉकपिट में कुछ ऐसी तकनीकी या संदिग्ध परिस्थितियां बनीं जिससे विमान के अपहरण या खतरे की आशंका पैदा हो गई। विमानन सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत जैसे ही पायलट ने संभावित खतरे का संकेत दिया, सुरक्षा एजेंसियों ने इसे सर्वोच्च प्राथमिकता पर लेते हुए तुरंत हाईजैक जैसे हालातों से निपटने की एसओपी (SOP) एक्टिव कर दी। इस खबर के मिलते ही जयपुर एयरपोर्ट पर तैनात सीआईएसएफ (CISF), स्थानीय पुलिस, बम निरोधक दस्ता और खुफिया विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तुरंत रनवे पर पहुंच गए। विमान के जमीन पर उतरते ही उसे चारों तरफ से पूरी तरह घेर लिया गया और हर एक यात्री तथा उसके सामान की बेहद कड़ी सुरक्षा जांच शुरू की गई। इस दौरान यात्रियों के चेहरे पर साफ तौर पर खौफ और अनिश्चितता का भाव देखा जा सकता था, क्योंकि किसी को भी यह समझ नहीं आ रहा था कि आखिर हवा में ऐसा क्या हुआ जिसने अचानक उनकी इस यात्रा को एक खौफनाक सपने में बदल दिया।
जांच के घेरे में कौन? सुरक्षा एजेंसियां और नेशनल इंटेलिजेंस खंगाल रही हैं हर एक कड़ी
इस उच्च-स्तरीय आपातकालीन घटना के सामने आने के बाद से ही देश की तमाम बड़ी सुरक्षा एजेंसियां, राष्ट्रीय जांच एजेंसियां और नागरिक उड्डयन मंत्रालय (Ministry of Civil Aviation) पूरी तरह से सक्रिय हो गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह बना हुआ है कि आखिर इस संभावित सुरक्षा चूक या फर्जी अलर्ट के पीछे किसका हाथ था और क्या यह किसी सोची-समझी साजिश का हिस्सा था। जांच के घेरे में विमान में सवार संदिग्ध यात्रियों, ग्राउंड स्टाफ और उस रूट से जुड़े सभी कम्युनिकेशंस को शामिल किया गया है। फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स और टेक्निकल टीम्स विमान के ब्लैक बॉक्स, कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) और एयर ट्रैफिक कंट्रोल के बीच हुई बातचीत के हर एक सेकेंड की बारीकी से जांच कर रही हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह कोई तकनीकी खराबी थी, किसी शरारती तत्व की हरकत थी या फिर कोई बड़ा अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा षड्यंत्र था।
यात्रियों को सुरक्षित उतारा गया, एयरपोर्ट पर सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद और आगे की कार्रवाई जारी
गनीमत यह रही कि सभी सुरक्षा एजेंसियों की सूझबूझ और तत्परता के चलते विमान को सकुशल उतार लिया गया और किसी भी प्रकार के बड़े जानमाल के नुकसान की कोई खबर सामने नहीं आई है। विमान से सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालकर एक सुरक्षित लाउंज में पहुंचाया गया, जहां उनसे पूछताछ और उनकी काउंसलिंग की जा रही है। इस घटना के बाद से भारत के तमाम प्रमुख हवाई अड्डों पर सुरक्षा के स्तर को और अधिक कड़ा कर दिया गया है तथा हर उड़ान पर विशेष नजर रखी जा रही है। जांच एजेंसियां इस मामले की तह तक जाने के लिए पूरी शिद्दत से जुटी हुई हैं, और जल्द ही इस बात का आधिकारिक खुलासा किया जाएगा कि इस हाईजैक जैसे खौफनाक अलर्ट के पीछे असल में कौन लोग जिम्मेदार थे और इसके क्या उद्देश्य थे।