हरीश रावत के हरिद्वार से चुनाव लड़ने के संकेत पर भाजपा सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने चुटकी लेते हुए उन्हें 'गुगली मास्टर' बताया। जानिए हरिद्वार में क्यों गरमाई सियासत।
दून हॉराइज़न, हरिद्वार (26 सितंबर) : धर्मनगरी हरिद्वार की राजनीतिक पिच पर आगामी विधानसभा चुनाव (Uttarakhand Assembly Election) से पहले ही जबरदस्त जुबानी जंग शुरू हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत द्वारा हरिद्वार से चुनावी पारी खेलने की ख्वाहिश जताए जाने के बाद अब भाजपा सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने उन पर सीधा हमला बोला है। हरिद्वार में आयोजित सांसद खेल महोत्सव के दौरान मीडिया से मुखातिब त्रिवेंद्र ने हरीश रावत को राजनीति का ‘गुगली मास्टर’ करार दिया।
प्रसन्ना की फिरकी से की हरीश दा की तुलना
सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने तंजिया लहजे में भारतीय क्रिकेट इतिहास के दिग्गज स्पिनर ईएएस प्रसन्ना का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि पुराने दौर में प्रसन्ना जब फिरकी फेंकते थे, तो बल्लेबाज को भनक तक नहीं लगती थी कि गिल्लियां कब बिखर जाएंगी। त्रिवेंद्र के मुताबिक हरीश रावत का मिजाज भी बिल्कुल वैसा ही है—उनकी सियासी गुगली कब किसका स्टंप उखाड़ दे या फिर वे खुद ही कैच आउट होकर पवेलियन लौट जाएं, इसका अंदाजा खुद उनकी पार्टी कांग्रेस को भी नहीं रहता। साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ दिया कि उम्र के इस दौर में हरीश दा के लिए हरिद्वार में सक्रिय रहना ही मुनासिब है। वे उनके बेहतर स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करते हैं।
‘अंतिम यात्रा’ वाले बयान से गरमाई हरिद्वार की सियासी जमीन
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत हाल ही में अस्वस्थ रहने के बाद दोबारा मैदान में उतरे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया और जनसभाओं के जरिए साफ संकेत दिए कि वे हरिद्वार की जनता का कर्ज उतारना चाहते हैं। हरीश दा ने भावुक कार्ड खेलते हुए यहां तक कह डाला कि उनकी दिली तमन्ना है कि दुनिया से उनकी अंतिम विदाई हरिद्वार के जनप्रतिनिधि के रूप में हो।
सियासी गलियारों में चर्चाएं तेज हैं कि रावत हरिद्वार जिले की किसी सुरक्षित या अनुकूल विधानसभा सीट से अपनी दावेदारी ठोकने के मूड में हैं। हालांकि उन्होंने अभी तक किसी खास सीट का नाम उजागर नहीं किया है।
रावत परिवार के लिए आसान नहीं रही है राह
हरिद्वार संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों का इतिहास हरीश रावत परिवार के लिए मिले-जुले नतीजों वाला रहा है। साल 2009 के आम चुनाव में हरीश रावत ने हरिद्वार लोकसभा सीट से ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी, जिसने उन्हें केंद्र में कैबिनेट मंत्री की कुर्सी तक पहुंचाया।
लेकिन इसके बाद चुनावी डगर कठिन होती चली गई:
- 2014 लोकसभा चुनाव: हरीश रावत की पत्नी रेणुका रावत को भाजपा के डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के हाथों शिकस्त झेलनी पड़ी।
- 2022 विधानसभा चुनाव: राहत की बात यह रही कि हरीश रावत की बेटी अनुपमा रावत ने हरिद्वार ग्रामीण सीट से तत्कालीन कैबिनेट मंत्री यतीश्वरानंद को मात देकर जीत दर्ज की।
- 2024 लोकसभा चुनाव: हरीश रावत के बेटे वीरेंद्र रावत को कांग्रेस ने हरिद्वार से टिकट दिया, लेकिन उन्हें खुद त्रिवेंद्र सिंह रावत के हाथों भारी अंतर से शिकस्त का सामना करना पड़ा।
त्रिवेंद्र सिंह रावत और मुख्यमंत्री के सलाहकार दिनेश अग्रवाल के तीखे बयानों से साफ है कि भाजपा हरीश रावत के ‘इमोशनल कार्ड’ को चुनावी हथियार नहीं बनने देना चाहती।