रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदना पड़ेगा भारी? ट्रंप के नए बिल से भारत और चीन की क्यों उड़ी नींद?
Published: Wednesday, September 23, 2026, 12:51 [IST]
Donald Trump Tariff Act 2026: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और ईरान पर दबाव बढ़ाने वाले नए कानून को मंजूरी दे दी है। लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026 (Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026) नाम के इस कानून के तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले कुछ देशों के सामान पर अमेरिका 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगा सकता है। भारत और चीन इस कानून को लेकर चर्चा में हैं, क्योंकि दोनों रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदते हैं।
हालांकि, अभी भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ नहीं लगाया गया है। कानून ट्रंप को ऐसा शुल्क लगाने का अधिकार देता है, लेकिन इसके लिए कुछ शर्तें भी हैं। अगर आगे चलकर भारत इसके दायरे में आता है तो असर सिर्फ तेल कारोबार पर नहीं पड़ेगा। भारत से अमेरिका जाने वाली दवाइयों, इलेक्ट्रॉनिक सामान, कपड़ों, मशीनरी और दूसरे सामान पर भी इसका असर हो सकता है।
18 सितंबर को ट्रंप ने कानून को मंजूरी दी
डोनाल्ड ट्रंप ने 18 सितंबर 2026 को इस कानून पर हस्ताक्षर किए। इससे पहले 16 सितंबर को अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने इसे 262-159 वोट से पास किया था। अमेरिकी सीनेट भी इस बिल को मंजूरी दे चुकी थी। इस कानून का नाम रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ओ. ग्राहम के नाम पर रखा गया है। जुलाई 2026 में उनका निधन हो गया था। वह रूस के खिलाफ कड़े कदम उठाने के समर्थक रहे थे।
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भारत पर अभी नहीं लगा 100% टैरिफ
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि इस कानून के पास होने के बाद भारत पर सीधे 100 प्रतिशत टैरिफ नहीं लग गया है। कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले कुछ देशों के अमेरिका भेजे जाने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाने का अधिकार मिला है।
रूस के तेल और गैस के पांच बड़े खरीदारों को इसके दायरे में लाया जा सकता है। इसके अलावा रूस पर लगे प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले कुछ देशों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। यानी भारत पर टैरिफ लगाना अभी अलग फैसला होगा। फिलहाल सिर्फ इतना हुआ है कि ट्रंप को ऐसा शुल्क लगाने का अधिकार मिल गया है।
रूस से भारत कितना तेल खरीद रहा है?
भारत के लिए यह मामला इसलिए अहम है क्योंकि रूस अभी भी देश का सबसे बड़ा कच्चा तेल सप्लायर है। अगस्त 2026 में भारत ने रूस से करीब 2.08 मिलियन बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल खरीदा। यह भारत के कुल कच्चे तेल आयात का करीब 45 प्रतिशत था। हालांकि, जुलाई के मुकाबले अगस्त में रूस से तेल की खरीद कम हुई। जुलाई में भारत ने करीब 2.82 मिलियन बैरल प्रतिदिन रूसी कच्चा तेल खरीदा था। इसके बावजूद रूस भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना रहा।
भारत और चीन रूस के बड़े खरीदार
रूस के कच्चे तेल के बड़े खरीदारों में भारत और चीन शामिल हैं। दिसंबर 2022 से अगस्त 2026 के बीच रूस के कुल कच्चे तेल निर्यात में चीन की हिस्सेदारी करीब 50 प्रतिशत और भारत की करीब 37 प्रतिशत रही। इसी वजह से नए अमेरिकी कानून के बाद भारत और चीन पर संभावित कार्रवाई को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
टैरिफ लगा तो इन सामान पर भी पड़ेगा असर
अगर भविष्य में भारत पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाता है तो इसका असर सिर्फ तेल कारोबार तक सीमित नहीं रहेगा। भारत से अमेरिका जाने वाली दवाइयां, इलेक्ट्रॉनिक सामान, मशीनरी, कपड़े, रसायन, इंजीनियरिंग सामान और जेम्स-ज्वेलरी जैसे उत्पाद भी प्रभावित हो सकते हैं।
अमेरिका भारत के बड़े निर्यात बाजारों में से एक है। ऐसे में ज्यादा टैरिफ लगने पर अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान महंगा हो सकता है। इससे भारत से अमेरिका सामान भेजने वाली कंपनियों पर दबाव बढ़ सकता है।
रूस की 'शैडो फ्लीट' भी निशाने पर
इस कानून में रूस की तथाकथित 'शैडो फ्लीट' पर भी कार्रवाई का प्रावधान है। ये ऐसे जहाज हैं जिनका इस्तेमाल रूसी तेल को प्रतिबंधों से बचाकर दूसरे देशों तक पहुंचाने के लिए किए जाने की बात कही जाती है। कानून में रूसी सामान पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान भी है। हालांकि, कुछ जरूरी सामान को इससे बाहर रखा गया है।
हर 180 दिन में होगी समीक्षा
अमेरिकी प्रशासन हर 180 दिन में संबंधित देशों की स्थिति की समीक्षा करेगा। इसमें यह देखा जाएगा कि कौन सा देश रूस से कितना तेल और गैस खरीद रहा है और क्या वह रूस पर लगे प्रतिबंधों से बचने में किसी तरह मदद कर रहा है। कुछ खास परिस्थितियों में अमेरिकी राष्ट्रपति को टैरिफ से छूट देने का अधिकार भी दिया गया है।
ईरान पर भी जारी रहेगा अमेरिकी दबाव
नए कानून में सिर्फ रूस ही नहीं, बल्कि ईरान को लेकर भी प्रावधान हैं। ईरान सैंक्शंस एक्ट, 1996 (Iran Sanctions Act, 1996) की अवधि बढ़ाकर 2031 तक कर दी गई है। इसके तहत ईरान के ऊर्जा क्षेत्र और कुछ हथियारों से जुड़े कारोबार पर अमेरिकी प्रतिबंध आगे भी जारी रहेंगे।
भारत ने ऊर्जा सुरक्षा को बताया अहम
भारत ने कहा है कि उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक भारत अलग-अलग देशों से तेल और गैस खरीदने की नीति जारी रखेगा और बाजार की स्थिति देखकर फैसले लेगा।
भारत ने हाल के महीनों में अमेरिकी अधिकारियों के साथ इस मुद्दे पर बातचीत भी की है। नई दिल्ली ने अमेरिका के सामने भारत-अमेरिका संबंधों और दुनिया के ऊर्जा बाजार पर पड़ने वाले संभावित असर की बात रखी है। फिलहाल भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लागू नहीं हुआ है। आगे भारत इस कानून के दायरे में आता है या नहीं, यह अमेरिकी प्रशासन के फैसले पर निर्भर करेगा।
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