डेढ़ लाख आउटसोर्स कर्मियों का रिकॉर्ड पोर्टल पर होगा:अगले माह से ऑफलाइन पास नहीं होंगे बिल, कर्मचारियों के वेतन की होगी ऑनलाइन निगरानी
भोपाल37 मिनट पहले
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सभी विभागों को 31 अक्टूबर तक ROMS पर रिकॉर्ड दर्ज करने के दिए निर्देश राज्य सरकार विभागों में कार्यरत करीब डेढ़ लाख आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतन और सेवा रिकॉर्ड को ऑनलाइन ट्रैक करेगी। यह भी देखा जाएगा कि कर्मचारियों को तय वेतन पूरा मिल रहा है या नहीं। इसके लिए आउटसोर्स कर्मचारियों की केवाईसी सहित सभी जानकारी रोम्स (रिसोर्स आउटसोर्सिंग एजेंसी मैनेजमेंट सिस्टम) पोर्टल पर दर्ज करना अनिवार्य किया गया है। जिन विभागों में आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत हैं, उन्हें अक्टूबर 2026 तक यह जानकारी पोर्टल पर दर्ज करनी होगी।
कौन कहां तैनात, कितना वेतन; पूरा रिकॉर्ड रहेगा नई व्यवस्था में किस विभाग में किस एजेंसी के कितने कर्मचारी हैं, उनकी योग्यता, पद व काम की जानकारी पोर्टल पर रहेगी। उनकी पहचान, उपस्थिति को आधार आधारित ई-केवाईसी से जोड़ा जाएगा। पुराने व नए अनुबंध, कार्यादेश और एजेंसियों की जानकारी भी दर्ज होगी। तय समय में रिकॉर्ड ऑनलाइन नहीं करने पर संबंधित आउटसोर्स एजेंसियों के बिल रोके जाएंगे।
एजेंसी पूरा भुगतान लेती थी, कर्मचारी को कम मिलने की शिकायत : सरकार आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन निर्धारित करती है। इसके बावजूद ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें एजेंसी सरकार से निर्धारित राशि का भुगतान लेने के बाद कर्मचारी को उसके अनुसार पूरी राशि नहीं देती थी। नई व्यवस्था से सरकार भुगतान को ट्रैक कर सकेगी।
न्यूनतम मासिक वेतन अकुशल 12,425 रुपए अर्द्धकुशल 13,421 रुपए कुशल 15,144 रुपए अति कुशल 16,769 रुपए
31 अक्टूबर के बाद पोर्टल से ही बनेंगे बिल : वित्त विभाग ने सभी विभागों को 31 अक्टूबर तक प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद आउटसोर्स सेवाओं के बिल रोम्स पोर्टल से ही जनरेट होंगे।
लोक निर्माण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी समेत विभिन्न विभागों में कार्यरत 70 हजार से ज्यादा स्थाई कर्मचारियों का वेतन बढ़ सकता है। सामान्य प्रशासन विभाग की राज्य कर्मचारी कल्याण समिति ने इन कर्मचारियों का वेतन बढ़ाने की सिफारिश मुख्यमंत्री से की है। समिति के चेयरमैन रमेशचंद्र शर्मा ने गुरुवार को इस संबंध में प्रस्ताव भेजा है। सामान्य प्रशासन विभाग ने 7 अक्टूबर 2016 को दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमित करने की योजना बनाई थी। इसके तहत कर्मचारियों को उनकी श्रेणी के अनुसार वेतन और वार्षिक वेतनवृद्धि का लाभ दिया गया था। 1 सितंबर 2016 तक की सेवा अवधि के आधार पर उनका वेतन निर्धारित किया गया था। समिति का कहना है कि योजना लागू हुए करीब 10 साल हो चुके हैं। अधिकतम सीमा तक पहुंच चुके कर्मचारियों को करीब पांच साल से इसका लाभ नहीं मिल रहा है। इससे उनका वेतन आगे नहीं बढ़ पा रहा।
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