काम की बात: साइबर फ्रॉड में फंसा पैसा घर बैठे आएगा वापस, सरकार का नया ऑनलाइन सिस्टम
Sep 07, 2026 10:24 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान

सरकार ने साइबर फ्रॉड पीड़ितों के लिए I4C का Money Restoration Module शुरू किया है। इसके जरिए फ्रीज हुई रकम को वापस पाने के लिए ऑनलाइन रिक्वेस्ट की जा सकती है।

साइबर फ्रॉड पीड़ितों के लिए खास Money Restoration Module शुरू किया गया है।
ऑनलाइन फ्रॉड में पैसे गंवाने वाले लोगों के लिए सरकार ने एक नई सुविधा शुरू की है। अगर साइबर फ्रॉड के बाद आपका पैसा आरोपी या किसी संबंधित बैंक खाते में फ्रीज/होल्ड हो गया है, तो अब उसे वापस पाने के लिए हर बार बैंक या सरकारी ऑफिस के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी। गृह मंत्रालय के अंडर काम करने वाले Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) ने इसके लिए Money Restoration Module (MRM) शुरू किया है।
नए मॉड्यूल की मदद से एलिजिबल साइबर फ्रॉड पीड़ित ऑनलाइन ही अपने फ्रीज किए गए पैसे वापस पाने के लिए रिक्वेस्ट कर सकते हैं। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि MRM पैसा वापस मिलने की गारंटी नहीं देता। पहले शिकायत के आधार पर रकम को ट्रेस करके आरोपी या संबंधित खाते में फ्रीज किया जाना जरूरी है। इसके बाद ही रिफंड की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
सबसे पहले 1930 पर करें शिकायत
अगर आपके साथ ऑनलाइन फ्रॉड होता है, तो सबसे जरूरी है कि बिना देरी किए 1930 साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर शिकायत करें या National Cyber Crime Reporting Portal (NCRP) पर शिकायत दर्ज करें। जल्दी शिकायत करने से ठगी की रकम को आगे ट्रांसफर होने से पहले फ्रीज कराने की संभावना बढ़ जाती है। शिकायत दर्ज होने के बाद आपको एक 14 अंकों का NCRP acknowledgement number मिलता है। MRM के जरिए रिफंड रिक्वेस्ट करते वक्त इसी नंबर की जरूरत होगी।
कैसे मिलेगा फ्रीज पैसा वापस?
इसके लिए MRM में जाकर ‘Raise Refund Request’ विकल्प चुनना होगा। इसके बाद 14 अंकों का NCRP acknowledgement number एंटर करके OTP के जरिए वेरिफिकेशन करना होगा। वेरिफिकेशन के बाद पोर्टल पर आपकी शिकायत और रिफंड से जुड़ी जानकारी दिखाई जाएगी। यहां आपको उस बैंक अकाउंट की सही जानकारी देनी होगी, जिसमें रकम प्राप्त करनी है।
गलत बैंक डिटेल डालने पर रिफंड में देरी हो सकती है या प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। ऐसे में अकाउंट नंबर और अन्य बैंकिंग जानकारी भरते समय खास सावधानी बरतना जरूरी है।
PAN कार्ड भी करना होगा अपलोड
रिफंड रिक्वेस्ट के दौरान पीड़ित को PAN कार्ड की कॉपी अपलोड करनी होगी। अगर मामले से संबंधित कोई कोर्ट ऑर्डर उपलब्ध है, तो उसे भी पोर्टल पर अपलोड किया जा सकता है। सभी जानकारी और दस्तावेज जमा करने के बाद रिक्वेस्ट सबमिट करनी होगी। इसके बाद सिस्टम एक 14 अंकों का Unique Request Number (URN) जारी करेगा। इसके जरिए रिफंड रिक्वेस्ट को ट्रैक किया जा सकता है।
इसके बाद भी पूरी नहीं होती प्रक्रिया
रिक्वेस्ट सबमिट करने के बाद भी पैसा तुरंत खाते में नहीं आ जाता। मामले के अनुसार पीड़ित को पुलिस के पास indemnity bond जमा करने के लिए कहा जा सकता है। इसके बाद बैंक, पुलिस और अन्य संबंधित संस्थाएं लागू कानूनी प्रक्रिया के तहत रकम बहाल करने की कार्रवाई करती हैं। यानी MRM को ऐसा सिस्टम नहीं समझना चाहिए जिससे हर साइबर फ्रॉड का पैसा अपने आप वापस मिल जाएगा। इसकी मदद तभी मिल सकती है जब ठगी की रकम का पता लगाकर उसे संबंधित खाते में फ्रीज किया जा चुका हो।
सरकार ने क्यों शुरू किया यह सिस्टम?
डिजिटल पेमेंट और ऑनलाइन बैंकिंग के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर फ्रॉड भी बड़ी चुनौती बन गया है। सरकार के मुताबिक, 30 जून 2026 तक CFCFRMS के जरिए 32.8 लाख से अधिक शिकायतों में 11,158 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम बचाई गई थी। पहले फ्रीज रकम को वापस पाने की प्रक्रिया में पीड़ितों को पुलिस, बैंक और दूसरी एजेंसियों के बीच काफी भागदौड़ करनी पड़ सकती थी। MRM का मकसद इसी प्रक्रिया को ऑनलाइन और ज्यादा आसान बनाना है।
लेखक के बारे में
Pranesh Tiwari
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चाहे वह किसी नए AI टूल की पड़ताल हो या किसी अनदेखी जगह की यात्रा.. प्राणेश का लक्ष्य हमेशा एक बेहतरीन कहानी बुनना ही होता है।
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