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मौसम का हाल: दिल्ली में आज भी बारिश के आसार; किन राज्यों में जमकर बरसेंगे बादल, कहां सताएगी गर्मी?

September 7, 2026

दिल्ली में सोमवार को एक बार फिर बारिश का दौर देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग के मुताबिक, राजधानी में आज कई जगह हल्की बारिश होगी, जबकि कुछ इलाकों में मध्यम बारिश भी हो सकती है। सुबह और दोपहर से पहले गरज के साथ बिजली चमकने की भी संभावना है। दोपहर से शाम के बीच फिर हल्की बारिश हो सकती है। रविवार को हुई बारिश से उमस से परेशान लोगों को कुछ राहत मिली, लेकिन कई इलाकों में जलभराव ने परेशानी बढ़ा दी। मौसम विभाग का अनुमान है कि सोमवार इस सप्ताह दिल्ली में बारिश के लिहाज से सबसे सक्रिय दिन रहेगा। इसके बाद मंगलवार से बारिश की गतिविधियां घटेंगी और मौसम धीरे-धीरे सूखा होने लगेगा।



दिल्ली के मौसम पर उत्तर प्रदेश के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से और उससे लगे इलाकों में बने कम दबाव के क्षेत्र का असर बना हुआ है। यही वजह है कि राजधानी और आसपास के इलाकों में बादल और बारिश का सिलसिला जारी है। सोमवार को दिल्ली का अधिकतम तापमान 33 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है, जबकि न्यूनतम तापमान 23 से 25 डिग्री सेल्सियस रह सकता है। वहीं, एक दिन पहले गुरुग्राम के कई प्रमुख रास्तों पर भी जलभराव से यातायात प्रभावित हुआ। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शनिवार को सद्भावना पार्क और आसपास की सड़कों का औचक निरीक्षण कर स्थानीय हालात का जायजा लिया।

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क्या दिल्ली में कल से मौसम साफ होने लगेगा?

8 सितंबर से दिल्ली में बारिश की गतिविधि कम होने का अनुमान है। मंगलवार को आसमान आंशिक रूप से बादलों से घिरा रह सकता है और अधिकतम तापमान 33 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है। न्यूनतम तापमान 24 से 26 डिग्री सेल्सियस रह सकता है। 9 और 10 सितंबर को अधिकतम तापमान 32 से 34 डिग्री और न्यूनतम 24 से 27 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। 11 और 12 सितंबर को भी आसमान में बादल रह सकते हैं, लेकिन बारिश का अनुमान नहीं है। इन दोनों दिनों में दिन का तापमान 31 से 33 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है। यानी दिल्ली वालों को सोमवार की बारिश के बाद धीरे-धीरे राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन बादल और उमस पूरी तरह खत्म नहीं होगी।

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उत्तर और मध्य भारत में कहां भारी बारिश का खतरा है?

मौसम विभाग के अनुसार, मध्य प्रदेश और उससे सटे पश्चिम उत्तर प्रदेश के ऊपर बना कम दबाव का क्षेत्र अब दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश और आसपास के इलाकों में पहुंच गया है। इसके साथ एक चक्रवाती परिसंचरण भी बना हुआ है और इसके अगले 24 घंटे में उत्तर-पूर्व की ओर बढ़ने की संभावना है। मानसून ट्रफ भी उत्तर भारत से लेकर पूर्वी भारत तक सक्रिय बनी हुई है। इसका असर दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों में बारिश के रूप में देखने को मिल सकता है।



पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में बारिश कितनी तेज होगी?

  • पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों में भी मौसम सक्रिय रहेगा। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 7-8 सितंबर तथा 11-12 सितंबर को भारी बारिश हो सकती है। गांगेय पश्चिम बंगाल में 7 से 9 सितंबर तक भारी बारिश का अनुमान है और 7 सितंबर को तेज बिजली गिरने की चेतावनी भी है।
  • बिहार में 7 और 8 सितंबर, झारखंड में 9 सितंबर तथा ओडिशा में 9 से 12 सितंबर तक भारी बारिश हो सकती है। अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 7 से 12 सितंबर तक भारी बारिश और तूफानी मौसम की संभावना है। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और नदियों का जलस्तर बढ़ने से खतरा पैदा हो सकता है।

पश्चिम और दक्षिण भारत में बारिश होगी या गर्मी सताएगी?

  • पश्चिमी तट पर कोंकण और गोवा में 7 से 12 सितंबर तक व्यापक बारिश होने का अनुमान है। गुजरात, मध्य महाराष्ट्र और सौराष्ट्र में बारिश हल्की और कुछ-कुछ जगहों तक सीमित रह सकती है। दक्षिण भारत में मौसम का मिजाज अलग रहेगा। तटीय आंध्र प्रदेश और यनम में 11 और 12 सितंबर को भारी बारिश हो सकती है, जबकि तमिलनाडु, पुदुचेरी और कराईकल में 7 से 10 सितंबर के बीच गरज के साथ छिटपुट बारिश का अनुमान है।
  • दूसरी ओर, तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, केरल और माहे में 7 और 8 सितंबर को गर्म और उमस भरा मौसम लोगों को परेशान कर सकता है। पिछले 24 घंटे में मैदानी इलाकों में सबसे कम न्यूनतम तापमान 15.6 डिग्री सेल्सियस यवतमाल में और सबसे ज्यादा तापमान 39.9 डिग्री सेल्सियस वेल्लोर में दर्ज किया गया। तटीय कर्नाटक और उत्तर तथा दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में 7 सितंबर को 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।

समुद्र में मछुआरों के लिए मौसम विभाग ने क्या चेतावनी दी है?

समुद्र में जाने वालों के लिए भी मौसम विभाग ने गंभीर चेतावनी दी है। अरब सागर में सोमालिया तट के पास तथा दक्षिण-पश्चिम और पश्चिम-मध्य अरब सागर के कुछ हिस्सों में 11 सितंबर तक खराब मौसम रहने की संभावना है। यहां हवा की रफ्तार 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे रह सकती है और झोंकों के साथ यह 65 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। ओमान तट के आसपास भी खराब मौसम की आशंका है। बंगाल की खाड़ी में कोमोरिन और मन्नार की खाड़ी, दक्षिण तमिलनाडु तट और श्रीलंका तट के पास 8 से 11 सितंबर के बीच समुद्र की स्थिति खराब रह सकती है। मछुआरों को इन इलाकों में समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है। छोटी नावों, जहाजों और ट्रॉलरों को सुरक्षित जगह पर बांधकर रखने को कहा गया है।

बारिश से आम लोगों और किसानों की मुश्किलें कैसे बढ़ सकती हैं?

  • भारी बारिश और तेज हवाओं से शहरों में जलभराव, यातायात बाधित होने और निचले इलाकों में अचानक पानी भरने की समस्या बढ़ सकती है। कमजोर पेड़ों की शाखाएं टूट सकती हैं और केले, पपीते तथा सहजन जैसे पेड़ों को नुकसान पहुंच सकता है। कच्चे घरों, झोपड़ियों और कमजोर दीवारों पर भी खतरा है।
  • तेज हवा से छतों पर रखी हल्की चीजें उड़ सकती हैं। बारिश के दौरान दृश्यता कम होने से सड़क हादसों का खतरा बढ़ सकता है और परिवहन सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। बिजली चमकने के दौरान पेड़ों के नीचे खड़े न होने और घरों में बिजली के उपकरणों के प्लग निकालने की सलाह दी गई है।
  • किसानों के लिए भी जल निकासी सबसे अहम है। अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में धान, मक्का और सोयाबीन के खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने की व्यवस्था करने तथा बारिश के दौरान खाद और कीटनाशक का छिड़काव नहीं करने की सलाह है।

फसल बचाने के लिए किसानों को क्या करना होगा?

पश्चिम बंगाल और सिक्किम में सब्जियों और फलों के बागों में पानी जमा न होने देने की सलाह दी गई है। बिहार और उत्तर प्रदेश में खेत बहुत गीले होने पर जुताई और बुवाई से बचने को कहा गया है। सब्जियों के छोटे पौधों को सहारा देने की सलाह है। पंजाब, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में मक्का और दालों के खेतों से पानी निकालने की व्यवस्था जरूरी बताई गई है। मध्य प्रदेश में सोयाबीन, कपास और गन्ने के खेतों में पानी जमा न होने देने तथा गन्ने की फसल को तेज हवा से गिरने से बचाने के लिए उसे बांधने की सलाह है। पूर्वी राजस्थान में टमाटर, मिर्च और बैंगन जैसी तैयार सब्जियां बारिश से पहले तोड़ने और बाजरे की फसल को बीमारी से बचाने की सलाह दी गई है। तमिलनाडु में केले और पपीते के पेड़ों को सहारा देने को कहा गया है। पशुपालकों को जानवरों को सुरक्षित शेड में रखने, चारे को सूखी जगह पर बचाकर रखने और मछली पालकों को तालाबों के किनारों पर मजबूत जाल लगाने की सलाह दी गई है। कटी हुई फसल को सुरक्षित जगह पहुंचाने या तिरपाल से ढककर रखने को कहा गया है। यानी आने वाले दिनों में कहीं बारिश राहत देगी तो कहीं यही बारिश बड़ी चुनौती बन सकती है।