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नेपाल में टला नहीं खतरा! चीन ने दी नए भूस्खलन और बाढ़ की चेतावनी, हजारों लोग अब भी लापता | nepal-glacier-flood-new-landslide-warning-china-himalayan-disaster-2026

September 2, 2026

काठमांडू। नेपाल में हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद हालात सामान्य होने की कोशिश में हैं, लेकिन खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि प्रभावित क्षेत्र के पहाड़ी ढलान और आसपास के ग्लेशियर अब भी अस्थिर हैं। ऐसे में नए भूस्खलन या अस्थायी मलबा बांध टूटने से दोबारा अचानक बाढ़ आ सकती है।

इस प्राकृतिक आपदा में नेपाल में अब तक 1,050 से अधिक लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि करीब 3,900 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी 16 लोगों की मौत और सैकड़ों लोगों के लापता होने की खबर है।

ग्लेशियर टूटने के बाद मचा था भारी तबाही का मंजर

26 अगस्त को नेपाल के लांगटांग लिरुंग क्षेत्र में करीब 5,200 मीटर की ऊंचाई पर ग्लेशियर का एक बड़ा हिस्सा अचानक टूट गया। इसके बाद बर्फ, पानी, चट्टानों और मलबे का तेज बहाव नीचे की ओर आया। बताया गया कि मलबे की रफ्तार करीब 50 मीटर प्रति सेकंड तक पहुंच गई थी और यह 20 किलोमीटर से अधिक दूरी तक बहता चला गया।

संकरी हिमालयी घाटियों से गुजरते हुए बाढ़ अपने साथ बड़ी मात्रा में मिट्टी, पत्थर और अन्य मलबा ले गई। इससे सड़कें, पुल, बस्तियां और जलविद्युत परियोजनाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं।

चीन ने क्यों जारी की नई चेतावनी?

आपदा के बाद प्रभावित इलाकों में जमा पानी का बड़ा हिस्सा निकल चुका है और कई नदियों का प्रवाह भी सामान्य होने लगा है। हालांकि, चीन के विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ों में अस्थिरता अभी बनी हुई है।

भूस्खलन के बाद कई जगहों पर मलबा जमा होकर अस्थायी प्राकृतिक बांध बना सकता है। यदि इन बांधों में अचानक दरार पड़ती है या वे टूट जाते हैं, तो नीचे की ओर तेज पानी और मलबे का नया सैलाब आ सकता है। इसके अलावा, कमजोर हो चुके ग्लेशियर और पहाड़ी ढलान दोबारा खिसक सकते हैं।

133 भारतीय नागरिकों के लापता होने की खबर

इस आपदा से विदेशी नागरिक भी प्रभावित हुए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक करीब 133 भारतीय नागरिकों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर मौजूद लोगों के भी शामिल होने की बात कही जा रही है। सीमा क्षेत्र में खड़े 300 से अधिक वाहन और ट्रक भी बाढ़ के तेज बहाव में बह गए।

जलवायु परिवर्तन बढ़ा रहा है खतरा

वैज्ञानिकों के मुताबिक बढ़ते वैश्विक तापमान के कारण हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। इससे ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फ और चट्टानों की स्थिरता प्रभावित हो रही है। नेपाल जैसे पहाड़ी देश में यह स्थिति और गंभीर है, क्योंकि कई सड़कें, बस्तियां और पनबिजली परियोजनाएं संकरी नदी घाटियों के आसपास स्थित हैं।

फिलहाल राहत और बचाव दल मलबे में लोगों की तलाश कर रहे हैं। लेकिन विशेषज्ञों की चेतावनी के बाद प्रशासन के सामने राहत कार्य के साथ-साथ नए भूस्खलन और अचानक बाढ़ से निपटने की चुनौती भी बनी हुई है।