एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा राम मंदिर जन्मभूमि ट्रस्ट के पहले मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) नियुक्त किए गए हैं. मिश्रा इसी साल 30 अप्रैल को अपने पद से रिटायर हुए हैं. मिश्रा ने कारगिल युद्ध के दौरान टाइगर हिल्स पर कब्जा जमाने में बड़ी भूमिका निभाई थी. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी कमान को लीड किया था. उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के बनकटा के रहने वाले जितेंद्र मिश्रा 1986 में वायुसेना में शामिल हुए थे.
अयोध्या के राम मंदिर के CEO के तौर पर चुने गए जितेंद्र मिश्रा को लेकर चर्चा काफी बढ़ गई है. जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना के बेहद अनुभवी अधिकारी रहे हैं. वह एयर मार्शल के पद से रिटायर हुए और भारतीय वायुसेना की वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ भी रह चुके हैं. उन्होंने 1986 में फाइटर स्ट्रीम में कमीशन लिया था और करीब चार दशक का सैन्य करियर पूरा किया. उन्होंने साल 2025 में पश्चिमी वायु कमान के वायु अधिकारी कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में काम किया था.
39 सालों तक थे कार्यरत
उन्हें दिसंबर 1986 में लड़ाकू पायलट के रूप में भारतीय वायु सेना में कमीशन मिला था. 39 सालों की सर्विस में, एयर मार्शल ने महत्वपूर्ण कमान और स्टाफ पदों पर कार्यरत रहे हैं. अपने करियर में उन्होंने फाइटर पायलट, टेस्ट पायलट, ट्रेनिंग और रणनीतिक योजना से लेकर कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं. उनके पास 3,000 घंटे से ज्यादा उड़ान का अनुभव है और उन्होंने 18 से ज्यादा तरह के फाइटर, ट्रांसपोर्ट विमान और हेलिकॉप्टर उड़ाए हैं.

कई अवॉर्ड किए अपने नाम
जितेंद्र मिश्रा ने अपने कार्यकाल में कई सारे अवॉर्ड भी अपने नाम किया है. उन्होंने ऑपरेशन सिन्दूर के दौरान अहम भूमिका निभाई थी, जिसके लिए उन्हें साल 2025 के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सर्वोत्तम युद्ध सेवा पदक मिला था. इसके अलावा उन्हें 2024 में अति विशिष्ट सेवा पदक और 2013 में विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया गया था.
जीतेंद्र मिश्रा की पढ़ाई
पढ़ाई की बात करें, तो एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा ने खड़कवासला स्थित नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) से प्रशिक्षण हासिल किया. इसके बाद उन्होंने एयर फोर्स एकेडमी, डुंडीगल, एयर फोर्स टेस्ट पायलट स्कूल, बेंगलुरु, अमेरिका के एयर कमांड एंड स्टाफ कॉलेज, मोंटगोमरी, अलबामा और ब्रिटेन के रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज में भी शिक्षा और प्रशिक्षण लिया.

पंकज चतुर्वेदी
पंकज चतुर्वेदी को पत्रकारतिा के क्षेत्र में एक दशक से ज्यादा का अनुभव है. देश और उत्तरप्रदेश की राजनीति को कवर करते आ रहे हैं. दिल्ली में अमर उजाला और पंजाब केसरी से पत्रकारिता की यात्रा की शुरुआत हुई. दिल्ली में 2 साल की पत्रकारिता के बाद मिट्टी की खुशबू यूपी खींच लाई और तब से राजधानी लखनऊ में ही पत्रकारिता हो रही है. 2017 में यात्रा को विस्तार देते हुए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े. राजनीतिक खबरों में गहरी रुचि और अंदर की खबर को बाहर लाने का हुनर, साथ ही यूपी की ब्यूरोकेसी में खास पकड़. पत्रकारिता का फलसफा खबरों को खबर के रूप में ही जनता तक पहुंचाना.
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