हिमालय क्षेत्र में भीषण बाढ़ के एक दिन बाद भी तबाही और सदमे का मंज़र
मुख्य बिन्दु
- नेपाल और चीन में विनाशकारी बाढ़ के बाद सैकड़ों लोग अब भी लापता.
- संयुक्त राष्ट्र आपात राहत प्रमुख ने 20 लाख डॉलर की सहायता राशि जारी की है.
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने दवाइयाँ, राहत सामग्री और तम्बू भेजे हैं.
संयुक्त राष्ट्र के आपात राहत प्रमुख टॉम फ़्लैचर ने बताया कि यूएन के केन्द्रीय आपात प्रतिक्रिया कोष (CERF) से शुरुआती तौर पर 20 लाख डॉलर जारी किए गए हैं, ताकि “आपात चिकित्सा सेवा, आश्रय और पानी उपलब्ध कराकर लोगों की जान बचाई जा सके.”
नेपाल के रसुवा, नुवाकोट और धादिंग ज़िलों में मानवीय ज़रूरतें बहुत अधिक हैं. लोग अपनों को खोने, विस्थापन और ज़रूरी सेवाओं के बाधित होने जैसी कठिनाइयों से जूझ रहे हैं.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने तत्काल सहायता का भरोसा दिलाते हुए कहा, “संयुक्त राष्ट्र राहत सामग्री और मानवीय सहायता दल जुटा रहा है. हम आपात सहायता पहुँचाने के राष्ट्रीय प्रयासों में सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध हैं.”
17 हज़ार बच्चे प्रभावित
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF)) ने गुरुवार को बताया कि अचानक आई बाढ़ से कई समुदाय पूरी तरह कट गए हैं या बह गए हैं. सड़कें, पुल, जलविद्युत केन्द्र, जल आपूर्ति व्यवस्था और दूरसंचार नेटवर्क बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं. इससे प्रभावित इलाक़ों तक पहुँचना और जीवनरक्षक सहायता पहुँचाना मुश्किल हो गया है.
नेपाल के रसुवा, नुवाकोट और धादिंग ज़िलों में कम से कम 17 हज़ार बच्चे इस विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित हुए हैं.
नेपाल में UNICEF की प्रतिनिधि एलिस अकुंगा ने कहा, “रसुवा और धादिंग में बच्चों ने कुछ ही पलों में अपनी पूरी दुनिया को अपनी आँखों के सामने बहते देखा. उनके घर, स्कूल और स्वास्थ्य केन्द्र देखते ही देखते तबाह हो गए.”
उन्होंने कहा, “बहुत से लोगों की जान गई और कई ने अपने प्रियजनों को खोया. मृतकों की संख्या अब भी बढ़ रही है. हम जानते हैं कि यह त्रासदी अभी ख़त्म नहीं हुई है. बाढ़ से बचे बच्चों पर अब बीमारी, कुपोषण, हिंसा और शोषण का ख़तरा मंडरा रहा है.”
एलिस अकुंगा ने कहा कि UNICEF ज़मीनी स्तर पर सहायता बढ़ा रहा है, “लेकिन हर ज़रूरतमन्द बच्चे तक पहुँचने के लिए हमें तत्काल और अधिक संसाधनों की ज़रूरत है.”
अब भी सैकड़ों लोग लापता
नेपाल में संयुक्त राष्ट्र कार्यालय ने फेसबुक पर बताया कि यूएन एजेंसियाँ, सरकार के नेतृत्व में चल रहे राहत प्रयासों में मदद के लिए भोजन, दवाइयाँ और अन्य राहत सामग्री लेकर प्रभावित इलाक़ों में तैनात हैं. ज़रूरत पड़ने पर वे और सहायता देने के लिए भी तैयार हैं.
चीन में अधिकारियों के अनुसार, लगभग 560 लोग अब भी लापता हैं. संयुक्त राष्ट्र कार्यालय ने बुधवार को तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में भारी नुक़सान, बड़ी संख्या में हताहतों और व्यापक तबाही की सूचना दी थी.
इस बीच, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO ) ने एक आपात स्वास्थ्य किट भेजी है, जिसमें 10 हज़ार लोगों तक को बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएँ देने के लिए पर्याप्त दवाइयाँ और अन्य सामग्री है.
WHO ने प्रभावित इलाक़ों में स्वास्थ्य सेवाएँ जारी रखने के लिए छह बहुउद्देश्यीय तम्बू भी उपलब्ध कराए हैं.
एजेंसी ने फेसबुक पर लिखा, “इन सामग्रियों का मक़सद अग्रिम मोर्चे पर काम कर रहे स्वास्थ्यकर्मियों की मदद करना है, ताकि वे प्रभावित लोगों को ज़रूरी इलाज और तत्काल स्वास्थ्य सेवाएँ देना जारी रख सकें.”
नई तैनातियाँ
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा, “हम स्वास्थ्य अधिकारियों और साझीदारों के साथ मिलकर बदलते हालात का आकलन करने, आपात स्वास्थ्य सेवाओं में सहयोग देने और यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि लोगों को ज़रूरी इलाज मिलता रहे.”
गुरुवार को विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) और संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने भी कर्मचारियों और राहत सामग्री से भरे ट्रकों की तैनाती शुरू करने की योजना बनाई.
आपदा के पैमाने का तेज़ी से आकलन करने के प्रयास भी जारी हैं. इसके लिए बाढ़ प्रभावित इलाक़ों की उपग्रह तस्वीरों और उनके विश्लेषण का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो आपदा प्रबन्धन और आपात प्रतिक्रिया के लिए संयुक्त राष्ट्र के अन्तरिक्ष-आधारित सूचना मंच UN-SPIDER के ज़रिए उपलब्ध कराए गए हैं.
संयुक्त राष्ट्र बाह्य अंतरिक्ष मामलों के कार्यालय (UNOOSA) द्वारा संचालित यह पहल, आपदा प्रबन्धन विशेषज्ञों और अन्तरिक्ष एजेंसियों को जोड़ती है, ताकि आपदा जोखिम कम करने, समय रहते चेतावनी देने और आपात राहत प्रयासों में मदद मिल सके.
हिमनद टूटने की आशंका
हिमालय की ऊँची और खड़ी घाटियों में हिमनद टूटने को अचानक आई बाढ़ और कीचड़ के तेज़ बहाव की सम्भावित वजह माना जा रहा है. इस आपदा में कई समुदाय तबाह हो गए और पुल व सड़कें बह गईं.
उत्तरी नेपाल में काठमांडू से लगभग 80 किलोमीटर दूर स्थित रसुवा ज़िला सबसे अधिक प्रभावित इलाक़ों में से है. तिमुरे, रसुवागढ़ी और स्याब्रुबेसी क़स्बों में भारी नुक़सान हुआ है. स्याब्रुबेसी, लांगटांग घाटी जाने वाले पर्यटकों, पर्वतारोहियों और तीर्थयात्रियों के बीच लोकप्रिय है.
इसी क्षेत्र में अप्रैल 2015 में 7.8 तीव्रता का भूकम्प आया था, जिसमें 8,800 से अधिक लोगों की मौत हुई थी. पिछले अक्टूबर में भी भारी बारिश से पूर्वी और मध्य नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन हुए थे, जिनसे 30 हज़ार से अधिक लोग प्रभावित हुए थे.
आपदाओं का बढ़ता ख़तरा
आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए संयुक्त राष्ट्र की प्रमुख एजेंसी UNDRR के अनुसार, वर्ष 2030 तक दुनिया में हर साल मध्यम और बड़े स्तर की लगभग 560 आपदाएँ आने का अनुमान है.
एजेंसी ने कहा, “जलवायु परिवर्तन और जोखिमों को कम आँकने के कारण 2015 से 2030 के बीच दुनिया भर में आपदाओं की संख्या 40 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है.”
UNDRR के अनुसार, इन आपदाओं में होने वाली मानवीय क्षति के अलावा, अप्रत्यक्ष व पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ने वाले असर को जोड़ने पर उनकी सालाना आर्थिक लागत 2.29 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँचती है और बढ़ रही है.
यह आधिकारिक आँकड़ों में दर्ज सालाना प्रत्यक्ष नुक़सान से लगभग 10 गुना अधिक है.