कम से कम 157 मौतें और लगभग 400 लोग लापता हो गए हैं। इनमें 100 से ज्यादा भारतीय भी शामिल हैं। नेपाल में बुधवार को आई बाढ़ ने ऐसी तबाही मचाई की लोगों ने आंखों के सामने ही अपनों को जाते देखा। फिलहाल, भारत समेत दुनिया के कई देशों ने नेपाल को मदद भेजी है।
नेपाल में बुधवार को अचानक आई जलप्रलय में किसी को भी संभलने का मौका नहीं मिला। कई परियोजनाओं पर काम कर रहे मजदूर, बाजारों, घरों में मौजूद लोग, पर्यटकों ने मौत बनकर आई प्रलय से बचने की पूरी कोशिश की लेकिन बचने का मौका नहीं मिला। नेपाल में न तेज बारिश हुई न बादल फटा न ही मौसम विभाग ने कोई चेतावनी दी थी, लेकिन 20 से 25 मिनट के अंदर ही सबकुछ तबाह हो गया। आंकड़े बता रहे हैं कि इस आपदा में कम से कम 157 लोगों की मौत हो गई है और 133 भारतीयों समेत करीब 400 लोग लापता है।
ढाडिंग, नुवाकोट, त्रिशूली नदी, गोरखा स्याफ्रूबेसी और टिमुरे इलाकों में तबाही मची। गांवों में कई हाइड्रोपावर परियोजनाएं पूरी तरह तबाह हो गईं। विदुर नगरपालिका के वार्ड नंबर 1 के वार्ड अध्यक्ष लेनिन रंजित ने कहा कि रसुवा और नुवाकोट से होकर बहने वाली भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में आई बाढ़ के कारण नुवाकोट का ऐतिहासिक त्रिशूली बाजार लगभग पूरी तरह डूब गया है। त्रिशूली जलविद्युत संयंत्र, बाजार में बने नए और पुराने दोनों कंक्रीट के पुल, त्रिशूली स्कूल, मंदिर और घर बह गए हैं। लोग बाढ़ से बचने के लिए भागते नजर आए, लेकिन मलबे और पानी में समा गए।
उन्होंने कहा, दोस्तों ने अपनी आंखों के सामने लोगों को बहते हुए देखा है। त्रिशूली के लोगों को बाढ़ की सूचना देकर तुरंत वहां से निकलने के लिए कहा गया था, पर मौसम खुला से लोगों ने उनकी चेतावनी पर यकीन नहीं किया। बेत्रावती से रसुवागढ़ी-तिब्बत सीमा तक 42 किमी सड़क क्षतिग्रस्त हो गई।
चेतावनी जारी
नेपाल में अचानक आई बाढ़ को देखते हुए जल शक्ति मंत्रालय के तहत केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) ने नेपाल की त्रिशूली नदी के जल स्तर में अचानक वृद्धि के बाद बिहार और यूपी के अधिकारियों को गंडक नदी के किनारे स्थिति पर कड़ी निगरानी रखने की चेतावनी जारी की है। आयोग की सलाह के बाद एनडीआरएफ हाई अलर्ट पर है। उसने गंडक के किनारे भारत-नेपाल सीमा के पास बिहार और यूपी के अधिकारियों को सतर्क रहने और स्थिति पर कड़ी नजर रखने को कहा है। निर्देश में कहा गया नेपाल में भारतीय सीमा से करीब 160 किमी दूर फुरके खोला के पास त्रिशूली नदी का जलस्तर बढ़ने की जानकारी है।
पानी का बहाव इतना तेज था कि पत्नी का छूट गया हाथ
नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने सिर्फ घर और सड़कें ही नहीं बहाईं, बल्कि कई परिवारों की खुशियां भी अपने साथ बहा ले गईं। मलबे और मिट्टी के सैलाब के बीच अपनों को बचाने की कोशिश कर रहे लोगों की आंखों के सामने उनके प्रियजन हमेशा के लिए उनसे दूर हो गए।
68 वर्षीय केशव प्रसाद बराल की दर्द भरी कहानी इस तबाही की भयावह तस्वीर सामने रखती है। उन्होंने पत्नी का हाथ थामकर उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन मिट्टी का सैलाब उन्हें अपने साथ बहा ले गया। अस्पताल में इलाज करा रहे केशव प्रसाद बराल ने कहा कि मिट्टी का एक विशाल बहाव सीधे हमारी ओर आ रहा था। जैसे-जैसे यह पास आया, यह और ऊंचा होता गया। जब मैंने इसे हमारे घर में घुसते देखा, तो मैंने अपनी पत्नी का हाथ पकड़कर उसे छत पर ले जाने की कोशिश की। लेकिन वह मिट्टी के बहाव में बह गई। पांच घंटे बाद मुझे बचाने के लिए एक हेलीकॉप्टर आया। मेरी पत्नी अभी भी कहीं मिट्टी के नीचे दबी है। वह अब नहीं रही।
जान बचाने के लिए आम का पेड़ बना सहारा
वहीं, एक और जीवित बचे व्यक्ति बिबेक कुमाल ने बताया कि आम के पेड़ को पकड़कर उसने अपनी जान बचाई, जबकि वह उस घर को बहते हुए देख रहा था जहां वह काम कर रहा था। कुमाल ने कहा कि मैं भागने लगा। तभी पानी की एक लहर जोरदार आवाज के साथ नीचे आई, जैसे कोई भूकंप आया हो।
उनके भाई दिनेश उनके पास बैठे थे। तेज बहाव उन्हें कीचड़ और मलबे के साथ नीचे की ओर बहा ले गया, लेकिन उन्होंने कहा कि किस्मत से मैं एक आम के पेड़ में फंस गया। अगर आम का पेड़ न होता, तो मैं बहकर मर जाता। वहीं, अस्पताल में इलाज कर रहीं 11 साल की रिहाना लामिछाने भी बाल-बाल बचीं।