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सहकार से समृद्धि अभियान में जुटा को-ऑपरेटिव डिपार्टमेंट गड़बड़ी दबाने में भी ‘सहकार’ की भावना अपना रहा है। कुछ अफसरों की लापरवाही ने खजाने को सवा करोड़ रुपए की चपत लगा दी। समय पर रिटर्न न भरने से विभाग को 1.87 करोड़ रुपए जमा कराने पड़े। इसमें 1.17 करोड़ रुपए ब्याज में देने पड़े। यह रकम 4 साल पहले विभाग के अन्य फंड से जमा कराई गई।
इसके बाद भी 69 लाख रुपए पैनल्टी का खतरा है। विभाग की अपील आयकर विभाग ने नवंबर 2025 में खारिज कर दी। इस पर भी विभाग ने किसी की जिम्मेदारी तय नहीं की, जबकि अधिकतर जिम्मेदार सेवानिवृत्त होते जा रहे हैं। राइसेम (राजस्थान इंस्टीट्यूट आफ को-आपरेटिव एजुकेशन एंड मैनेजमेंट) सहकारी विभाग के लिए भर्ती और ट्रेनिंग कराती है। झालाना में ऑफिस और हॉस्टल है।
संस्था प्रत्येक वर्ष आईटीआर भरती है और टैक्स भी देती है। संबंधित फर्म ने वर्ष 2014-15 में इनकम टैक्स का ना आडिट किया ना ही रिटर्न दाखिल किया। साल-दर-साल टैक्स और ब्याज बढ़ता गया। इनकम टैक्स ने राइसेम को वर्ष 2022 में नोटिस भेजा। अप्रैल 2022 में रिटर्न भरा और टैक्स के साथ ब्याज भी दिया। 25 अप्रैल 2022 को जमा 1.88 करोड़ में 70 लाख टैक्स और 1.17 करोड़ ब्याज के थे। यह राशि निदेशक शिल्पी पांडे के समय जमा हुई थी।
पुराना मामला है। इस पर रजिस्ट्रार कार्यालय से रिपोर्ट मांगी गई है। जिनकी खामी रही वह पूर्व से रिकॉर्ड पर है। - संजय पाठक, निदेशक राइसेम
जिम्मेदार रिटायर होते जा रहे...कार्रवाई किस पर होगी ? अक्टूबर 2014 से जून 2015 निदेशक रहे सुरेन्द्र सिंह सेवानिवृत्त हो चुके हैं। सितंबर 2016 तक निदेशक रहे सुधीर बंसल सेवानिवृत्त हो गए। तत्कालीन अतिरिक्त निदेशक अशोक अईयर ने सीए फर्म को रिटर्न भरने के आदेश दिए थे। इनकम टैक्स विभाग ने 2017 में नोटिस देकर वर्ष 2014-15 की रिटर्न जमा कराने के लिए कहा था।
इसके बाद वाले अधिकारियों ने भी गम्भीरता नहीं दिखाई। इस तरह वर्ष 2022 तक निदेशक रहे संदीप खंडेलवाल (फरवरी 2016 से मई 2016), अतिरिक्त रजिस्ट्रार शिवकुमार बाकोलिया (सितंबर 2016 से अगस्त 18) व अतिरिक्त निदेशक गुंजन चौबे (अक्टूबर 2016 से मई 2018) के साथ फाइल संधारित करने वाले सहायक प्रशासनिक अधिकारी मूलचंद शर्मा पर मामले को गम्भीरता से न लेने का आरोप है। विभाग की अपील खारिज, पैनल्टी का खतरा देरी से रिटर्न जमा कराने पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने करीब 69 लाख की पैनल्टी का आदेश जारी किया है। इससे बचने के लिए राइसेम ने वर्ष 2023 में आयकर आयुक्त (अपील्स) के यहां अपील की थी। इसे नवम्बर 2025 में खारिज कर दिया। अब विभाग ने इसकी आयकर अपीलीय अधिकरण के यहां अपील की गई है, जो अभी विचाराधीन है।