मध्यप्रदेश में ग्रीष्मकालीन मूंग को जल्दी सुखाने के लिए पेस्टिसाइड के ज्यादा इस्तेमाल का असर अब मिट्टी में भी सामने आया है। मूंग का सबसे ज्यादा उत्पादन करने वाले 6 जिलों से जून-जुलाई में सॉयल टेस्टिंग के लिए आए 800 सैंपल की जांच में करीब 180 में सिंथ
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अब संबंधित इलाकों से अलग से सैंपल लेकर जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि मिट्टी में कौन-सा पेस्टिसाइड और कितनी मात्रा में मौजूद है। जिन जिलों के सैंपल में पेस्टिसाइड मिला है, उनमें सीहोर, रायसेन, नर्मदापुरम, हरदा, विदिशा और नरसिंहपुर शामिल हैं। ये सभी ग्रीष्मकालीन मूंग के प्रमुख उत्पादक जिले हैं।
60 दिन की फसल, जल्दी सुखाने के लिए पैराक्वाट छिड़कते हैं... ग्रीष्मकालीन मूंग की फसल करीब 60 दिन में तैयार होती है। 15 मार्च के आसपास बोई गई फसल 15 मई तक तैयार होने लगती है। मई-जून में फसल हरी रहने पर उसे जल्दी सुखाने के लिए पैराक्वाट डाइक्लोराइड का छिड़काव किया जाता है।
जांच और इस काम से जुड़े लोगों का दावा है कि कुछ इलाकों में फसल पर इसका 8 से 10 बार तक छिड़काव किया जा रहा है। मात्रा भी बढ़ी है। पहले 20 लीटर पानी में करीब 100 ग्राम पेस्टिसाइड मिलाया जाता था, अब 200 से 300 ग्राम तक मिलाया जा रहा है। इससे हरी मूंग करीब 24 घंटे में सूख जाती है।
भास्कर एक्सपर्ट - पीके विश्वकर्मा, सेवानिवृत्त संयुक्त संचालक, कृषि विभाग
हाईडोज से मिट्टी दूषित हो रही, पंजाब जैसे हालात और कैंसर जैसी बीमारी का खतरा
मूंग उत्पादक जिलों में पेस्टिसाइड का इस्तेमाल तय मात्रा से कहीं ज्यादा हो रहा है। पहले 20 लीटर पानी में करीब 100 ग्राम पेस्टिसाइड मिलाया जाता था, जबकि अब कुछ जगह 200 से 300 ग्राम तक मिलाया जा रहा है। कई जगह फसल पर 8 से 10 बार तक छिड़काव की बात भी सामने आई है।
इससे हरी मूंग करीब 24 घंटे में सूख जाती है। खासकर नर्मदापुरम, सीहोर, नरसिंहपुर, हरदा और रायसेन समेत 7 से 8 जिलों में सिंथेटिक पेस्टिसाइड की हाईडोज का इस्तेमाल सामने आ रहा है। इसका सीधा असर मिट्टी पर पड़ रहा है और वह दूषित हो रही है। यदि इसी तरह लगातार हाईडोज का इस्तेमाल होता रहा तो इन इलाकों में आगे चलकर पंजाब जैसे हालात बन सकते हैं और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
प्रदेश में जागरूकता अभियान बेअसर
कृषि विभाग ने ग्रीष्मकालीन मूंग में पैराक्वाट और ग्लाइफोसेट जैसे कीटनाशक-खरपतवारनाशकों का ज्यादा इस्तेमाल रोकने के लिए 2025 में अभियान शुरू किया था। कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना ने किसानों से अपील की और कृषि विज्ञान केंद्रों, मेलों व मैदानी अमले के जरिए जागरूकता अभियान चलाया गया।
खरीदी से पहले ज्यादा पेस्टिसाइड वाली मूंग नहीं खरीदने के निर्देश भी दिए गए। केंद्र ने भी सुरक्षित इस्तेमाल और नकली कीटनाशकों के खिलाफ अभियान चलाया। इसके बावजूद सॉयल सैंपल में पेस्टिसाइड मिलने से इन प्रयासों के असर पर सवाल हैं।