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शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल रोजगार नहीं, नैतिक नागरिक तैयार करना: कटारिया - Amritsar News

July 13, 2026

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जीएनडीयू का 51वां दीक्षांत समारोह रविवार को यूनिवर्सिटी परिसर में मनाया गया। इस अवसर पर पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की और दीप प्रज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया।

समारोह के दौरान कुल 456 मेधावी विद्यार्थियों को डिग्रियां और पदक देकर सम्मानित किया गया। इनमें 3 विद्यार्थियों को प्रतिष्ठित चांसलर मेडल, 35 को मेमोरियल मेडल, 82 शोधार्थियों को पीएच.डी की उपाधि तथा 336 विद्यार्थियों को स्नातक एवं स्नातकोत्तर डिग्रियां प्रदान की गईं।

इसी समागम में न्यूयॉर्क (अमेरिका) के अटॉर्नी-एट-लॉ जसप्रीत सिंह को उनकी उत्कृष्ट सामाजिक व कानूनी सेवाओं के लिए विश्वविद्यालय की ओर से मानद (ऑनर्स कॉजा) उपाधि से नवाजा गया। समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में पहुंचे पंजाब के उच्च शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि जहां उच्च शिक्षा में जीएनडीयू देश के अग्रणी संस्थानों में शामिल है, वहीं पंजाब ने केरल को पीछे छोड़ते हुए स्कूल शिक्षा में भी देश में पहला स्थान प्राप्त किया है।

इस मौके पर राज्यपाल के अतिरिक्त प्रधान सचिव विवेक प्रताप सिंह , डीन प्रो. हरविंदर सिंह सैणी, रजिस्ट्रार प्रो. केएस चाहल, सांसद गुरजीत सिंह औजला, सांसद राज कुमार चब्बेवाल आदि मौजूद थे। राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि यह केवल एक विश्वविद्यालय नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा, शोध और जीवन मूल्यों का एक प्रकाश स्तंभ है, जिसने देश और दुनिया को अनगिनत प्रतिभाएं दी हैं।

उन्होंने कहा कि इस प्रतिष्ठित संस्था, गुरु नानक देव विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 1969 में श्री गुरु नानक देव जी के 500वें प्रकाश पर्व के पावन अवसर पर की गई थी। राज्यपाल ने कहा कि यदि हमारे विश्वविद्यालय उत्कृष्ट शिक्षा, उच्चस्तरीय शोध और नवाचार के वैश्विक केंद्र बन जाते हैं, तो वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाने का हमारा संकल्प निश्चित रूप से पूरा होगा।

कुलपति प्रो. करमजीत सिंह ने अतिथियों का स्वागत कर राज्यपाल के ‘ड्रग-फ्री पंजाब' अभियान को सराहा। उन्होंने बताया कि मानद उपाधि विजेता पूर्व छात्र जसप्रीत सिंह ने सिख चेयर के लिए 5 करोड़, पीएच.डी स्कॉलरशिप के लिए 20 लाख रुपए और कैलिफोर्निया में परिसर हेतु भूमि दान करने का वचन दिया है। एक बड़े फैसले के तहत ‘पंजाबी-प्रथम नीति-2026' को मंजूरी दी गई है, जिससे अब अंग्रेजी के साथ पंजाबी में भी शोध हो सकेगा।