पंजाब के सरकारी स्कूलों की पढ़ाई और यहां के बच्चों की सीखने की क्षमता देश में सबसे बेहतर हो गई है। परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (पीजीआई)-2.0 की रिपोर्ट के लर्निंग आउटकम में पंजाब केरल और महाराष्ट्र जैसे राज्यों को पीछे छोड़कर देश में सबसे आगे हो गया है।
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दरअसल साल 2023 से पंजाब के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का तरीका पूरी तरह बदल दिया गया। सबसे पहले उन बच्चों की एक्स्ट्रा क्लास लगाई गई जो पंजाबी व अंग्रेजी पढ़ने-लिखने और गणित में कमजोर थे। प्राथमिक कक्षाओं में खेल-खेल में पढ़ाई कराई गई। अपर प्राइमरी में प्रैक्टिकल पर जोर दिया गया। उनके लिए रोबोटिक्स और एआई लैब बनाई गई। सबसे खास बात रही शिक्षकों को नई शिक्षण तकनीकों की ट्रेनिंग। बच्चों की प्रगति का आकलन किया गया। उसी के अनुसार पढ़ाई की रणनीति बदली गई।
गवर्नमेंट स्कूल कादियां, गुरदासपुर की प्रिंसिपल डॉ. सुनीता ने बताया कि स्कूल में प्रोजेक्टर्स, डिजिटल टूल्स से छात्रों को पढ़ाया जा रहा है, जिससे पढ़ाई में उनकी दिलचस्पी बढ़ी है। साथी ग्रुप की मदद से छात्र ऑनलाइन नीट, जेईई एग्जाम की तैयारी कर रहे हैं।
पर्सनलाइज्ड लीडरशिप ट्रेनिंग और ग्रीन स्कूल
लर्निंग को और बेहतर करने के लिए फाउंडेशनल लिटरेसी, स्टेट अचीवमेंट सर्वे, एआई से लैस लर्निंग, बालवाटिका में एनरोलमेंट, ट्रांसपोर्ट सुविधाएं बढ़ाएंगे। ग्रीन स्कूल, इन्क्लूसिव एजुकेशन के लिए टेक्नोलॉजी और काउंसिलिंग सर्विसेस पर ध्यान देंगे। टीचर ट्रेनिंग के लिए सीपीडी, मेंटरिंग, स्कूल हेड के लिए लीडरशिप ट्रेनिंग पर फोकस होगा।’ सके। -अरविंद कुमार एमके, डायरेक्टर जनरल स्कूल एजुकेशन पंजाब
गणित से डरने वाले छात्रों को अब मजा आने लगा है
गवर्नमेंट प्राइमरी स्कूल चनन देवी, लुधियाना में चौथी क्लास के छात्रों को मैजिक ग्रिड तकनीक से गणित सिखाई जा रही है। हेड टीचर जसविंदर कौर ने बताया कि गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल पीएयू में बच्चों को बैंकिंग-फाइनेंस और उनके कोर्स के बारे में इंटरएक्टिव पैनल के जरिए बताया गया। छात्र नीरज कहते हैं कि बारहवीं के बाद भविष्य की चिंता सताती है। लेकिन इस कोर्स की मदद से वो बारहवीं के बाद काम भी कर सकेंगे और प्राइवेट पढ़ाई भी। चौथी क्लास की जसप्रीत कौर कहती हैं कि वह गणित से डरती थीं, अब मजा आने लगा है।
मिशन समर्थ: हर बच्चे का बेसलाइन टेस्ट लिया, कमजोरियां दूर कीं
पंजाब के शिक्षा विभाग ने साल 2023 में मिशन समर्थ शुरू किया। तीसरी से आठवीं क्लास के हर बच्चे का बेसलाइन टेस्ट लिया गया। फिर विषयवार वर्कबुक, वर्कशीट और रेमेडियल क्लास के जरिए उसकी कमजोरियों पर काम किया गया। कुछ महीनों बाद मिडलाइन और फिर फाइनल असेसमेंट हुआ। जो विद्यार्थी पहले किसी विषय में पास भी नहीं हो पाते थे, उनके परिणामों में 60 से 70 प्रतिशत तक सुधार हुआ।
शिक्षकों को ट्रेनिंग देकर पढ़ाने के नए तरीके सिखाए गए, एक-दूसरे से भी नॉलेज शेयर की
पीजीआई -2.0 रिपोर्ट
लर्निंग आउटकम यानी क्लास में सीखने में पंजाब ने केरल और महाराष्ट्र को पीछे छोड़ा, 2020 में 27वें पायदान पर था
पंजाब के स्कूलों में डिजिटल लिस्निंग लैब, एजुकेशन पार्क, मैथ लैब तैयार किए गए हैं।