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'देश से दूर हूं, जनता से नहीं', दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में बोलीं शेख हसीना, भाषण की बड़ी बातें?

August 5, 2026

'देश से दूर हूं, जनता से नहीं', दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में बोलीं शेख हसीना, भाषण की बड़ी बातें?

Time Published: Wednesday, August 5, 2026, 19:47 [IST]

Sheikh Hasina Delhi Speech: दो साल बाद पहली बार सार्वजनिक तौर पर सामने आईं बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने दिल्ली में आयोजित FCC South Asia के कार्यक्रम में वर्चुअल संबोधन दिया और अपने भाषण का समापन "जय हिंद, जय बांग्ला" के नारे के साथ किया।

भारत में निर्वासन के दौरान दिए गए इस संबोधन में उन्होंने 2024 के हिंसक प्रदर्शनों को सुनियोजित साजिश बताया, मोहम्मद यूनुस पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि उन्हें देश से दूर किया गया, लेकिन वह आज भी बांग्लादेश की जनता के साथ खड़ी हैं। उनके भाषण के अंत में "जय हिंद, जय बांग्ला" कहना राजनीतिक और कूटनीतिक दोनों लिहाज से चर्चा का विषय बन गया।

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'जय हिंद, जय बांग्ला' के साथ खत्म हुआ संबोधन

दिल्ली से वर्चुअल तरीके से जुड़ी शेख हसीना ने अपने संबोधन का समापन "जय हिंद, जय बांग्ला" के नारे के साथ किया। दो वर्षों के लंबे अंतराल के बाद उनकी पहली सार्वजनिक मौजूदगी में यह संदेश सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। भारत में रह रही हसीना ने अपने भाषण के अंत में भारत और बांग्लादेश के ऐतिहासिक रिश्तों की याद दिलाने वाला यह नारा दिया, जिसे राजनीतिक संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है।

'देश से दूर हूं, लेकिन जनता से नहीं'

शेख हसीना ने कहा कि उन्हें अपने देश से दूर रहने के लिए मजबूर किया गया, लेकिन वह कभी भी बांग्लादेश की जनता से अलग नहीं हुईं। उन्होंने खुद को ऐसा नेता बताया जिसने पूरी जिंदगी देश के लोगों के बीच बिताई है। हसीना ने कहा कि पिछले दो वर्षों से वह अपने प्रिय बांग्लादेश को मुश्किलों से गुजरते हुए देख रही हैं और मौजूदा हालात उस बांग्लादेश जैसे नहीं हैं, जिसके निर्माण के लिए लाखों लोगों ने बलिदान दिया था।

2024 के आंदोलन को बताया सुनियोजित साजिश

अपने संबोधन में शेख हसीना ने जुलाई-अगस्त 2024 के प्रदर्शनों को शांतिपूर्ण छात्र आंदोलन मानने से इनकार किया। उनका कहना था कि उनकी सरकार ने शुरुआत से ही बातचीत, कानूनी प्रक्रिया और धैर्य के जरिए समाधान निकालने की कोशिश की थी। लेकिन सुधार की मांग के पीछे संगठित समूह सक्रिय थे, जिन्होंने छात्र आंदोलन को हिंसक राजनीतिक अभियान में बदल दिया और सत्ता परिवर्तन का रास्ता तैयार किया।

मोहम्मद यूनुस पर लगाए गंभीर आरोप

हसीना ने अपने भाषण में बांग्लादेश की अंतरिम व्यवस्था से जुड़े मोहम्मद यूनुस का भी नाम लिया। उन्होंने दावा किया कि यूनुस ने स्वयं इस आंदोलन को सुनियोजित बताया था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह स्वतःस्फूर्त छात्र आंदोलन नहीं था। हसीना के मुताबिक आंदोलन का कोई जिम्मेदार नेतृत्व सामने नहीं था, बल्कि पर्दे के पीछे से निर्देश दिए जा रहे थे और पूरे घटनाक्रम का उद्देश्य चुनाव के बजाय दूसरे रास्ते से सत्ता हासिल करना था।

आवामी लीग ने भी साधा यूनुस पर निशाना

शेख हसीना के संबोधन से पहले आवामी लीग के निर्वासित नेताओं ने भी मोहम्मद यूनुस और मौजूदा व्यवस्था पर तीखा हमला बोला। पूर्व मंत्री मोहिबुल हसन चौधरी नौफेल ने कहा कि उनकी पार्टी बदला नहीं बल्कि न्याय चाहती है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि बांग्लादेश में धार्मिक कट्टरवाद को समर्थन न दिया जाए। साथ ही चेतावनी दी कि यदि मौजूदा स्थिति जारी रही तो देश एक असफल राष्ट्र बनने की ओर बढ़ सकता है।