Updated On: Aug 05, 2026 | 07:50 PM IST
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सार
Sonu Nigam Struggle: सोनू निगम ने कहा कि उनके पिता की एक सीख ने जिंदगी बदल दी। उन्होंने 18 साल की उम्र में संघर्ष का रास्ता चुना और मुंबई आ गए। गायक ने कहा कि बचपन का गुस्सा उन्होंने मेहनत में बदला।

सोनू निगम (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
विस्तार
Sonu Nigam Father Advice: भारतीय संगीत जगत के मशहूर गायक सोनू निगम ने अपनी सफलता का बड़ा श्रेय अपने पिता की सीख और शुरुआती संघर्षों को दिया है। अपनी मधुर आवाज से करोड़ों दिलों पर राज करने वाले सोनू ने हाल ही में एक इंटरव्यू में अपनी निजी जिंदगी से जुड़े कई दिलचस्प किस्से साझा किए। उन्होंने बताया कि बचपन में उनका स्वभाव काफी गुस्सैल था, लेकिन समय के साथ उन्होंने उसी ऊर्जा को अपने करियर की ताकत बना लिया।
ट्रेड एक्सपर्ट कोमल नाहटा के शो ‘गेम चेंजर्स: द म्यूजिक सीरीज’ में बातचीत के दौरान सोनू निगम ने बताया कि जीवन में सही समय पर लिए गए फैसलों ने उन्हें आज इस मुकाम तक पहुंचाया है। सोनू निगम ने कहा कि उनके भीतर हमेशा एक अलग तरह की ऊर्जा और जुनून था। उन्होंने सिडनी ओपेरा हाउस में लगातार दो तीन-तीन घंटे के शो करने का अनुभव साझा करते हुए कहा कि इतनी मेहनत करने की ताकत उन्हें अपने भीतर की आग से मिली।
सोनू निगम ने कही ये बात
सोनू निगम ने कहा कि मेरे अंदर बहुत आग और गुस्सा था, लेकिन उसी आग में मेहनत, करुणा और दूसरों के प्रति सम्मान भी था। मैंने कभी उस गुस्से को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। बल्कि उसी ऊर्जा को अपने काम में लगाया। बचपन में मैं बहुत गुस्सैल था, लेकिन वक्त के साथ समझ आया कि अगर इस ऊर्जा का सही इस्तेमाल किया जाए तो यह सफलता दिला सकती है।
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पिता की एक सलाह ने बदल दी सोच
सोनू निगम ने बताया कि उनके पिता हमेशा उन्हें एक खास बात समझाते थे। उन्होंने कहा कि पिताजी कहते थे कि तुम्हारे पास दो रास्ते हैं या तो अभी मजे कर लो और बाद में संघर्ष करो, या अभी संघर्ष कर लो ताकि बाद में आराम की जिंदगी जी सको। मैंने दूसरा रास्ता चुना और आज महसूस करता हूं कि उनका फैसला बिल्कुल सही था। सोनू ने माना कि यह सीख आज भी उनके जीवन का सबसे बड़ा मंत्र है और वही उन्हें लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
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रोमांटिक थे, लेकिन सपनों को दी प्राथमिकता
गायक ने मुस्कुराते हुए बताया कि युवावस्था में वह काफी रोमांटिक स्वभाव के थे और चाहते थे कि उनकी भी एक गर्लफ्रेंड हो। लेकिन उन्होंने अपने पिता की बात को गंभीरता से लिया और निजी इच्छाओं से पहले अपने करियर को चुना। उन्होंने कहा कि 12वीं पास करने के बाद मैं 18 साल की उम्र में मुंबई आ गया। अगर मैं उस समय यह फैसला नहीं लेता तो शायद मुझे काफी देर से काम मिलता।
