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जिले में दो एनजीओ के भेदभावपूर्ण रवैये से सफाईकर्मियों का फूटा गुस्सा, की नारेबाजी - Purnia News

August 5, 2026

पूर्णिया नगर निगम में सफाईकर्मियों की हड़ताल लगातार पांचवें दिन भी जारी रहने से शहर में लगभग 610 टन कूड़ा जमा हो चुका है। उचित मानदेय न मिलने और एनजीओ की दोहरी मजदूरी नीति के विरोध में स्वच्छता कर्मियों का गुस्सा मंगलवार को फूट पड़ा, जिसके बाद उन्हों

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निगम क्षेत्र में सफाई व्यवस्था का जिम्मा शिवम जन स्वास्थ्य और लायन सिक्योरिटी सर्विस नामक दो एजेंसियों के पास है, लेकिन दोनों के वेतन भुगतान में भारी अंतर है।

इसके अलावा, कर्मियों में मूलभूत सुविधाओं और सुरक्षा उपकरणों के अभाव को लेकर भी गहरा असंतोष है। कर्मचारियों की समस्याएं सुनने पहुंचे एमएलसी प्रतिनिधि अरविंद कुमार उर्फ भोला साह और पूर्णिया जिला नगर निकाय कर्मचारी संघ के मंत्री बैद्यनाथ सिंह के समक्ष सफाई कर्मियों ने अपना दुखड़ा सुनाया। इस दौरान संघ के अध्यक्ष फन्नू मलिक, संजय मलिक, धर्मा मलिक, सुनीता देवी, विभा देवी और सूरज मलिक सहित कई महिला व पुरुष सफाई कर्मी मौजूद रहे।

नगर निगम के सफाईकर्मियों ने एनजीओ के भेदभावपूर्ण रवैये और शोषण पर गहरा आक्रोश जताया है। कर्मचारियों के अनुसार, शिवम जन स्वास्थ्य जहां प्रतिदिन 412 रुपये मजदूरी देता है, वहीं लायन सिक्योरिटी सर्विस महज 330 रुपये ही भुगतान कर रही है। कम मानदेय के अलावा कर्मियों को सुरक्षा उपकरण (सेफ्टी गियर) और सवैतनिक छुट्टियां तक नसीब नहीं हैं। पीड़ित कर्मी अजीत मलिक ने बताया कि काम के दौरान कुत्ते के काटने पर इलाज में मदद मिलना तो दूर, उलटे उनकी एक दिन की दिहाड़ी काट ली गई।

कर्मचारी विक्रम मलिक ने बताया कि सफाईकर्मियों का बीमा न होने से छह महीने पहले हादसे में मृत सोनू मलिक के परिवार को कोई मुआवजा नहीं मिला। इसके अलावा, एक वार्ड में पर्याप्त कर्मचारियों (20 झाड़ूकर्मी व 8 ठेलाकर्मी) के बजाय महज 4 झाड़ूकर्मी और 2 ठेलाकर्मी ही तैनात किए गए हैं। सफाईकर्मियों ने एनजीओ के भेदभावपूर्ण रवैये और शोषण पर गहरा आक्रोश जताया है।

कर्मचारियों के अनुसार, शिवम जन स्वास्थ्य जहां प्रतिदिन 412 रुपये मजदूरी देता है, वहीं लायन सिक्योरिटी सर्विस महज 330 रुपये ही भुगतान कर रही है। कम मानदेय के अलावा कर्मियों को सेफ्टी गियर और सवैतनिक छुट्टियां तक नसीब नहीं हैं। पीड़ित कर्मी अजीत मलिक ने बताया कि काम के दौरान कुत्ते के काटने पर इलाज में मदद मिलना तो दूर, उलटे उनकी एक दिन की दिहाड़ी काट ली गई। वहीं 55 वर्षीया सुशीला देवी ने बताया कि महीने में सिर्फ 6 से 7 हजार ही मिल पाते हैं। कर्मचारी विक्रम मलिक ने बताया कि सफाईकर्मियों का बीमा न होने से छह महीने पहले हादसे में मृत सोनू मलिक के गरीब परिवार को कोई मुआवजा नहीं मिला।

लायन सिक्योरिटी सर्विस के मैनेजर प्रदीप सिंह ने बताया कि नगर निगम में उनके 436 कर्मी कार्यरत हैं। सभी को 330 रुपए दैनिक मजदूरी दी जाती है, जबकि 35 प्रतिशत राशि पीएफ और ईएसआईसी मद में जमा की जाती है। उन्होंने कहा कि वेतन सीधे बैंक खाते में भेजा जाता है और सरकार के संशोधित निर्देश लागू किए जाते हैं।