शहर के बहुचर्चित नगर निगम के 272 भूखंड आवंटन घोटाले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने बड़ी कार्रवाई की है। एसओजी ने मामले में शामिल सुखेर (गीत लक्ष्मी कॉलोनी) निवासी सेवानिवृत्त अल्पसंख्यक अधिकारी हेमलता कांकरिया और उसके पति निरंजन मोगरा को गिरफ्तार
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कार्रवाई के दौरान आरोपियों के आवास पर चलाए सर्च ऑपरेशन में करीब 2 किलो सोने के जेवर (अनुमानित मूल्य 1.50 करोड़ रुपए) और 11 लाख रुपए नकद बरामद हुए। एसओजी एएसपी मुकेश शर्मा ने बताया कि आय से अधिक संपत्ति की आशंका के चलते आयकर (आईटी) विभाग को बुलाकर बरामद जेवर व नकदी सौंपी है। विभाग अब इस बेनामी संपत्ति की अलग से जांच कर रहा है। एसओजी इस घोटाले में अब तक 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें गुजरात के पंचमहल के पूर्व वार्ड पंच राकेश सोलंकी, दीपक सिंह, किशनलाल, राजेंद्र धाकड़ व गोरखपुर निवासी राजदीप वाल्मिकी शामिल हैं।
हाईकोर्ट से झटका : एफआईआर रद्द करने की याचिकाएं खारिज इस घोटाले में नामजद आरोपियों को राजस्थान हाईकोर्ट से करारा झटका लगा है। कोर्ट ने मामले में दर्ज एफआईआर को खारिज करने की मांग वाली सभी याचिकाओं को सिरे से खारिज कर दिया है। याचिका दायर करने वालों में मानसिंह, राजेंद्र कुमार, गुलाब सिंह, भंवर सिंह, दीपक कुमावत, कांतिलाल जैन, विक्रम कुमार जैन, निर्मल टेलर, राकेश, भागीरथ गायरी, मनोहर सिंह, प्रदीप सिंह राठौड़, हरिसिंह चौहान, जगदीश सिंह तंवर, राजदीप सिंह, कल्याण सिंह, विक्रम ताकड़िया, नीतेश कोठारी, विपिन कोठारी, चंदा देवी, गीता देवी, आशा जैन, निर्मल कुमार जैन और अक्षत जैन शामिल थे। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद एसओजी के लिए घोटाले में शामिल अन्य सफेदपोशों और भू-माफिया पर शिकंजा कसने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
500 करोड़ का घोटाला, साल 2022 से शुरू हुई कहानी
- देखरेख के अभाव में भू-माफिया की नजर इन पर पड़ी। निगम की जांच समिति में खुलासा हुआ कि यूआइटी से मिली मूल फाइलों में फर्जी आवंटन पत्र लगाए गए थे। मूल राशि जमा कराए बिना ही जमा रसीदों की फर्जी मोहरें लगाकर पत्रावलियां निगम को ट्रांसफर कर दी गईं।
- मामले की शुरुआत 2 मार्च, 2022 को हुई, जब नगर निगम ने सूरजपोल थाने में एफआईआर दर्ज कराई। वर्ष 2012 में यूआईटी (अब यूडीए) ने कुछ कॉलोनियों को नगर निगम को हस्तांतरित किया था। इनमें कई कीमती और कॉर्नर के प्लॉट खाली पड़े थे।
- फर्जी दस्तावेजों के आधार पर निगम से लीज डीड (पट्टे) भी जारी करवा लिए गए। सेक्टर-11 स्थित कीमती भूखंडों की लीज डीड गुलाब सिंह, अर्जुन लाल गांधी, कन्हैयालाल भादविया और मान सिंह जैसे लोगों के नाम जारी करवा ली गई।
इन मामलों में आ चुका हेमलता का नाम
272 प्लॉट घोटाले में पकड़ी गई रिटायर्ड अल्पसंख्यक अधिकारी हेमलता कांकरिया का ट्रैक रिकॉर्ड बेहद दागी और आपराधिक रहा है। उस पर पूर्व में ब्लैकमेलिंग, जमीनों पर अवैध कब्जे और सुसाइड के लिए उकसाने के गंभीर मुकदमे दर्ज हैं।
परेशान व्यापारी दे चुका जान 13 मार्च, 2022 को अमल का कांटा स्थित कपड़ा व्यापारी दीपक मेहता ने फांसी लगाकर जान दे दी थी। सुसाइड नोट में हेमलता व उसके पति निरंजन पर गंभीर आरोप थे। व्यापारी ने इनसे कर्ज लिया था। मूल व ब्याज मिलाकर 2 करोड़ रुपए चुकाने के बाद भी आरोपी धमकियां दे रहे थे।
फर्जी दस्तावेज से हड़पी जमीन वर्ष 2021 में जोधपुर के राजेंद्र सिंह ने हेमलता से राशि उधार लेकर सुरक्षा के तौर पर प्लॉट के कागज रखे थे। कर्ज चुकाने के बाद भी महिला ने दस्तावेज वापस नहीं किए और फर्जी सील-दस्तखत तैयार कर जमीन दूसरे व्यक्ति (नरेश बोल्या) को बेच दी।
हिस्ट्रीशीटर के साथ मिलकर 2.21 करोड़ की रंगदारी मांगी थी
सीसारमा निवासी कन्हैयालाल तेली को हिस्ट्रीशीटर दिलीप नाथ के जरिए धमकी दिलवाकर 2.21 करोड़ रुपए या 10 बीघा जमीन की मांग की गई थी। कन्हैयालाल के बेटों का अपहरण कर मारपीट की गई। हेमलता ने मध्यस्थता के नाम पर पहले 20 लाख रुपए एंठे, फिर पीड़ित पर दबाव बनाकर उसका प्लॉट बिकवाया और 2.21 करोड़ रुपए रंगदारी के वसूल करवाए।
विधानसभा में भी गूंज चुका मुद्दा
इस फर्जीवाड़े को वर्ष 2022 में तत्कालीन कांग्रेस सहवृत्त पार्षद अजय पोरवाल ने उजागर किया था। प्राथमिक जांच के बाद निगम ने 48 पट्टों को तत्काल निरस्त कर दिया था। इसके बाद पूर्व विधायक गुलाबचंद कटारिया और वर्तमान विधायक ताराचंद जैन ने इस मामले को विधानसभा में प्रमुखता से उठाते हुए इसे करीब 500 करोड़ रुपए का घोटाला करार दिया था। अप्रैल 2022 से इस पूरे नेटवर्क की जांच एसओजी कर रही है।