पंजाबी मूल के नरेंद्र सिंह (65) पर अमेरिकी नागरिकता रद्द करने का ट्रायल शुरू हुआ है। आरोप है कि नरेंद्र 1962 में पहली बार अमेरिका में आया। उसने 2008 में फर्जी दस्तावेजों से ग्रीन कार्ड हासिल किया है। अमेरिका के न्याय विभाग ने उसके खिलाफ 7 आरोप लगाए ह
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असली पहचान छिपाकर नागरिकता हासिल करने का आरोप अमरीकी न्याय विभाग के सिविल डिवीज़न ने 20 जुलाई से 3 अगस्त के बीच देश भर की विभिन्न संघीय अदालतों में ये मुकदमे दायर किए हैं। न्याय विभाग का कहना है कि इन लोगों ने अमरीकी नागरिकता हासिल करते समय अपनी असली पहचान छिपाई, फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत किए या फिर अपने गंभीर आपराधिक इतिहास के बारे में अमरीकी आव्रजन विभाग को गुमराह किया। अमरीकी कानून के अनुसार, नागरिकता मिलने के बाद भी यदि किसी व्यक्ति द्वारा अतीत में की गई धोखाधड़ी या अपराध का खुलासा होता है, तो अदालत के जरिए उसकी नागरिकता छीनी जा सकती है और उसे अमरीका से डिपोर्ट किया जा सकता है।
नई पहचान बनाकर सरकार को धोखे में रखा इस पूरे मामले में भारतीय पंजाब से संबंधित 65 वर्षीय नरिंदर सिंह के खिलाफ डेलावेयर जिले की संघीय अदालत में केस दर्ज किया गया है। नरिंदर सिंह पर आरोप है कि उन्होंने अमरीका में प्रवेश पाने और बाद में नागरिकता हासिल करने के लिए दोहरी पहचान और फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया। उन्होंने अपनी पहली डिपोर्टेशन (देश से निकालने) की कार्यवाही को छिपाकर एक नई पहचान बनाई और अमरीकी सरकार को लगातार धोखे में रखा।

भारतीय पंजाबी नरिंदर सिंह पर लगे 7 गंभीर आरोप
- अवैध रूप से नागरिकता हासिल की गई: नरिंदर सिंह पर आरोप है कि उन्होंने अमरीकी नागरिकता के लिए तय कानूनी शर्तों का पालन नहीं किया और पूरी प्रक्रिया को धोखाधड़ी व छल के दम पर पूरा किया, जिससे उनकी नागरिकता अवैध है। उनकी तरफ से दिए गए पहचान पत्र, माता-पिता के नाम अलग-अलग पाए गए हैं।
- सही तथ्यों को छिपाया गया: 1996 में जब वे पहली बार अमरीका पहुंचे थे, तो उनके खिलाफ डिपोर्टेशन की प्रक्रिया शुरू हुई थी। उन्होंने अमरीकी इमिग्रेशन विभाग से अपने इस डिपोर्टेशन रिकॉर्ड को पूरी तरह छिपाया। इसकी जानकारी दिए बिना अमरिकी नागरिक से शादी कर ग्रीन कार्ड हासिल किया।
- जानबूझकर गलत जानकारी देने की कोशिश: आरोप है कि उन्होंने ग्रीन कार्ड और नागरिकता के आवेदनों में लिखित रूप से यह झूठा दावा किया कि उन्होंने कभी किसी अलग नाम, जन्मतिथि या फर्जी पहचान का उपयोग नहीं किया है। न्याय विभाग का कहना है कि उनकी जांच में ये सब झूठ निकला।
- अच्छा कैरेक्टर मेनटेन न कर पाने का आरोप: न्याय विभाग ने अपने आरोप में कहा कि अमरीकी नागरिक बनने के लिए कानूनन 5 साल की अवधि तक अच्छा नैतिक चरित्र होना जरूरी है। नरिंदर सिंह ने इस पूरी अवधि के दौरान अमरीकी इमिग्रेशन अधिकारियों से लगातार झूठ बोला और अपनी फर्जी पहचान जारी रखी।
- गैर-कानूनी कामों को अंजाम दिया: न्याय विभाग की तरफ से कोर्ट में दिए हलफनामें के अनुसार नरेंद्र ने 1996 से लेकर 2008 तक दो अलग नामों, दो अलग जन्मतिथियों और माता-पिता के अलग नामों वाले फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया, जो कि अमरीकी कानून में एक गंभीर अपराध है।
- शपथ लेकर झूठी गवाही दी: 1 मई 2008 को नागरिकता प्राप्त करने से पहले हुए व्यक्तिगत साक्षात्कार (इंटरव्यू) के दौरान उन्होंने सत्य निष्ठा की शपथ लेने के बाद भी इमिग्रेशन अधिकारियों के सामने अपने पुराने शरण आवेदन और फर्जी पहचान को लेकर झूठे बयान दिए।
- धोखाधड़ी से अमरीकी पासपोर्ट का इस्तेमाल: नागरिकता मिलने के बाद उन्होंने अमरीकी पासपोर्ट बनवाया और विदेश यात्राओं से लौटते समय सीमा सुरक्षा अधिकारियों के सामने खुद को एक वैध नागरिक के रूप में प्रस्तुत करके फर्जी दस्तावेज का लगातार उपयोग किया।