पंजाब में एसआईआर-2026 का पहला चरण पूरा हो गया है। इसके तहत राज्य के 2.14 करोड़ से ज्यादा वोटरों का घर-घर जाकर सत्यापन किया गया। मुख्य चुनाव अधिकारी पंजाब अनिंदिता मित्रा ने कहा कि जांच के दौरान 20.66 लाख नाम ऐसे मिले, जो मृतक, स्थायी रूप से दूसरे स्थ
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इन नामों को मतदाता सूची से हटाने की प्रक्रिया शुरू है। 9 जून तक पंजाब में 2,14,61,043 मतदाता पंजीकृत थे, जिनमें से 1,93,94,408 वोटरों ने अपने फॉर्म जमा कर जानकारी अपडेट कराई। वहीं, 20,66,635 रिकॉर्ड एएसडीडी यानी अनुपलब्ध श्रेणी में पाए गए। यह कुल मतदाता संख्या का करीब 9.63 फीसदी है।
एसआईआर में सामने आए 20.66 लाख रिकॉर्ड में सबसे बड़ी संख्या उन मतदाताओं की है, जो स्थायी रूप से अपना स्थान बदल चुके हैं। 9,44,131 वोटर स्थायी रूप से शिफ्टेड मिले। 5,74,568 वोटर मृत पाए गए। 4,12,715 वोटर घर पर नहीं मिले या अनुपस्थित पाए गए, जबकि 1,19,145 रिकॉर्ड डुप्लीकेट या पहले से पंजीकृत पाए गए।
मतदाताओं की सुविधा के लिए 879 पोलिंग बूथ बढ़ाए, 24 हजार से ज्यादा बीएलओ तैनात
एसआईआर की प्रक्रिया पंजाब के 23 जिलों और 117 विधानसभा क्षेत्रों में चलाई गई। इसके लिए 23 डीईओ, 117 ईआरओ, 234 एईआरओ, 2501 सुपरवाइजर और 24453 बीएलओ को मैदान में लगाया गया। बीएलओ को अभियान के दौरान बेहतर तरीके से काम करने के लिए 25 जून से 24 जुलाई तक मूल विभागों की ड्यूटी से राहत भी दी गई थी।
एसआईआर के दौरान सिर्फ मतदाता सूची ही अपडेट नहीं हुई, बल्कि मतदान केंद्रों का भी भौतिक सत्यापन और युक्तिकरण किया गया। इसके बाद पंजाब में पोलिंग स्टेशन की संख्या 24,453 से बढ़कर 25,332 हो गई है। यानी राज्य में 879 नए पोलिंग बूथ बढ़ाए गए हैं।
राजनीतिक दलों के 87,966 बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) ने भी सहयोग किया। चुनाव मशीनरी का कहना है कि राजनीतिक दलों और नागरिकों की भागीदारी से प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने में मदद मिली। एसआईआर में ज्यादा से ज्यादा लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए स्वीप अभियान भी चलाया गया।
23 जून को 2,000 से ज्यादा युवाओं की मानव शृंखला बनाकर अभियान की शुरुआत हुई। इसके बाद ई-रिक्शा, रेडियो जॉकी, पोस्टर, रंगोली प्रतियोगिताओं, एसएमएस अलर्ट और बैंकों के माध्यम से लोगों को मतदाता फॉर्म भरने और जानकारी अपडेट करने के लिए जागरूक किया गया।
राज्य में 7 जून, 11-12 जुलाई और 19 जुलाई को विशेष कैंप भी लगाए गए। मोहाली में 17.99% और लुधियाना में 15.50% फॉर्म नहीं मिले, जबकि मानसा में 96.31% सत्यापन। राज्य के 2.14 करोड़ मतदाताओं में से 1.93 करोड़ लोगों ने गणना फॉर्म जमा करा दिए, लेकिन 20.66 लाख मतदाता ऐसे रहे, जिनका सत्यापन पूरा नहीं हो सका।