बलरामपुर जिले के रामानुजगंज में कन्हर नदी के किनारे बने धर्मशाला में ठहरे वन्यजीव तस्करों के एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का वन विभाग और वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो की संयुक्त टीम ने भंडाफोड़ किया है।
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संयुक्त टीम ने आमंत्रण धर्मशाला के कमरा नंबर 205 में दबिश देकर तीन आरोपियों को रंगे हाथों धर दबोचा। पकड़े गए आरोपियों के पास से तीन नग हाथी दांत (जबड़ा) बरामद किए गए हैं। वन विभाग ने मामले में अपराध दर्ज कर तीनों आरोपियों को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
कार्रवाई के दौरान पकड़े गए आरोपियों की पहचान संतोष कुमार विश्वकर्मा (42 वर्ष) निवासी तुकबेरा जिला पलामू झारखंड, अजय कुमार गुप्ता (49 वर्ष) निवासी रामानुजगंज और सतेन्द्र कुमार (50 वर्ष) निवासी रामानुजगंज के रूप में हुई है। झारखंड के आरोपी की इस अवैध गतिविधि में संलिप्तता से स्पष्ट है कि तस्करी नेटवर्क के तार छत्तीसगढ़ से बाहर दूसरे राज्यों तक भी फैले हुए हैं। वन विभाग ने तीनों आरोपियों के खिलाफ वन्य प्राणी (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धाराओं 9, 39, 48(क), 50, 51 और 52 के तहत कानूनी कार्रवाई की है।
सरगुजा संभाग में वन्यजीवों के अंगों की तस्करी के मामले बढ़ते जा रहे हैं। इससे पहले 29 जुलाई को सूरजपुर जिले के ओड़गी में बाघ की खाल के साथ तीन तस्कर पकड़े गए थे। अब रामानुजगंज में हाथी दांत के साथ तस्करों के पकड़े जाने से यह साफ है कि तस्करी करने वाले गिरोह पूरे संभाग में सक्रिय हैं। जिस कमरे से हाथी दांत तस्कर पकड़े गए, वह 1 जुलाई को केंद्रीय बल के एक एसआई के नाम पर बुक हुआ था। एसआई और झारखंड निवासी आरोपी संतोष कुमार विश्वकर्मा उसी कमरे में ठहरे थे। एसआई के 2 जुलाई को चले जाने के बाद अब वन विभाग उसकी भूमिका की जांच कर रहा है। मुखबिर की सूचना पर टीम ने कमरा नंबर 205 में दबिश देकर आरोपियों को पकड़ा था।
पुलिस कर रही मुख्य सप्लायर और खरीदार की तलाश पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी इस कारोबार के नेटवर्क के मध्यस्थ हैं। झारखंड से हाथी दांत लेकर रामानुजगंज पहुंचा आरोपी अभी यह स्पष्ट नहीं कर पाया है कि उसे यह खेप कहां से मिली थी। रामानुजगंज के दोनों स्थानीय आरोपियों का पहले से इस तरह के मामलों में कोई पुराना रिकॉर्ड नहीं मिला है। वे ये दांत किसके लिए खरीदने पहुंचे थे, इसका खरीददार कौन था और इसे आगे कहां ले जाया जाना था, इसकी कड़ियों को जोड़ने का काम वन विभाग कर रहा है।
जांच जारी, अन्य आरोपियों को गिरफ्तार करेंगे ^मुख्य सप्लायर व खरीददार का पता नहीं चल पाया है। टीम जांच में जटी है। स्थानीय आरोपियों का नाम पहली बार वन्य जीव तस्करी में सामने आया है। इसकी जांच की जा रही है। जल्द ही अन्य आरोपियों को पकड़ा जाएगा। अनिल सिंह पैकरा, एसडीओ, वन विभाग, रामानुजगंज