छात्रों या अपराधियों पर कार्रवाई? सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सरकार से पूछे ये तीखे सवाल
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Written By:
अर्पित शुक्ला
Updated On: Aug 03, 2026 | 03:26 PM IST
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सार
Supreme Court Hearing: सुप्रीम कोर्ट ने NEET प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज FIR और पुलिस कार्रवाई पर सुनवाई करते हुए सरकार से ब्योरा मांगा है। कोर्ट हाई-पावर्ड कमेटी बनाने पर विचार कर रहा है।

सांकेतिक फोटो (सोर्स-IANS)
विस्तार
NEET Paper Leak Supreme Court Hearing: जंतर-मंतर और देशभर में NEET पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की। इस मामले पर CJI सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने सुनवाई की। प्रदर्शन के दौरान घायल पुलिसकर्मियों के परिवारों ने भी हमलावरों पर कार्रवाई की मांग को लेकर अर्जी दी है।
पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने फौरी राहत देते हुए ऐसे छात्रों को छोड़ने का निर्देश दिया था, जिनका कोई भी आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। साथ ही ऐसे लोगों की गिरफ्तारी पर भी रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इन सभी मामलों की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच के लिए हाई-पावर्ड कमेटी बनाने पर विचार करेंगे। सरकार और याचिकाकर्ता दोनों ही इसके पक्ष में हैं।
पुलिसवालों के परिजनों ने दाखिल की याचिका
इस बीच जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान घायल पुलिसवालों के परिजनों ने भी सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दाखिल कर इस मामले में उनको पक्षकार बनाने की मांग की है। परिवारों की मांग है कि सुप्रीम कोर्ट उन लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई का निर्देश दे, जिन्होंने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दौरान ड्यूटी कर रहे पुलिस वालों पर हमला किया।
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प्रदर्शनकारी छात्रों की ओर से पेश हुईं वकील वृंदा ग्रोवर ने कहा कि हम SG और सरकार से इसको लेकर बात कर रहे हैं। छात्रों के जीवन का सवाल है और कोर्ट गाइड करे कि FIR रद्द हों या फिर वापस हों। पटना में दर्ज हुई FIR में 5000 अज्ञात प्रदर्शनकारी लिखा हुआ है।
कोर्ट ने मांगा FIR का ब्योरा
एसजी ने इस दौरान कहा कि जो प्रदर्शनकारी छात्र हैं, सरकार उनके लिए देखेगी। CJI ने SG को निर्देश दिया कि आप दिल्ली और दूसरे राज्यों में दर्ज किए गए FIR का ब्योरा दीजिए। इस पर तुषार मेहता ने कहा कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR के बारे में कुछ गलतफहमी या गलत जानकारी थी। सरकार अपने वादे को लेकर गंभीर है। कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो मामले को गर्म रखना चाहते हैं।
जस्टिस बागची ने कहा कि क्रिमिनल लॉ का ढांचा केस वापस लेने की इजाज़त देता है। उन्होंने कहा कि ऐसा क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करके किया जाता है। जिनका आपराधिक रिकॉर्ड है और जिनका नहीं है, उनको अलग-अलग करना चाहिए।
छात्र और अपराधियों के मामले अलग
CJI ने इस पर कहा कि सबसे पहले FIR को अलग-अलग करना होगा। उन्होंने कहा कि एक छात्रों के खिलाफ और दूसरा हार्ड अपराधियों के खिलाफ। इसको बाद आप जांच कर सकते हैं। वकील वृंदा ग्रोवर ने कहा कि पटना से एक FIR है, जिसमें 152 लोगों के नाम हैं और 5,000 अज्ञात के नाम हैं। इसको लेकर किसी को भी पकड़ा जा सकता है। हमें राज्य के साथ मिलकर एक मैकेनिज्म बनाना होगा और इसे रद्द भी किया जा सकता है।
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इस पर तुषार मेहता ने दलील दी कि जिनका क्रिमिनल रिकॉर्ड रहा है, उनको छोड़कर बाकी सबका ध्यान रखा जा सकता है। जस्टिस बागची ने कहा कि सरकारी वकील केस वापस ले सकते हैं। क्लोजर रिपोर्ट फाइल की जा सकती है।
