
NSE IPO का प्राइस बैंड 1700-1785 रुपये तय
NSE IPO Details: भारत का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज यानी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) अपना आईपीओ लेकर आ रहा है. इस ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए 22,562 करोड़ रुपये जुटाने की योजना है. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा समेत 23 मौजूदा निवेशक अपनी हिस्सेदारी बेच रहे हैं. रिटेल निवेशकों की बाजार में बढ़ती भागीदारी से एक्सचेंज को सीधा फायदा मिल रहा है. लेकिन हर निवेश की तरह इस आईपीओ के भी अपने जोखिम हैं. ऐसे में बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या हाई-रिस्क लेने वाले लंबी अवधि के निवेशकों के लिए ये एक मुनाफे का सौदा साबित हो सकता है.
कमाई का मॉडल कितना मजबूत
एनएसई ने 1992 में शुरुआत की थी. आज ये ट्रेडिंग, सेटलमेंट, लिस्टिंग समेत कई काम करता है. वित्त वर्ष 2026 (FY26) के आंकड़ों के मुताबिक कैश मार्केट में इसका 93 प्रतिशत कब्जा है. वहीं इक्विटी फ्यूचर्स में 99.7 प्रतिशत हिस्सेदारी है. ये आंकड़े एक्सचेंज के दबदबे को साफ दिखाते हैं.
लेकिन कंपनी की कमाई पूरी तरह से ट्रांजैक्शन वॉल्यूम पर टिकी है. वित्त वर्ष 2026 में कंपनी की कुल ऑपरेटिंग कमाई का करीब 79 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ ट्रांजैक्शन चार्ज से आया. इसमें भी 60 फीसदी कमाई केवल ऑप्शन ट्रेडिंग से हुई है. हालांकि कंपनी ने अपनी कमाई के रास्ते बढ़ाने के लिए डेटा, कोलोकेशन सर्विस जैसी चीजों पर भी फोकस किया है. इनसे होने वाली कमाई 9.5 फीसदी बढ़कर 1,955.9 करोड़ रुपये हो गई है.
वित्तीय सेहत पर एक नजर
बीते तीन सालों में कंपनी के रेवेन्यू में 6 फीसदी की सालाना बढ़ोतरी हुई है. लेकिन वित्त वर्ष 2026 में रेवेन्यू 3 फीसदी गिरकर 16,601 करोड़ रुपये रह गया. इसकी सबसे बड़ी वजह सरकारी नियमों में हुए बदलाव रहे. नियमों के कारण कैश मार्केट के साथ फ्यूचर्स-ऑप्शंस के वॉल्यूम में कमी आई जिससे ट्रांजैक्शन से होने वाली कमाई 4 फीसदी गिर गई.
रेवेन्यू घटने के बाद भी कंपनी का नेट प्रॉफिट बढ़ा है. ये सालाना आधार पर 11 फीसदी बढ़कर 10,302 करोड़ रुपये पहुंच गया. अगर मार्जिन की बात करें तो एनएसई का एबिटडा मार्जिन 66.9 प्रतिशत रहा है. ये प्रतिद्वंदी एक्सचेंज बीएसई (64%) से ज्यादा है. सबसे अच्छी बात ये है कि कंपनी पर कोई कर्ज नहीं है. 31 मार्च 2026 तक कंपनी के पास 17,976 करोड़ रुपये का नेट कैश रिजर्व था.
जोखिम जो मुनाफे पर लगा सकते हैं ब्रेक
शेयर बाजार का बिजनेस हमेशा रेगुलेटरी बदलावों के खतरे में रहता है. 30 जून 2026 तक एनएसई पर 13.24 करोड़ रजिस्टर्ड निवेशक थे. लेकिन चिंता की बात ये है कि ट्रेडिंग कुछ ही लोगों तक सीमित है. कंपनी की कुल कमाई का 46.8 फीसदी हिस्सा सिर्फ टॉप 10 ट्रेडिंग सदस्यों से आता है. इसके अलावा तकनीकी सिस्टम फेल होना, साइबर हमले का खतरा, सरकारी नीतियों में अचानक बदलाव कुछ ऐसे जोखिम हैं जो भविष्य में कंपनी की कमाई पर सीधा असर डाल सकते हैं.
लंबी अवधि के निवेशकों के लिए क्या है खास
निवेश के लिहाज से किसी भी कंपनी का वैल्युएशन सबसे अहम होता है. आईपीओ के बाद एनएसई का प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) मल्टीपल 42.9 है. ये बीएसई के 53 के मुकाबले सस्ता है. शेयर बाजार के बिजनेस में नए खिलाड़ियों की एंट्री बहुत मुश्किल होती है. इसलिए एनएसई का मार्केट में दबदबा आगे भी बने रहने की उम्मीद है. कंपनी पूरी तरह कर्ज मुक्त है. लेकिन इसकी कमाई सीधे तौर पर शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करती है.
जब बाजार में गिरावट आती है तो ट्रेडिंग वॉल्यूम घट जाता है, जिससे एक्सचेंज की कमाई कम होती है. इन्हीं वजहों को देखते हुए ये आईपीओ उन निवेशकों के लिए ज्यादा बेहतर नजर आता है जो शेयर बाजार के रिस्क को गहराई से समझते हैं. अगर निवेशक बाजार का जोखिम झेलने की क्षमता रखते हैं, तो ये इश्यू लंबी अवधि में उनके लिए एक अच्छा निवेश साबित हो सकता है.
Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए. TV9 भारतवर्ष अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है.
विभव शुक्ला
विभव शुक्ला वर्तमान में TV9 हिंदी में सीनियर सब-एडिटर के तौर पर बिजनेस डेस्क पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता में उन्हें छह वर्षों का अनुभव है. विभव मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के रहने वाले हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की थी. इसके बाद वह Inshorts और गुजरात फर्स्ट जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़े रहे हैं.
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