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NEET पेपर लीक प्रदर्शनों में शामिल छात्रों से FIR वापस ले सकती हैं सरकारें, SC ने शर्त भी रखी

August 3, 2026

Aug 03, 2026 04:29 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान

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सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शुरुआत में SC को बताया, 'केंद्र सरकार प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ प्राथमिकी पर आगे नहीं बढ़ने की अपनी प्रतिबद्धता को लेकर गंभीर है, सिवाय उन छात्रों के जिनका आपराधिक रिकॉर्ड रहा हो।'

Supreme Court says states can withdraw FIRs against students participated in NEET protests

NEET पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शनकारी छात्र।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को साफ किया कि राज्य सरकारें NEET पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ दर्ज FIRs को बंद कर सकती हैं या उन्हें वापस ले सकती हैं, बशर्ते उनका गंभीर और जघन्य अपराधों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं हो। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जज जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने यह भी कहा कि आपराधिक रिकॉर्ड से आशय सिर्फ गंभीर और जघन्य अपराधों से है। मामले की सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शुरुआत में शीर्ष अदालत को बताया, 'केंद्र सरकार प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ प्राथमिकी पर आगे नहीं बढ़ने की अपनी प्रतिबद्धता को लेकर गंभीर है, सिवाय उन छात्रों के जिनका आपराधिक रिकॉर्ड रहा हो।'

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि गंभीर और जघन्य अपराधों से जुड़े आपराधिक रिकॉर्ड वाले 2,700 से अधिक लोगों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी वापस नहीं ली जाएंगी। सुनवाई के दौरान सीनियर वकील गोपाल शंकरनारायणन ने बताया कि प्रदर्शनों के दौरान वकीलों के बच्चों को भी पीटा गया। उन्होंने कहा, 'वीडियो बेहद चौंकाने वाले हैं। हमने अदालत को 300 वीडियो सौंपे हैं। चूंकि ऊपर से निर्देश आए हैं, इसलिए पुलिस आयुक्त को इन सब पर ध्यान देना चाहिए।'

'पुलिस ने पैलेट गन का इस्तेमाल क्यों किया'

सीनियर वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा, 'हमने बिना वर्दी वाले उन लोगों की पहचान की है, जो कथित पुलिस ज्यादती में शामिल थे। पुलिस आयुक्त और RAF निदेशक को यह बताने का निर्देश दिया जाना चाहिए कि पुलिस ने पैलेट गन आदि का इस्तेमाल क्यों किया।' मामले की अगली सुनवाई अब 18 अगस्त को होगी। सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले कहा था कि सिर्फ इसलिए पुलिस की ज्यादती या लाठीचार्ज को सही नहीं ठहराया जा सकता कि कोई आंदोलन हो रहा है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार पूरी तरह से सुनिश्चित है।

दिल्ली में 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में निकाले गए मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़पें हुई थीं। संसद की ओर बढ़ने की कोशिश कर रही भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षाकर्मियों ने लाठियों और आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल किया था।

पेपर लीक पर चर्चा की मांग को लेकर सदन में हंगामा

इस बीच, नीट पेपर लीक होने के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर राज्यसभा में विपक्षी सदस्यों ने हंगामा किया। इसके कारण सोमवार को राज्यसभा की बैठक एक बार के स्थगन के बाद पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई। एक बार के स्थगन के बाद दोपहर 2 बजे जब बैठक फिर शुरु हुई तो उपसभापति हरिवंश ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास संशोधन विधेयक पर चर्चा शुरू करने के लिए कहा। यह विधेयक 28 जुलाई को सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास मंत्री जीतन राम मांझी ने सदन में पेश किया था।

विपक्षी सदस्यों ने नीट प्रश्नपत्र लीक होने के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग करते हुए हंगामा शुरू कर दिया। विपक्ष ने अयोध्या के राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी का मुद्दा भी उठाया। उपसभापति ने सदस्यों से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास संशोधन विधेयक पर चर्चा करने के लिए कहा। उन्होंने सदन में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से अपनी बात रखने के लिए कहा। खरगे ने राम मंदिर अयोध्या के राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी का मुद्दा उठाना चाहा। हरिवंश ने उन्हें इसकी इजाजत नहीं दी।