
नई दिल्ली रिव्यू ऑफ बुक्स का विमोचन.
नई दिल्ली में ‘न्यू दिल्ली रिव्यू ऑफ बुक्स’ (NDRB) के पहले अंक का विमोचन किया गया. इस अवसर पर बौद्धिक विविधता, स्वतंत्र चिंतन, संस्थानों के निर्माण और दुनिया को भारतीय दृष्टिकोण से समझने की जरूरत पर चर्चा हुई. कार्यक्रम में प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए. इस अवसर पर NDRB के एडिटर-इन-चीफ प्रेम अंश सिन्हा और प्रकाशक एवं नेशन फर्स्ट पॉलिसी रिसर्च एंड चेंज फाउंडेशन (NFPRC) के रिसर्च डायरेक्टर अनंत कृष्णा भी मौजूद रहे.
तर्कों के आधार पर हो किताबों का मूल्यांकन: अनंत कृष्णा
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अनंत कृष्णा ने भारत में बौद्धिक बहुलतावाद (Intellectual Pluralism) को बढ़ावा देने की जरूरत बताई. उन्होंने NDRB को एक ‘बौद्धिक बुनियादी ढांचा’ बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य गंभीर विमर्श और अलग-अलग विचारों को मंच प्रदान करना है.

अनंत कृष्णा ने कहा कि इस प्रकाशन में किताबों का मूल्यांकन उनकी राजनीतिक विचारधारा के आधार पर नहीं, बल्कि उनमें प्रस्तुत तर्कों की मजबूती के आधार पर किया जाएगा. उन्होंने कहा कि भारत में ऐसी बौद्धिक संस्कृति विकसित करने की जरूरत है, जहां असहमति और अलग-अलग दृष्टिकोणों को जगह मिले.
किताबों की समीक्षा सिर्फ सारांश तक सीमित नहीं होनी चाहिए: प्रेम अंश सिन्हा
प्रेम अंश सिन्हा ने आलोचनात्मक समीक्षा लेखों के महत्व पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि किसी किताब की समीक्षा केवल उसके सारांश तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसमें प्रस्तुत तर्कों, संदर्भों और प्रमाणों का गंभीर विश्लेषण भी जरूरी है.
सिन्हा ने संस्थानों के निर्माण और लोकतांत्रिक भागीदारी को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि NDRB ऐसे लोगों के लिए साझा मंच बनने की दिशा में काम करेगा, जो भारत की संस्थागत व्यवस्था और नागरिक जीवन को नई दिशा देने में भूमिका निभा सकते हैं.
दुनिया को भारतीय नजरिए से देखने की जरूरत: संजीव सान्याल
मुख्य अतिथि संजीव सान्याल ने NDRB की युवा टीम को बधाई देते हुए प्रकाशन की संपादकीय दृष्टि, डिजाइन, प्रोडक्शन और गुणवत्ता की सराहना की. उन्होंने कहा कि भारत में बौद्धिक विविधता को बढ़ावा देना जरूरी है. साथ ही उन्होंने किसी एक विचारधारा के वर्चस्व और अलग विचार रखने वालों को खारिज करने की प्रवृत्ति के प्रति आगाह किया.

सान्याल ने कहा कि भारत को वैश्विक घटनाक्रम और दूसरे देशों के विकास का आकलन केवल विदेशी दृष्टिकोण के आधार पर नहीं करना चाहिए. इसके बजाय भारत को अपनी स्वतंत्र सोच और प्राथमिकताओं के आधार पर दुनिया को समझने और उसका विश्लेषण करने की क्षमता विकसित करनी होगी. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत को सिर्फ दूसरे देशों द्वारा किए गए आकलन पर निर्भर रहने के बजाय अपने बौद्धिक ढांचे को मजबूत करना चाहिए.
तेजी से विस्तार नहीं, गुणवत्ता और निरंतरता पर हो जोर
संजीव सान्याल ने NDRB को सलाह दी कि वह तेजी से विस्तार करने के बजाय दीर्घकालिक स्थिरता, निरंतरता और गुणवत्ता को प्राथमिकता दे. उन्होंने भारत और दुनिया के आर्थिक विकास का उल्लेख करते हुए फ्रेडरिक हायेक और बीआर शेनॉय जैसे विचारकों के योगदान को भी रेखांकित किया.
सान्याल ने स्वतंत्र भारतीय संस्थानों और ऐसे बौद्धिक ढांचे के निर्माण की वकालत की, जो देश की परिस्थितियों और जरूरतों के अनुरूप विचारों को विकसित कर सकें.
शोधकर्ताओं और छात्रों को भी मिलेगा मंच
न्यू दिल्ली रिव्यू ऑफ बुक्स ने शिक्षकों, थिंक टैंक से जुड़े विशेषज्ञों, पीएचडी शोधार्थियों, छात्रों और अन्य इच्छुक लोगों को प्रकाशन से जुड़ने के लिए आमंत्रित किया है. वे अपने लेख भेजने, इंटर्नशिप और विभिन्न सहयोगी गतिविधियों के माध्यम से इसमें भागीदारी कर सकेंगे.
प्रेम अंश सिन्हा ने कहा कि NDRB का उद्देश्य ऐसा साझा मंच तैयार करना है, जहां गंभीर विचार-विमर्श के जरिए भारत के संस्थानों और नागरिक जीवन को आकार देने वाले लोग एक-दूसरे से जुड़ सकें.
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