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MP वेयरहाउसिंग के अफसरों के पत्नी-बेटों के नाम पर गोदाम: खुद ही तय करते हैं और खुद ही लेते हैं लाखों रुपए किराया - Madhya Pradesh News

September 12, 2026

मध्य प्रदेश वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कॉर्पोरेशन (MPWLC) के कुछ अधिकारियों पर आरोप है कि वे अपने परिजनों के नाम पर निजी वेयरहाउस संचालित कर रहे हैं। इन अफसरों की जिम्मेदारी प्राइवेट गोदामों के सिलेक्शन और किराया तय करने से जुड़ी है।

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दैनिक भास्कर ने जब इन आरोपों की पड़ताल की तो कॉर्पोरेशन के कुछ अधिकारियों के परिजन के नाम पर निजी वेयरहाउस संचालित होने के दस्तावेज मिले। इनमें से एक मामले में कॉर्पोरेशन के तत्कालीन एमडी के निज सहायक विपिन लाड से बातचीत खुफिया कैमरे में रिकॉर्ड हुई।

उन्होंने कहा-'पॉलिसी ही ऐसी बनती है कि प्राइवेट वेयरहाउस वालों को फायदा होता है।' वहीं इस मामले में जब कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष संजय नगाइच से पूछा तो उन्होंने कहा कि मामले की जांच के बाद जो भी दोषी होगा उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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इन 8 अधिकारियों के परिजन के नाम पर वेयरहाउस का ब्योरा

भास्कर की पड़ताल में ऐसे अधिकारी-कर्मचारी मिले, जिनकी पोस्टिंग वाले जिले या संभाग में उनके परिजनों के नाम पर निजी वेयरहाउस संचालित हैं। पड़ताल में यह भी सामने आया कि संबंधित अधिकारियों ने विभाग को दिए जाने वाले अचल संपत्ति के वार्षिक विवरण में इनका उल्लेख नहीं किया है।

अब इनके बारे में सिलसिलेवार जानिए…

शांति वेयरहाउस, दतिया (2023 से): यह पत्नी प्रेमलता पुरोहित के नाम पर है। 5,000 मीट्रिक टन क्षमता वाले इस गोदाम का मासिक किराया ₹4.35 लाख और सालाना ₹52.20 लाख है। दस्तावेजों के अनुसार, पिछले 18 महीनों में ₹55 लाख का भुगतान लिया गया है।

बेटे का वेयरहाउस: जमनेश पुरोहित ने मुंबई की एक फर्म के मालिक युवराज सिंह सेंगर से 21,736 मीट्रिक टन क्षमता वाला वेयरहाउस ₹23 प्रति मीट्रिक टन की दर से लीज पर लिया। कॉर्पोरेशन से इसके लिए ₹18.91 लाख मासिक किराया मिलता है।

कुल भुगतान: दोनों वेयरहाउस से पुरोहित परिवार को हर महीने करीब ₹18.25 लाख का भुगतान होने का दावा है।

एमडी के पीए की बातचीत कैमरे में रिकॉर्ड

दैनिक भास्कर को मिले दस्तावेजों के अनुसार, कॉर्पोरेशन के बिजनेस मैनेजर एस.के. पुरोहित के परिवार के नाम पर दतिया में निजी वेयरहाउस संचालित हैं। इस संबंध में निगम कार्यालय में एमडी के पीए विपिन लाड से हुई बातचीत भी खुफिया कैमरे में रिकॉर्ड हुई।

रिपोर्टर: पुरोहित जी बिजनेस मैनेजर हैं, क्या उनके परिवार के नाम से भी वेयरहाउस है?

निज सहायक (विपिन लाड): वो जो पुरोहित जी का मैटर है, वो तो खुद पॉलिसी तय करते हैं। जैसे कि JVS वालों का किराया बढ़ने का भी आरोप लगा है। वो पॉलिसी ही ऐसी बनाते हैं कि जिससे प्राइवेट वेयरहाउस वालों को इसका फायदा होता है।

पीए विपिन लाड़ ने कहा कि पॉलिसी ही प्राइवेट वेयर हाउस को फायदा पहुंचाने के लिए बनती है।

पीए विपिन लाड़ ने कहा कि पॉलिसी ही प्राइवेट वेयर हाउस को फायदा पहुंचाने के लिए बनती है।

नियम क्या कहते हैं? निलंबन से बर्खास्तगी तक कार्रवाई का प्रावधान

नियमों के मुताबिक, संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी सरकारी अनाज के लिए निजी वेयरहाउस के चयन और किराया प्रक्रिया से जुड़ी है। ऐसे में यदि किसी अधिकारी या उसके परिजन का निजी वेयरहाउस उसी व्यवस्था में शामिल हो, तो हितों के टकराव का सवाल उठता है।

सर्विस मैटर के विशेषज्ञ एडवोकेट मानव तनवानी के अनुसार- एमपी सर्विस कंडक्ट रूल्स और कॉर्पोरेशन के नियम किसी कर्मचारी या उसके परिवार को उसी क्षेत्र में निजी व्यापार की अनुमति नहीं देते। इसके लिए एमडी की लिखित अनुमति जरूरी है।

वेयरहाउस के साथ नियुक्ति पर भी सवाल

दैनिक भास्कर की पड़ताल में इन अधिकारियों से जुड़े नियुक्ति संबंधी दस्तावेजों में भी सवाल सामने आए हैं। उदाहरण के लिए, 1995 बैच के अधिकारी एस.के. पुरोहित की नियुक्ति के समय अनुप्रमाणन पत्र जमा कराने और पुलिस वेरिफिकेशन के रिकॉर्ड नहीं मिले।

पड़ताल में यह भी सामने आया कि कुछ अधिकारियों के कार्यकाल में निगम को करोड़ों रुपए के नुकसान से जुड़े मामले सामने आए। संबंधित फाइलें एमडी तक पहुंचीं, जिन पर डिस्कस (चर्चा करें) लिखा गया था।