जयपुर23 मिनट पहलेलेखक: लता खण्डेलवाल
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63.55% मत, पिछली बार से 6% ज्यादा, मायने- भाजपा को बढ़त
जयपुर की शहरी राजनीति का 1994 से अब तक का सबसे बड़ा सच यही रहा है कि सत्ता सचिवालय में भले ही किसी भी दल की रही हो, गुलाबी नगर के मतदाताओं की पहली पसंद अधिकांश मौकों पर भाजपा ही रही है। 1994 से 2020 तक जयपुर में 7 बार बोर्ड बने (5 संयुक्त और 2020 में ग्रेटर-हेरिटेज के 2 बोर्ड)। इनमें 6 बार मेयर की कुर्सी पर भाजपा काबिज हुई, जबकि कांग्रेस को केवल 2009 में सीधे चुनाव और 2020 में हेरिटेज में निर्दलीयों की बैसाखी के सहारे ही सफलता मिली। शुक्रवार को जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों के लिए मतदान हुआ। इस बार का चुनाव ग्रेटर और हेरिटेज दोनों बोर्ड का एकीकरण में हुआ है। शुक्रवार को 63.55% मतदान हुआ, जो पिछले निगम चुनाव के कुल औसत मतदान 57.47% से 6% ज्यादा है। भास्कर ने राजनीतिक विशेषज्ञों से 1994 से अब तक के सियासी सफर और वोटिंग पैटर्न से जीत-हार के संकेतों का एनालिसिस किया।
2004 में 11% कम वोटिंग, 2009 में 11.17% और 2014 में 7.87% ज्यादा, बोर्ड भाजपा के
1994 : जयपुर में पहली बार नगर निगम चुनाव हुए। 51.20% वोटिंग, भाजपा को 70 वार्डों में स्पष्ट बहुमत। मोहनलाल गुप्ता मेयर बने। 1999 : प्रदेश में कांग्रेस सरकार थी। वोटिंग 1.45% बढ़कर 52.65% हो गई, भाजपा का बोर्ड और निर्मला वर्मा मेयर बनीं। 2004 : भाजपा सरकार थी। वोटिंग 11.35% गिरकर 41.30% हुई। फिर भी 77 वार्डों में भाजपा को बहुमत। अशोक परनामी मेयर बने। 2009 : कांग्रेस सरकार में पहली बार मेयर के लिए सीधा चुनाव हुआ। 11.17% ज्यादा 52.47% वोटिंग। कांग्रेस की ज्योति खण्डेलवाल निर्वाचित मेयर बनीं। भाजपा के 47 पार्षद जीते और बोर्ड बनाया। 2014 : भाजपा सरकार। मतदान 7.87% बढ़कर 60.34%। 64 से ज्यादा पार्षद भाजपा के जीते। नाहटा मेयर। 2020 : कांग्रेस सरकार ने निगम को दो हिस्सों में बांटा। जयपुर ग्रेटर में 150 वार्ड थे। भाजपा ने 88 सीटें जीतकर बोर्ड बनाया। जयपुर हेरिटेज में 100 वार्ड थे। कांग्रेस के 47 पार्षदों ने निर्दलीयों के साथ बोर्ड बनाया। दोनों में कुल 57.47% मतदान हुआ था।
फर्जी वोटिंग व ईवीएम खराब की 22 शिकायतें
18 जगह ईवीएम खराब होने और 4 जगह फर्जी वोटिंग की शिकायतें। वार्ड-110 के महाराजा स्कूल स्थित बूथ पर किशनपोल बाजार में पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल व कांग्रेस प्रत्याशी सुनीता मेठी के समर्थकों में कहासुनी हो गई।
14 को परिणाम; बोर्ड के 3 समीकरण, निर्दलीयों की भूमिका होगी महत्वपूर्ण
150 वार्ड बनने के बाद बोर्ड का जादुई आंकड़ा 76 है। 63.55% मतदान के बाद बोर्ड गठन के 3 समीकरणों से भाजपा बोर्ड की 70% दावेदारी बताई जा रही है।
2020 में हेरिटेज के जिन 100 वार्डों में कांग्रेस ने निर्दलीयों के बूते बढ़त ली थी, वे अब ग्रेटर के 150 वार्डों में समाहित हो चुके हैं। ग्रेटर के सांगानेर, विद्याधर नगर, झोटवाड़ा, मालवीय नगर पारंपरिक रूप से भाजपा के गढ़ हैं। यदि कांग्रेस चारदीवारी में 60% सीटें भी जीतती है तो भी ग्रेटर के 80-90 वार्ड भाजपा को बढ़त दिला सकते हैं।
यदि चारदीवारी के 45-50 वार्डों में उच्च मतदान के चलते कांग्रेस एकतरफा सीटें निकालती हैं और आउटर में बागी प्रत्याशी 15-20 सीटों पर भाजपा का खेल बिगाड़ देते हैं, तभी कांग्रेस 60-65 के आंकड़े तक पहुंच सकती है।
बागियों ने 150 से 500 वोटों के अंतर से 15 से 20 वार्ड जीत लिए और दोनों प्रमुख दल 70 से कम में अटक गए तो मेयर के लिए 21 सितंबर को होने वाले अप्रत्यक्ष चुनाव में गेंद निर्दलीयों के पाले में चली जाएगी। ऐसी स्थिति में भाजपा को सत्ता में होने के कारण रणनीतिक लाभ मिलेगा।
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