शहर में अब कॉलोनी, मल्टी या बड़े भवन का नक्शा पास कराने के लिए सिर्फ पानी की पाइप लाइन डालना काफी नहीं होगा। पीने और घरेलू इस्तेमाल के पानी के साथ फ्लशिंग और सफाई जैसे कामों के लिए अलग पाइप लाइन भी डालना होगी। नगर निगम नए निर्माणों में ड्यूल पाइप लाइ
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- मल्टी और बड़े भवनों पर लागू होगी शर्त
भूमि विकास नियमों में मार्च 2025 में ही ड्यूल पाइप लाइन का प्रावधान शामिल किया जा चुका है, लेकिन अब तक प्रदेश के किसी नगर निगम या नगर पालिका में इसे लागू नहीं किया गया है। इंदौर में इसे लागू करने की तैयारी ऐसे समय हो रही है, जब इस साल कम बारिश के कारण गर्मी में पानी की उपलब्धता बनाए रखना चुनौती बनने वाला है।
340 एमएलडी सीवेज का उपचार, लेकिन ट्रीटेड वाटर की गुणवत्ता पर सवाल
नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक, शहर में सीवेज ट्रीटमेंट की स्थापित क्षमता करीब 436.5 एमएलडी है। फिलहाल प्रतिदिन औसतन 340 एमएलडी सीवेज का उपचार किया जा रहा है। इस पानी का उपयोग उद्यानों, कृषि भूमि और तालाबों को भरने में होता है। निगम के रिकॉर्ड के मुताबिक, 170 उद्यानों में उपचारित पानी का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके लिए सात नेटवर्क में कुल 95 किलोमीटर पाइप लाइन और छह नेटवर्क में 45 हाइड्रेंट स्थापित हैं। हालांकि, उद्यान विभाग की ओर से भी इस पानी की गुणवत्ता पर आपत्ति दर्ज कराई जा चुकी है।
सप्ताहभर पहले नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की अध्यक्षता वाली बैठक में भी जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया था कि एसटीपी प्लांट बिना ट्रीटमेंट किए पानी नालों में बहा रहे हैं। मंत्री ने पानी की जांच के लिए भी कहा था। फिलहाल शहर में सेकंडरी ट्रीटमेंट के बाद मिलने वाले पानी की गुणवत्ता को लेकर सवाल हैं। निर्माण कार्यों में भी इसके इस्तेमाल की उपयुक्तता पर आपत्ति है। ऐसे में टर्शरी ट्रीटमेंट प्लांट के जरिए पानी की गुणवत्ता सुधारना और उसकी सप्लाई के लिए अलग नेटवर्क तैयार करना भी जरूरी होगा।
सूरत की तरह टर्शरी ट्रीटमेंट प्लांट लगवाने की तैयारी
निगम अब ट्रीटेड पानी की गुणवत्ता बेहतर करने और उसके उपयोग का दायरा बढ़ाने के लिए चार स्थानों पर कुल 30 एमएलडी क्षमता के टर्शरी ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की योजना पर काम कर रहा है। इनमें सांवेर रोड औद्योगिक क्षेत्र में 3 एमएलडी, कनाड़िया में 8 एमएलडी, टिगरिया बादशाह तालाब के पास 9 एमएलडी और कबीटखेड़ी के 245 एमएलडी एसटीपी परिसर में 10 एमएलडी क्षमता का प्लांट प्रस्तावित है।
150 लीटर पानी में से 30 लीटर फ्लशिंग में इस्तेमाल हो रहा
निगम के मुताबिक प्रति व्यक्ति पानी की खपत 150 लीटर प्रतिदिन है। करीब 30 लीटर शौचालय की फ्लशिंग और 15 लीटर घर की धुलाई में खर्च होता है। यानी इन दो कामों में ही 45 लीटर पानी लगता है, जबकि इनके लिए पीने योग्य पानी जरूरी नहीं है। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में उपचारित पानी का इस्तेमाल ऐसे कामों में किया जा सकता है। इससे पीने योग्य पानी की बचत की जा सकेगी।