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नेपाल में बाढ़ के बाद सोशल मीडिया पर सरकार की सख्ती, आपदा से जुड़े वीडियो-फोटोज हटाने के लिए Meta-TikTok को दिए निर्देश

August 29, 2026

Nepal Floods: नेपाल में बाढ़ के बाद सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक और संवेदनशील सामग्री को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है. सरकार ने Meta-TikTok से बाढ़ से जुड़ी ग्राफिक तस्वीरें, AI वीडियो, धोखाधड़ी वाले QR कोड समेत सभी कंटेंट को तुरंत हटाने को कहा है.

Nepal Floods: नेपाल में बाढ़ के बाद सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक और संवेदनशील सामग्री को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है. सरकार ने Meta-TikTok से बाढ़ से जुड़ी ग्राफिक तस्वीरें, AI वीडियो, धोखाधड़ी वाले QR कोड समेत सभी कंटेंट को तुरंत हटाने को कहा है.

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Nepal Floods: नेपाल में भोटेकोशी बाढ़ के बाद सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक और संवेदनशील सामग्री को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है. सरकार ने Meta और TikTok से बाढ़ से जुड़ी ग्राफिक तस्वीरें, AI से बनाए गए फर्जी वीडियो, गलत जानकारी और धोखाधड़ी वाले QR कोड तुरंत हटाने को कहा है. 

नेपाल के प्रमुख अखबार द काठमांडू पोस्ट के अनुसार, शुक्रवार को सरकारी अधिकारियों ने नेपाल में Meta और TikTok के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की. इस दौरान अधिकारियों ने ऐसी सामग्री पर तेजी से कार्रवाई करने की मांग की, जिससे लोगों में भ्रम फैल रहा है या राहत और बचाव कार्य प्रभावित हो सकते हैं. 

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क्यों लिया फैसला?

सरकार ने यह भी कहा कि बाढ़ पीड़ितों से जुड़ी परेशान करने वाली तस्वीरें और वीडियो उनके परिवारों की परेशानी बढ़ा सकते हैं. ऐसे कंटेंट को रोकने के लिए सोशल मीडिया कंपनियों से तुरंत कदम उठाने को कहा गया है. इससे साफ है कि सरकार बाढ़ से जुड़े सभी वीडियो और फोटोज सोशल मीडिया से हटवाना चाहती है.

सिस्टम और एल्गोरिदम को सक्रिय करने को कहा

नेपाल सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Meta और TikTok से भ्रामक और आपत्तिजनक सामग्री को तेजी से रोकने के लिए अपने सिस्टम और एल्गोरिदम को सक्रिय करने को कहा है. सरकार चाहती है कि ऐसे कंटेंट की पहचान होते ही उसे तुरंत ब्लॉक या हटाया जा सके.

सरकार द्वारा गठित सोशल मीडिया विनियमन और प्रबंधन कार्यबल के समन्वयक और नेपाल दूरसंचार प्राधिकरण (NTA) के निदेशक बिजय कुमार रॉय ने बताया कि कंपनियों से आपत्तिजनक और गलत जानकारी वाले लिंक को चिह्नित होते ही हटाने के लिए कहा गया है. रॉय के मुताबिक, इंटरनेट सेवा प्रदाता केवल किसी पूरी वेबसाइट या वेब डोमेन को ब्लॉक कर सकते हैं. ऐसे में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के साथ सीधे समन्वय करना जरूरी है. उन्होंने बताया कि सरकार ने Meta और TikTok से अपने एल्गोरिदम को इस तरह इस्तेमाल करने का आग्रह किया है कि आपत्तिजनक और भ्रामक सामग्री पोस्ट होते ही उसकी पहचान हो और उसे अपने आप ब्लॉक किया जा सके.

फर्जी QR कोड से चंदा वसूली की कोशिश

रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल में अचानक आई बाढ़ के बाद सोशल मीडिया पर फर्जी और भ्रामक सामग्री तेजी से फैल रही है. पुराने वीडियो और तस्वीरों को बाढ़ के नए दृश्य बताकर शेयर किया जा रहा है. इसके अलावा AI से बनाए गए वीडियो और तस्वीरों को भी असली बताकर लोगों को गुमराह किया जा रहा है.

सबसे बड़ी चिंता फर्जी राहत अभियानों को लेकर है. अधिकारियों ने ऐसे QR कोड का पता लगाया है, जिनके जरिए बाढ़ पीड़ितों के नाम पर लोगों से चंदा मांगा जा रहा है. आशंका है कि ठग लोगों की सहानुभूति का फायदा उठाकर राहत के लिए दिए जाने वाले पैसे को अपने खातों में भेज सकते हैं. फर्जी पोस्ट पर कार्रवाई के लिए Meta और TikTok ने नेपाल के अधिकारियों के लिए कुछ खास संपर्क माध्यम बनाए हैं.  अधिकारी इन माध्यमों से संदिग्ध पोस्ट की जानकारी कंपनियों को दे रहे हैं, जिसके बाद कंपनियां संबंधित कंटेंट की जांच कर उसे हटाने के लिए कार्रवाई कर रही हैं.

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तुरंत कार्रवाई की मांग, 48 घंटे की देरी से बढ़ रही परेशानी

नेपाल में बाढ़ से जुड़ी भ्रामक और परेशान करने वाली सामग्री को हटाने में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की देरी पर अधिकारियों ने चिंता जताई है. सरकारी अधिकारी बिजय कुमार रॉय के मुताबिक, Meta और TikTok को किसी पोस्ट की शिकायत मिलने के बाद उस पर कार्रवाई करने में फिलहाल 24 से 48 घंटे तक लग रहे हैं. इस दौरान गलत जानकारी और आपदा से जुड़ी संवेदनशील तस्वीरें व वीडियो तेजी से फैल जाते हैं.

अधिकारियों ने दोनों कंपनियों से कार्रवाई का समय कम करने को कहा है. खास तौर पर पीड़ितों और बाढ़ के बाद के भयावह हालात दिखाने वाली तस्वीरों और वीडियो को तुरंत ब्लर करने की मांग की गई है, ताकि ऐसी सामग्री से पीड़ित परिवारों और आम लोगों को और परेशानी न हो.