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करनाल: LADCS पॉलिसी के विरोध में वकीलों की भूख हड़ताल, बोले- न्याय व्यवस्था के लिए खतरा, सरकार और हाई ज्यूडिशरी से की अपील - Haribhoomi

July 29, 2026

करनाल में बार एसोसिएशन के सभी सदस्यों ने एकजुट होकर इस पॉलिसी का विरोध करने और मांगों के पूरा होने तक आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया है। धरने के दौरान अधिवक्ताओं का आरोप है कि इस नीति से नए और युवा वकीलों के करियर के अवसर सीमित होंगे।

Lawyers Hunger Strike Karnal.

करनाल में LADCS पॉलिसी के विरोध में वकीलों ने की भूख हड़ताल।

  • Published: 29 Jul 2026, 03:59 PM IST
  • Last Updated: 29 Jul 2026, 03:59 PM IST

करनाल: हरियाणा के करनाल में लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम (LADCS) पॉलिसी के विरोध में बार एसोसिएशन का आंदोलन तेज हो गया है। मंगलवार को वर्क सस्पेंड करने के बाद बुधवार से वकीलों ने दो दिन की भूख हड़ताल शुरू कर दी। अधिवक्ताओं का कहना है कि जब तक सरकार इस पॉलिसी को वापस नहीं लेती, तब तक उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।

बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर भूख हड़ताल और वर्क सस्पेंड का कार्यक्रम आगे भी जारी रखा जाएगा।

सर्वसम्मति से पॉलिसी के विरोध का लिया गया फैसला
बार एसोसिएशन के अधिवक्ता विनोद शर्मा और अन्य वकीलों ने बताया कि सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से LADCS पॉलिसी का विरोध करने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि पिछले डेढ़ महीने से हरियाणा और पंजाब के वकील इस नीति के विरोध में आंदोलन कर रहे हैं, जिससे कई अदालतों का कामकाज भी प्रभावित हुआ है।

वकीलों ने न्याय व्यवस्था पर असर पड़ने की जताई आशंका
वकीलों का कहना है कि इस पॉलिसी के लागू होने से न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। उनका तर्क है कि यदि किसी पक्षकार का निजी वकील किसी कारणवश सुनवाई के दौरान उपस्थित नहीं हो पाता, तो अदालत LADCS के माध्यम से केस की पैरवी कराने का निर्देश दे सकती है। ऐसे में नए वकील के पास मामले से जुड़े दस्तावेज और पूरी जानकारी नहीं होगी, जिससे मुकदमे पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि यह पॉलिसी न्याय व्यवस्था के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। उनका कहना है कि इससे नए वकीलों के अवसर सीमित होंगे और कानूनी प्रक्रिया पर अनावश्यक नियंत्रण बढ़ेगा। वकीलों ने आशंका जताई कि इससे स्वतंत्र और निष्पक्ष कानूनी व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

पॉलिसी पर पुनर्विचार करने की सरकार और न्यायपालिका से मांग
बार एसोसिएशन ने सरकार और उच्च न्यायपालिका से LADCS पॉलिसी पर पुनर्विचार कर इसे वापस लेने की मांग की है। वकीलों का कहना है कि इस फैसले से न केवल अधिवक्ताओं बल्कि न्याय पाने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

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