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Kajri Teej 2026: 30 अगस्त या 31 अगस्त? कजरी तीज के व्रत को लेकर उलझन में हैं तो यहां जानें कौन-सी तारीख है सही

August 28, 2026

Kajri Teej 2026: हिंदू धर्म में तीज के व्रत का खास धार्मिक महत्व माना जाता है। कजरी तीज (Kajri Teej 2026) भी प्रमुख तीजों में शामिल हैं। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से व्रत रखती हैं। महिलाएं पूरे दिन उपवास करने के साथ भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं। इस अवसर पर सोलह श्रृंगार करने और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करने की परंपरा भी है।

30 या 31 अगस्त, कब है कजरी तीज?

इस साल कजरी तीज की तारीख को लेकर लोगों के बीच असमंजस बना हुआ है। इसकी वजह तृतीया तिथि का दो तारीखों में पड़ना है। पंचांग के अनुसार, भाद्रपद कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि 30 अगस्त 2026 को सुबह 09:38 बजे शुरू होगी और 31 अगस्त को सुबह 08:52 बजे समाप्त होगी। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार कजरी तीज का व्रत 31 अगस्त 2026 को रखा जाएगा।

कजरी तीज 2026 के शुभ मुहूर्त

कजरी तीज के दिन पूजा (Kajri Teej 2026) और धार्मिक कार्यों के लिए कुछ खास समय बताए गए हैं। तृतीया तिथि 30 अगस्त की सुबह 09:38 बजे शुरू होगी, जबकि इसका समापन 31 अगस्त की सुबह 08:52 बजे होगा। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:29 बजे से 05:14 बजे तक रहेगा। वहीं, पूजा के लिए शुभ समय शाम 06:44 बजे से रात 07:51 बजे तक बताया गया है।

पति की लंबी उम्र के लिए रखा जाता है व्रत

कजरी तीज का व्रत खासतौर पर विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु और दांपत्य जीवन में सुख-शांति की कामना से करती हैं। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। इसलिए कजरी तीज को पति-पत्नी के रिश्ते और वैवाहिक सुख से जोड़कर देखा जाता है।

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नीमड़ी माता की पूजा का महत्व

कजरी तीज पर नीमड़ी माता की पूजा करने की भी परंपरा है। पूजा के लिए नीम की टहनी को दीवार या थाली में स्थापित किया जाता है। इसके बाद रोली, अक्षत, फूल और अन्य पूजन सामग्री चढ़ाकर विधि-विधान से पूजा की जाती है। महिलाएं परिवार की खुशहाली, सुख-समृद्धि और पति की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करती हैं।

चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण

कजरी तीज का व्रत (Kajri Teej 2026) रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद पूरा करने की परंपरा है। महिलाएं पूजा के बाद चंद्रमा को जल अर्पित करती हैं और अपने पति के अच्छे स्वास्थ्य व लंबी उम्र की कामना करती हैं। चंद्र दर्शन और अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण किया जाता है।

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