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'वही रहेंगे या मैं ही रहूंगा', JU पर आगबबूला शुभेंदु अधिकारी बोले- इनको JNU की तरह ठीक कर दो

August 29, 2026

बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी ने आजादी के नारे लगाने वालों पर भड़कते हुए कहा कि अब वही रहेंगे या मैं ही रहूंगा। उन्होंने एबीवीपी के छात्रों से कहा कि उन्हें जेएनयू की तरह राष्ट्रवाद का पाठ पढ़ाया जाए।

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को 'आजादी' के नारे लगाने वालों पर निशाना साधते हुए कहा कि अब वही रहेंगे या मैं ही रहूंगा। रक्षाबंधन पर शुभेंदु अधिकारी के कार्यक्रम की वजह से जादवपुर पुलिस स्टेशन से सुलेखा तक की सड़क पूरी तरह से जाम रही। जादवपुर विश्वविद्यालय की दीवारों पर 2011 में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए माओवादी नेता किशनजी के सम्मान में भित्तिचित्र 'लाल सलाम किशनजी' पर सवाल उठाया।

एबीवीपी से बोले, इन्हें सबक सिखाओ

शुभेंदु अधिकारी का कार्यक्रम जादवपुर विश्वविद्यालय के गेट नंबर 2 के पास था। लगभग एक सप्ताह पहले ही विश्वविद्यालय में एबीवीपी के छात्रों ने तोड़फोड़ की थी। अधिकारी ने कहा कि कुछ लोगों का कहना है कि यह सब करने वाले शुभेंदु अधिकारी के लोग थे। यह केवल हमें बदनाम करने की एक साजिश है। उन्होंने एबीवीपी के छात्रों से कहा कि जिस तरह से जेएनयू में राष्ट्रवाद का सबक सिखाया गया है वैसे ही यहां भी सिखाने की जरूरत है।

सीएम अधिकारी ने कहा, वे कोई भी हों। हमसे छिप नहीं पाएंगे। अब या तो वे ही रहेंगे या हम ही रहेंगे। हमारे बीच में कुछ भी नहीं बचेगा। उन्होंने कहा, ये सब ढीठ लोग हैं। आपको कौन सी आजादी चाहिए। गांजा पीने की आजादी या फिर कैंपस में ड्रग्स लेने की आजादी। तुम कश्मीर में आजादी के लिए चिल्लाते हो। आखिर इन टुकड़े टुकड़े गैंग के लोगों को कौन सी आजादी चाहिए। अधिकारी ने जादवपुर यूनिवर्सिटी के शिक्षकों को भी चेतावनी देते हुए कहा कि उनपर भी नजर रखी जा रही है।

कचरे की तरह साफ कर देना चाहिए

उन्होंने देश को भीतर से बांटने की साजिश करने वालों पर भी निशाना साधा और कहा कि ऐसे तत्वों को "घर के कचरे की तरह साफ" कर देना चाहिए।

शुभेंदु ने कहा कि सशस्त्र बल भारत के बाहरी दुश्मनों से निपटेंगे, लेकिन देश के भीतर भी कुछ लोग इसके हितों के खिलाफ काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, ''देश के बाहर जो दुश्मन हैं, उन्हें हमारी ताकत दिखाई जा चुकी है और आगे भी दिखाई जाएगी, लेकिन हमें यह संकल्प भी लेना चाहिए कि जो देश के भीतर से देशभक्ति, राष्ट्रवाद, वंदे मातरम और जन गण मन पर हमला करते हैं, उन्हें घर के कचरे की तरह साफ कर देंगे।''

मुख्यमंत्री ने कहा कि 'आजादी' की मांग वाले नारे उन्हें पीड़ा देते हैं और उन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में दिए गए बलिदानों पर जोर दिया। उन्होंने कहा, ''जब मैं कोलकाता की सड़कों पर 'आजादी' के नारे देखता हूं तो मुझे पीड़ा होती है। यह आजादी किसलिए है? हमें अपने स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान, नेताजी के संघर्ष और मातंगिनी हाजरा के बलिदान को याद करना चाहिए। भारत 1947 में आजाद हुआ।''

दीवारों पर लिखे नारों पर उठाए सवाल

अधिकारी ने विशेष रूप से यादवपुर विश्वविद्यालय का जिक्र करते हुए सवाल किया कि वहां और कोलकाता की सड़कों पर कश्मीर से जुड़े नारे क्यों लगाए जा रहे हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय के कला विभाग की दीवारों पर 'लाल सलाम किशनजी' भित्तिचित्र पर भी सवाल उठाया। शुभेंदु ने पिछले सप्ताह विश्वविद्यालय में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा, ''यादवपुर विश्वविद्यालय उत्कृष्टता का केंद्र है। कश्मीर को लेकर पाकिस्तान के साथ हमारे कई युद्ध और बहुत संघर्ष हुए हैं। फिर कोलकाता की सड़कों पर 'कश्मीर मांगे आजादी' क्यों लिखा जाएगा? यह पीड़ादायक है।''

उन्होंने कहा, ''जादवपुर की दीवारों पर 'लाल सलाम किशनजी' लिखा देखकर मुझे दुख होता है। आप नयी पीढ़ी को क्या सिखा रहे हैं? यह किशनजी कौन है? वही व्यक्ति जिसने देश के विभाजन की मांग की थी। किशनजी, जिसने संविधान को स्वीकार नहीं किया।'' किशनजी के नाम से चर्चित कोटेश्वर राव वरिष्ठ माओवादी नेता था। नवंबर 2011 में पुलिस के साथ मुठभेड़ में उसकी मौत हो गई थी। यह घटना पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के कुछ महीने बाद हुई थी।

मुख्यमंत्री ने गुरुवार को एक कार्यक्रम में कहा था, "इंकलाब जिंदाबाद कहिए, लेकिन अगर आजादी कहेंगे तो मामला दर्ज होगा। अगर 'कश्मीर मांगे आजादी' कहेंगे तो गिरफ्तारी होगी।'' उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि विपक्ष 'वंदे मातरम' के पूर्ण संस्करण का विरोध क्यों कर रहा है। उन्होंने कहा, ''वंदे मातरम किसी राजनीतिक नेता ने नहीं लिखा था। इसे बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने लिखा था। इसमें आपत्ति क्या है?'' मुख्यमंत्री ने बंगाल की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का भी उल्लेख किया और श्री चैतन्य, रामकृष्ण परमहंस तथा रानी रासमणि का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उस संस्कृति को बहाल करने का प्रयास कर रही है, जिसे बंगाल ने खो दिया है। शुभेंदु ने यह भी घोषणा की कि पश्चिम बंगाल के सभी स्कूल और कॉलेज में राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) शुरू करने के प्रयास किए जा रहे हैं।