Jharkhand News : रांची में मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में हुई महत्वपूर्ण बैठक, HEC की वर्तमान स्थिति, कर्मचारियों के भविष्य और औद्योगिक पुनर्जीवन को लेकर केंद्र और राज्य के बीच विस्तृत चर्चा।
Jharkhand News : मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने HEC रांची के पुनरुद्धार के लिए गठित 6 सदस्यीय केंद्रीय संसदीय उप-समिति से मुलाकात की। बैठक में HEC की वर्तमान स्थिति, कर्मचारियों, उत्पादन क्षमता और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा हुई।
झारखंड की औद्योगिक पहचान माने जाने वाले हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (HEC), रांची के पुनरुद्धार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल देखने को मिली। शुक्रवार को मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन से रांची स्थित कांके रोड के मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में HEC के रिवाइवल के लिए गठित 6 सदस्यीय केंद्रीय संसदीय उप-समिति के प्रतिनिधिमंडल ने शिष्टाचार मुलाकात की।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री और समिति के सदस्यों ने HEC की वर्तमान आर्थिक एवं प्रशासनिक स्थिति, उत्पादन क्षमता, कर्मचारियों की चुनौतियों तथा भविष्य में संस्थान को पुनः देश के प्रमुख भारी उद्योग के रूप में स्थापित करने की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की। इस बैठक को झारखंड के औद्योगिक विकास के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

बैठक में HEC की मौजूदा परिस्थितियों की गहन समीक्षा की गई। वर्षों से वित्तीय संकट, उत्पादन में गिरावट, कर्मचारियों के वेतन संबंधी समस्याएं और आधुनिक तकनीक की कमी जैसे मुद्दों ने इस सार्वजनिक क्षेत्र के प्रतिष्ठान को प्रभावित किया है।
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने प्रतिनिधिमंडल के साथ चर्चा करते हुए HEC के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित किया और कहा कि यह संस्थान केवल रांची ही नहीं, बल्कि पूरे झारखंड की औद्योगिक विरासत का प्रतीक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि HEC का पुनर्जीवन राज्य के हजारों परिवारों और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि HEC के पुनरुद्धार के लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। संसदीय उप-समिति के सदस्यों ने विभिन्न पहलुओं पर सुझाव साझा किए, जिनमें उत्पादन इकाइयों का आधुनिकीकरण, नई औद्योगिक परियोजनाओं से जोड़ना, भूमि और परिसंपत्तियों के बेहतर उपयोग तथा रोजगार सृजन की संभावनाएं शामिल रहीं।
मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की ओर से हर संभव सहयोग का आश्वासन देते हुए कहा कि यदि केंद्र और राज्य मिलकर योजनाबद्ध तरीके से कार्य करें, तो HEC को फिर से देश की अग्रणी इंजीनियरिंग कंपनी बनाया जा सकता है।

रांची स्थित HEC की स्थापना भारत के भारी उद्योग क्षेत्र को मजबूत बनाने के उद्देश्य से की गई थी। इस संस्थान ने देश के इस्पात संयंत्रों, ऊर्जा परियोजनाओं, रक्षा क्षेत्र और अंतरिक्ष कार्यक्रमों के लिए महत्वपूर्ण मशीनरी और उपकरणों का निर्माण किया है।
एक समय HEC को भारत का “टेम्पल ऑफ हेवी इंजीनियरिंग” कहा जाता था। यहां हजारों इंजीनियर, तकनीशियन और श्रमिक कार्यरत थे। लेकिन पिछले कई वर्षों में वित्तीय संकट और घटते ऑर्डरों के कारण संस्थान की स्थिति कमजोर होती चली गई।
इसी कारण HEC के पुनरुद्धार को केवल एक औद्योगिक परियोजना नहीं, बल्कि झारखंड के आर्थिक पुनर्जीवन की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में केंद्रीय संसदीय उप-समिति के प्रमुख सदस्य शामिल थे।
उपस्थित प्रमुख जनप्रतिनिधि:
- मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन
- सांसद विजय हांसदा
- केंद्रीय संसदीय उप-समिति के अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद तिरुची शिवा
- राज्यसभा सांसद सुलता देव
- सांसद कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी
- सांसद हँसमुखभाई सोमाभाई पटेल
- सांसद चंदन चौहान
इन सभी सदस्यों ने HEC के पुनरुद्धार से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने सुझाव और विचार साझा किए।

HEC से जुड़े कर्मचारियों और पूर्व कर्मचारियों के बीच इस बैठक को लेकर सकारात्मक माहौल देखा जा रहा है। लंबे समय से वेतन, पेंशन और नियमित उत्पादन शुरू होने की मांग उठती रही है। ऐसे में संसदीय समिति और मुख्यमंत्री के बीच हुई यह बैठक कर्मचारियों के लिए नई उम्मीद लेकर आई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि HEC को आधुनिक तकनीक, नए निवेश और दीर्घकालिक औद्योगिक नीति से जोड़ा जाए, तो यह न केवल हजारों प्रत्यक्ष रोजगार पैदा कर सकता है बल्कि आसपास के छोटे और मध्यम उद्योगों को भी गति देगा।
बैठक में भविष्य की कार्ययोजना को लेकर कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा हुई। इनमें प्रमुख रूप से शामिल रहे:
- HEC की वित्तीय स्थिति का मूल्यांकन
- उत्पादन क्षमता बढ़ाने की रणनीति
- आधुनिक मशीनरी और तकनीकी उन्नयन
- केंद्र एवं राज्य के संयुक्त सहयोग की रूपरेखा
- औद्योगिक निवेश आकर्षित करने की संभावनाएं
- रोजगार और कौशल विकास को बढ़ावा
हालांकि बैठक के बाद किसी औपचारिक निर्णय या वित्तीय पैकेज की घोषणा नहीं की गई, लेकिन दोनों पक्षों ने HEC के पुनर्जीवन के लिए निरंतर संवाद बनाए रखने पर सहमति जताई।
HEC का पुनरुद्धार केवल एक कंपनी को बचाने का प्रयास नहीं है, बल्कि यह झारखंड की औद्योगिक पहचान को फिर से मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। यदि प्रस्तावित योजनाएं धरातल पर उतरती हैं, तो रांची एक बार फिर भारी इंजीनियरिंग और विनिर्माण क्षेत्र का प्रमुख केंद्र बन सकता है।
राज्य सरकार की मंशा है कि स्थानीय युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर मिलें और सार्वजनिक क्षेत्र के इस ऐतिहासिक संस्थान को नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ाया जाए। वहीं केंद्रीय संसदीय उप-समिति की सक्रिय भागीदारी से यह उम्मीद भी बढ़ी है कि HEC के पुनरुद्धार की प्रक्रिया को गति मिलेगी।
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन और केंद्रीय संसदीय उप-समिति के बीच हुई यह बैठक HEC रांची के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और सार्वजनिक क्षेत्र के इस प्रतिष्ठित संस्थान को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से केंद्र और राज्य के बीच सहयोग का यह प्रयास झारखंड की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकता है। आने वाले समय में समिति की सिफारिशों और सरकार की कार्ययोजना पर सभी की नजर रहेगी।