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'अमित शाह के सामने क्यों नहीं बोला FREEZE', परिसीमन पर तमिलनाडु विधानसभा में DMK और TVK नेताओं में तीखी बहस - tn delimitation debate dmk vs tvk on cm vijays stance

August 21, 2026

तमिलनाडु विधानसभा में परिसीमन प्रक्रिया को लेकर DMK और सत्तारूढ़ TVK के बीच तीखी बहस हुई, जिसमें उदयनिधि स्टालिन ने मुख्यमंत्री विजय के रुख पर सवाल उठाया।

परिसीमन पर तमिलनाडु विधानसभा में DMK और TVK नेताओं में तीखी बहस(फोटो: पीटीआई )

परिसीमन पर तमिलनाडु विधानसभा में DMK और TVK नेताओं में तीखी बहस(फोटो: पीटीआई )

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संक्षेप में पढ़ें

डिजिटल डेस्क, चेन्नई। तमिलनाडु विधानसभा में शुक्रवार को आगामी परिसीमन प्रक्रिया को लेकर राज्य के आधिकारिक रुख पर विपक्षी डीएमके और सत्तारूढ़ टीवीके के बीच तीखी बहस देखने को मिली। नेता प्रतिपक्ष उदयनिधि स्टालिन ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के रुख पर सवाल उठाया।

उन्होंने ध्यान दिलाया कि जहां राज्य विधानसभा ने लोकसभा सीटों की संख्या को 543 पर फ्रीज करने का प्रस्ताव पारित किया था, वहीं मुख्यमंत्री ने कल आयोजित जोनल बैठक के दौरान इस विशिष्ट शब्द को छोड़ दिया।

फ्रीज शब्द के इस्तेमाल पर उदयनिधि का सवाल

उदयनिधि ने राज्य की मांग को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए कहा कि टीवीके सरकार ने इस सदन में कुल लोकसभा सीटों को 543 पर फ्रीज करने का प्रस्ताव पारित किया था, लेकिन मुख्यमंत्री विजय ने दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में फ्रीज शब्द का इस्तेमाल नहीं किया।

सरकार के रुख का बचाव करते हुए मंत्री आधव अर्जुन ने जोर देकर कहा कि सरकार का रुख अटूट बना हुआ है। उन्होंने कहा कि परिसीमन के संबंध में हमारी सरकार के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है।

दोनों पक्षों द्वारा राज्य के हितों से समझौता करने के आरोप-प्रत्यारोप के साथ बहस तेज हो गई। उदयनिधि ने दोहराया कि डीएमके निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने, या कम से कम यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि तमिलनाडु का वर्तमान 7.18% प्रतिनिधित्व कम न हो।

मंत्री आधव अर्जुन ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि डीएमके ने ऐतिहासिक रूप से अपना रुख बदला है। अर्जुन ने टिप्पणी की कि यदि वे केवल निष्पक्ष परिसीमन की मांग करते हैं, तो यह तमिलनाडु के साथ विश्वासघात होगा। उन्होंने दावा किया कि डीएमके ने पहले 543 सीटों की सीमा पर जोर नहीं दिया था।

मंत्री ने स्पष्ट किया कि कोई परिसीमन नहीं, यही हमारा रुख है। हम सभी राज्यों में 50% वृद्धि का भी विरोध कर रहे हैं। हम चाहते हैं कि संसदीय सीटों में तमिलनाडु की मौजूदा 7.18% हिस्सेदारी बरकरार रखी जाए।

एआईएडीएमके और बीजेपी का रुख

इस मुद्दे पर बोलते हुए एआईएडीएमके प्रमुख एडप्पादी पलानीस्वामी ने भी मांग की कि परिसीमन प्रक्रिया के बाद तमिलनाडु को 7.18 प्रतिशत सीटों का उसका हिस्सा मिलना चाहिए।

दूसरी ओर, बीजेपी विधायक भोला राजन ने जोर देकर कहा कि परिसीमन राज्य के लिए अच्छा होगा क्योंकि तमिलनाडु की हिस्सेदारी मौजूदा 7.18% से बढ़ेगी।

मुख्यमंत्री विजय की केंद्र सरकार से अपील

यह वाकयुद्ध तब सामने आया जब गुरुवार को मुख्यमंत्री विजय ने केंद्र सरकार से यह स्पष्ट आश्वासन देने का आग्रह किया कि प्रस्तावित परिसीमन विधेयक, 2026 के परिणामस्वरूप किसी भी राज्य का संसदीय प्रतिनिधित्व कम नहीं होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि जनसंख्या-आधारित परिसीमन दक्षिणी राज्यों को असमान रूप से प्रभावित कर सकता है।

दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक को संबोधित करते हुए विजय ने कहा कि जैसे-जैसे 1971 की जनगणना के आधार पर लोकसभा सीटों के आवंटन पर लगी रोक अपने अंत के करीब पहुंच रही है और परिसीमन विधेयक, 2026 पर विचार किया जा रहा है, दक्षिणी राज्यों में यह वास्तविक चिंता है कि मुख्य रूप से जनसंख्या पर आधारित परिसीमन संसद में हमारी सामूहिक आवाज को कम कर सकता है।

उन्होंने तर्क दिया कि दक्षिणी राज्यों को अपनी जनसंख्या को स्थिर करने की उपलब्धियों के लिए दंडित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि इसलिए, मैं केंद्र सरकार से एक स्पष्ट विधायी आश्वासन प्रदान करने का आग्रह करता हूं कि जनसंख्या स्थिरीकरण में सफलता के कारण किसी भी राज्य का संसद में प्रतिनिधित्व प्रतिशत कम नहीं होगा। ऐसा दृष्टिकोण समता के सिद्धांतों को बनाए रखेगा और हमारे संविधान द्वारा परिकल्पित संघीय संतुलन को मजबूत करेगा।