Published: Friday, September 25, 2026, 19:30 [IST]
Jantar Mantar Ground Report: SIR यानी वोटर लिस्ट के Special Intensive Revision को लेकर चल रहा विवाद शुक्रवार (25 सितंबर) को दिल्ली की सड़कों पर नजर आया। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और गिरफ्तारी की मांग को लेकर जंतर-मंतर के पास पटेल चौक पर प्रदर्शन हुआ। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई जगह धक्का-मुक्की और खींचतान की स्थिति बनी। कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।
Oneindia Hindi ने जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में मौके पर पहुंचकर पूरे घटनाक्रम को देखा। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए कई स्तरों पर बैरिकेड लगाए गए थे। पुलिस की भारी तैनाती के बीच प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच तनाव नजर आया। आइए जानते हैं वनइंडिया के कैमरे ने क्या-क्या देखा....
ECI की ओर बढ़ रहे छात्रों को रोका गया
प्रदर्शन में छात्र संगठनों के कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में पहुंचे। प्रदर्शनकारियों की रणनीति अलग-अलग रास्तों से पहुंचने की थी। कुछ छात्र मेट्रो के रास्ते जंतर-मंतर और निर्वाचन आयोग की ओर बढ़े। पुलिस ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया। इसके बाद कुछ जगहों पर पुलिस और छात्रों के बीच खींचतान हुई। पुलिस प्रदर्शनकारियों को बसों में ठूंसकर हिरासत में लेने के दौरान सड़क पर घसीटती नजर आई।

आंदोलन से जुड़े लोगों ने पुलिस कार्रवाई पर आपत्ति जताई और आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के साथ बल प्रयोग किया गया। दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं थी और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की गई।
DUSU कैंडिडेट अनन्या रतूड़ी को सड़क पर घसीटा गया

प्रदर्शन के दौरान DUSU से जुड़ी छात्र नेता अनन्या रतूड़ी को पुलिस ने हिरासत में लिया। प्रदर्शनकारियों की ओर से आरोप लगाया गया कि पुलिस ने रतूड़ी को सड़क पर घसीटा और फिर बस में बैठाकर ले गई। इस घटनाक्रम से जुड़े वीडियो और मौके के विजुअल्स में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच खींचतान दिखाई दी।
जंतर-मंतर पर भारी बैरिकेडिंग

जंतर-मंतर को प्रदर्शन के लिए पूरी तरह सुरक्षा घेरे में रखा गया था। सड़क के अलग-अलग हिस्सों में बैरिकेड की कई परतें लगाई गई थीं। कुछ स्थानों पर बसों को भी रास्ता रोकने के लिए खड़ा किया गया। मौके पर दिल्ली पुलिस के अलावा महिला रैपिड एक्शन फोर्स की तैनाती भी दिखाई दी। पुलिस लगातार लाउडस्पीकर से प्रदर्शनकारियों को पीछे हटने के लिए कह रही थी। प्रशासन की ओर से कहा जा रहा था कि प्रदर्शन की अनुमति नहीं है और धारा 163 लागू प्रतिबंधों का पालन किया जाए।

'ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो', 'गिरफ्तार करो' के नारे
जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के हाथों में अलग-अलग पोस्टर और बैनर नजर आए। इनमें 'ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो' और 'ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार करो' जैसे नारे लिखे थे। AISA की ओर से आयोजित प्रदर्शन में छात्र कार्यकर्ताओं के साथ सामाजिक कार्यकर्ता और विपक्षी दलों से जुड़े नेता भी पहुंचे।
जंतर-मंतर से पहले ही रोकने की कोशिश
प्रदर्शनकारियों का एक समूह निर्वाचन भवन की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहा था। पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोक दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर बसों में बैठाया गया। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शन के लिए निर्धारित अनुमति नहीं ली गई थी। इसी आधार पर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका।

क्या है SIR विवाद? चुनाव आयोग के अंदर भी उठे सवाल
SIR विवाद उस रिपोर्ट के बाद और तेज हुआ, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के कुछ फैसलों पर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्ति दर्ज की।
रिपोर्ट के मुताबिक, उनकी आपत्तियों में नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने और बहाल करने व चुनावी डेटा तक पहुंच जैसे मुद्दे शामिल थे। दोनों आयुक्तों ने कुछ फैसलों को अपने रिकॉर्डेड नोट्स में 'अनधिकृत' और 'अवैध' बताया था। इन दावों के जवाब में चुनाव आयोग का पक्ष यह रहा है कि आयोग के भीतर अलग-अलग राय संस्थागत विचार-विमर्श का हिस्सा हो सकती हैं और उसके निर्णय प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं।
'अंदर की आपत्ति' से सड़क के आंदोलन तक
SIR को लेकर विवाद अब सिर्फ चुनाव आयोग की प्रक्रिया और आंतरिक फैसलों तक सीमित नहीं रहा। शुक्रवार को जंतर-मंतर पर हुई पुलिस कार्रवाई ने इसे सड़क के आंदोलन का रूप दे दिया। एक तरफ प्रदर्शनकारी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे, दूसरी तरफ पुलिस का कहना था कि बिना अनुमति प्रदर्शन की स्थिति में कानून-व्यवस्था बनाए रखना जरूरी था।