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सिर पर आ गई ITR की लास्ट डेट, बिना सीए के भी भर सकते हैं रिटर्न बशर्ते…

July 27, 2026

Jul 27, 2026 11:57 am ISTलाइव हिन्दुस्तान

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मुख्य बातें

  • ITR Filing 2026: AIS पर पूरा भरोसा न करें, अपने रिकॉर्ड से मिलाएं और दावों के प्रमाण रखें
  • बैंक ब्याज, FD ब्याज सहित सभी इनकम दिखाएं, चाहे AIS में न हो
  • यदि भारतीय नागरिक हैं और भारत से आय 15 लाख से अधिक है, तो DTAA लाभों का मूल्यांकन करें
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सिर पर आ गई ITR की लास्ट डेट, बिना सीए के भी भर सकते हैं रिटर्न

31 जुलाई 2026 आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने की अंतिम तारीख है। यह डेडलाइन सिर पर आ गई है। सीए के यहां भीड़ है और समय रिटर्न फाइल करना भी जरूरी है। घबराएं नहीं। कुछ बातों का ध्यान रखें और खुद फाइल करें। आइए जानें कैसे...

जिन टैक्सपेयर्स की इनकम सैलरी या कैपिटल गेन से है तो जल्दबाजी में गलती न करें। टैक्स एक्सपर्ट्स के अनुसार, कई कम समझे जाने वाले पहलू, जैसे AIS में मिलान न होना, F&O में गलत रिपोर्टिंग, और विदेशी संपत्तियों का खुलासा न करना आपको नोटिस, अतिरिक्त टैक्स लगवा सकता है या लाभ से वंचित कर सकते हैं। इसलिए ‘सबमिट’ क्लिक करने से पहले इन चीजों की अंतिम जांच जरूर करें।

सबसे पहले डेडलाइन जान लें

  • मेन लास्ट डेट: 31 जुलाई 2026
  • विलंबित रिटर्न : 31 दिसंबर 2026
  • संशोधित रिटर्न (रिवाइज्ड): 31 मार्च 2027
  • अगर आप F&O या इंट्राडे ट्रेडिंग से इनकम रखते हैं, तो आपके लिए तारीख 31 अगस्त है।

बिलेटेड यानी विलंबित रिटर्न दाखिल करने के नुकसान

  • 5,000 रुपये (अगर इनकम 5 लाख से कम तो 1,000 रुपये) का लेट फीस।
  • ओल्ड रिजीम का विकल्प नहीं मिलेगा।
  • व्यापार या कैपिटल लॉस को आगे नहीं ले जा सकते।
  • बकाया टैक्स पर ब्याज भी देना पड़ सकता है।

जरूरी नहीं कि AIS में दी गई जानकारी हमेशा सही हो

वर्ष 2021 से AIS की भूमिका बढ़ी है। यह आपके वित्तीय लेन–देन और कटे हुए कर का रिकॉर्ड है, लेकिन यह जरूरी नहीं कि AIS में दी गई जानकारी हमेशा सही हो। कई बार लेन–देन गलत कैटेगरी, डबल या गलत अवधि में दिख सकते हैं। इसलिए AIS को अपने रिकॉर्ड से मिलाएं, पर अगर मेल न खाए तो AIS को अंतिम न मानें। कर की गणना आयकर अधिनियम के नियमों से होती है, न कि AIS से। करदाता की स्वयं जिम्मेदारी है कि वह सही आय दिखाए।

आम गलतियां

  • बैंक ब्याज, FD ब्याज अक्सर AIS में नहीं आते या गलत आते हैं। कई लोग सोचते हैं कि अगर AIS में नहीं है तो दिखाना नहीं, जो गलत है।
  • म्यूचुअल फंड के लेन–देन ब्रोकर और RTA (CAMS/KFin) दोनों से दो बार आ सकते हैं। आप अपने बैंक स्टेटमेंट, म्यूचुअल फंड स्टेटमेंट, फॉर्म 26A से मिलान करें। म्यूचुअल फंड के लिए CAMS/KFin की कैपिटल गेन स्टेटमेंट पर भरोसा करें।
  • ज्वाइंट प्रॉपर्टी के मामले में AIS गलत पार्टी काउंट या पूरी राशि एक मालिक को दिखा सकता है।
  • उदाहरण: 40 लाख की संपत्ति दो मालिकों की है, पर AIS एक को पूरी राशि दिखाए। तो AIS में फीडबैक देकर दूसरे PAN और हिस्सेदारी की जानकारी दें, इससे नोटिस से बचें।
  • कुछ मामलों में अलिस्टेड शेयरों पर कैपिटल गेन पर 15% की सरचार्ज सीमा के बजाय अधिक सरचार्ज लग जाता है।
  • बायबैक को गलत इनकम हेड में दिखाना भी समस्या है। पोर्टल पर आप संख्या तो सुधार सकते हैं, पर हेड नहीं।
  • कोई भी अंतर दिखे तो पोर्टल पर फीडबैक विकल्प का उपयोग करें।

NRI और डीम्ड रेजीडेंसी

2020 में डीम्ड रेजिडेंट का नियम आया। यदि कोई भारतीय नागरिक विदेश में रहता है, उसकी भारत से आय 15 लाख से अधिक है, और वह किसी अन्य देश में कर नहीं चुकाता, तो वह भारत में निवासी माना जा सकता है, लेकिन DTAA की टाई–ब्रेकर नियम से यह तय होता है कि वह किस देश का निवासी है।

उदाहरण: UAE में रहने वाला व्यक्ति, जहां कोई पर्सनल टैक्स नहीं है, वह DTAA के तहत UAE का निवासी माना जा सकता है, और भारत में NRI ही रहेगा, जिससे म्यूचुअल फंड लाभ पर छूट मिल सकती है।

F&O और इंट्राडे ट्रेडिंग

यदि आपने F&O या इंट्राडे किया है, तो उसे कैपिटल गेन न समझें, बल्कि बिजनेस इनकम मानें। इस गलत वर्गीकरण से आप ITR-2 भरेंगे जबकि सही फॉर्म ITR-3 है। अगर ITR-3 लागू होता है तो आपकी तारीख 31 अगस्त है।

विदेशी संपत्ति की जानकारी

आयकर विभाग ने विदेशी संपत्तियों और आय की जानकारी (वर्ष 2022-24 की) AIS में डाली है। यह चालू वर्ष (AY 2026-27) के लिए न होकर भी उपयोगी है। अगर आपको कोई पुराना निष्क्रिय खाता या विदेशी संपत्ति जो पहले नहीं दिखाई, तो इस बार दिखा दें।

GIFT City के माध्यम से विदेशी फंड में निवेश पर स्पष्टता नहीं है। FEMA के अनुसार यह विदेशी माना जाता है, पर आयकर अधिनियम के तहत अस्पष्ट है, इसलिए सावधानी बरतें।

अगर लास्ट डेट निकल जाए तो क्या करें

अगर लास्ट डेट निकल जाए तो 31 दिसंबर तक विलंबित रिटर्न भर सकते हैं, पर पुरानी व्यवस्था नहीं मिलेगी, नुकसान आगे नहीं बढ़ सकेंगे और शुल्क व ब्याज देना होगा। अगर गलती हो तो 31 मार्च 2027 तक संशोधित रिटर्न भर सकते हैं। उसके बाद भी ITR-U (अपडेटेड रिटर्न) का विकल्प है, जिसमें अतिरिक्त कर देना होगा।

अंत में, रिटर्न जमा करने के बाद उसे वेरिफाई) करना न भूलें। इसे आधार OTP, नेट बैंकिंग आदि से कर सकते हैं।

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें