business-finance

IPO मार्केट में रिकॉर्ड ₹4.67 लाख करोड़ का महाकुंभ! निवेशकों पर होगी पैसों की बरसात

September 7, 2026

भारत का प्राइमरी मार्केट एक मजबूत दौर में प्रवेश कर रहा है, जिसमें कई कंपनियां निवेशकों को आकर्षित करने की तैयारी कर रही हैं और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और जियो प्लेटफॉर्म्स जैसी बड़ी कंपनियां अपने पब्लिक-मार्केट डेब्यू के करीब पहुंच रही हैं. प्राइम डेटाबेस के आंकड़ों से पता चलता है कि 158 कंपनियों को इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के जरिए 2,96,258 करोड़ रुपए जुटाने के लिए सेबी (Sebi) से मंजूरी मिल गई है, जबकि 72 अन्य कंपनियों ने 1,70,680 करोड़ रुपए जुटाने के लिए ड्राफ्ट पेपर दाखिल किए हैं.

इन दोनों कैटेगरीज को मिलाकर कुल 4,66,938 करोड़ रुपए (यानी लगभग ₹4.67 लाख करोड़) का संभावित IPO पाइपलाइन बनता है. पाइपलाइन में शामिल प्रमुख कंपनियों में NSE, जियो प्लेटफॉर्म्स, जेप्टो (Zepto), हीरो फिनकॉर्प (Hero FinCorp), केंट RO सिस्टम्स (Kent RO Systems), अवाडा इलेक्ट्रो (Avaada Electro), ओरावेल स्टेज (Oravel Stays), फोनपे (PhonePe) और कल्ट.फिट (Cult.fit) शामिल हैं.

एनएसई और जियो को मंजूरी

रेगुलेटर की वेबसाइट के अनुसार, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का लंबे समय से प्रतीक्षित IPO, जिससे लगभग 30,000 करोड़ रुपए जुटाने की उम्मीद है, एक कदम और करीब आ गया है. सेबी ने शुक्रवार को एक्सचेंज के ड्राफ्ट ऑफर प्लान को मंजूरी दे दी है. यह मंजूरी भारत के सबसे ज्यादा चर्चित पब्लिक इश्यू में से एक के लिए एक बड़ा कदम है और ऐसे समय में आई है जब IPO मार्केट में सुस्त पहली छमाही के बाद तेजी से सुधार हुआ है.

रेग्युलेटर की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज की टेलीकॉम, डिजिटल और टेक्नोलॉजी कंपनी, जियो प्लेटफॉर्म्स (JPL) को भी अपना IPO लाने के लिए सेबी (Sebi) से मंजूरी मिल गई है. ईटी की रिपोर्ट के अनुसार जियो प्लेटफॉर्म्स अक्टूबर के आखिर या नवंबर की शुरुआत में अपना लगभग 4 अरब डॉलर का IPO लॉन्च कर सकती है — जो भारत का अब तक का सबसे बड़ा IPO होगा.

IPO की बढ़ती संख्या से यह सवाल उठता है कि क्या प्राइमरी मार्केट में नए IPO की बढ़ती सप्लाई से निवेशक सेकेंडरी मार्केट (जैसे सेंसेक्स और निफ्टी जैसे बेंचमार्क इंडेक्स) से अपना पैसा निकालकर दूसरी जगह लगा सकते हैं. हालांकि, मार्केट के जानकारों का मानना ​​है कि पैसे की यह मौजूदा आवाजाही इक्विटी से पूरी तरह हटकर कहीं और जाने के बजाय, बस पैसे को अलग-अलग जगहों पर फिर से लगाने (री-एलोकेशन) जैसा है.

किन कंपनियों को प्राथमिकता देंगे निवेशक

AlfAccurate Advisors के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर राजेश कोठारी ने ईटी की रिपोर्ट में कहा कि कहा कि IPO के लिए निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है, लेकिन वे अब ज्यादा सोच-समझकर निवेश कर रहे हैं. मार्केट में पैसा (लिक्विडिटी) तो है, लेकिन निवेशक अब सिर्फ हर नए IPO में पैसा लगाने के बजाय अच्छी क्वालिटी, ग्रोथ की संभावना और सही वैल्यूएशन वाली कंपनियों को ही प्राथमिकता देंगे. उन्होंने कहा कि सप्लाई बढ़ने के साथ, मार्केट में अच्छी और कमजोर कंपनियों के बीच फर्क करने की क्षमता और बेहतर होगी. कोठारी ने कहा कि वे इस बदलाव को “पूरी तरह से इक्विटी से हटकर कहीं और जाने (रोटेशन) के बजाय, पैसे को अलग-अलग जगहों पर फिर से लगाने (री-एलोकेशन)” जैसा मानते हैं. उन्होंने कहा कि निवेशक जरूरी नहीं कि बेंचमार्क से दूर जा रहे हों, लेकिन IPO अब ‘अल्फा’ (मार्केट से ज़्यादा रिटर्न) कमाने का एक अहम जरिया बनते जा रहे हैं.

वैल्यूएशन सबसे अहम पैमाना होगा

कोठारी ने कहा कि घरेलू स्तर पर पैसे की अच्छी उपलब्धता (लिक्विडिटी) और निवेशकों की बढ़ती भागीदारी से प्राइमरी मार्केट में निवेश के लिए काफ़ी पैसा आ रहा है. उनके मुताबिक, प्राइमरी मार्केट में हलचल बनी रहनी चाहिए, लेकिन वैल्यूएशन सबसे अहम पैमाना होगा. आगे का रास्ता IPO की क्वालिटी, कंपनियों की कमाई, लिक्विडिटी और मार्केट के ओवरऑल मूड पर निर्भर करेगा. कोठारी ने कहा कि ब्याज दरों और FII फ्लो जैसे ग्लोबल फैक्टर भी अहम भूमिका निभाएंगे. आखिरकार, मुझे उम्मीद है कि मार्केट सिर्फ कहानी के दम पर आने वाले IPO के बजाय, सही वैल्यूएशन वाले अच्छे बिजनेस को ज्यादा पसंद करेगा.

QIBs व HNIs की मजबूत भागीदारी

मास्टरट्रस्ट के चीफ रिसर्च ऑफिसर रवि सिंह मीडिया रिपोर्ट में कहा कि भारत का प्राइमरी मार्केट एक मजबूत दौर में प्रवेश कर रहा है, जिसमें IPO की बड़ी पाइपलाइन और घरेलू स्तर पर अच्छी लिक्विडिटी है. उन्होंने कहा कि इन्वेस्टर्स के पास इस सप्लाई को खपाने के लिए लिक्विडिटी है, जिसे हर महीने 24,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के SIP इनफ्लो और QIBs व HNIs की मजबूत भागीदारी का समर्थन मिल रहा है. सिंह ने कहा कि कैपिटल की मौजूदा आवाजाही को सेकेंडरी मार्केट से बड़े पैमाने पर बाहर निकलने के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. निफ्टी मिडकैप 150 लगभग 29 P/E पर ट्रेड कर रहा है, जबकि स्मॉलकैप सेगमेंट 33 P/E के आसपास है. सिंह ने कहा कि इससे इन्वेस्टर्स उन मेनबोर्ड IPO पर ज़्यादा ध्यान देने के लिए प्रोत्साहित हो रहे हैं जो सही वैल्यूएशन और सुरक्षा का उचित मार्जिन (margin of safety) देते हैं.

सौरभ शर्मा

सौरभ शर्मा

15 साल से शेयर मार्केट, इकोनॉमी और कमोडिटी कवर कर रहे हैं. टीवी9 के साथ जुड़ने से पहले डीएनए, ए​शियानेट, जनसत्ता और राजस्थान पत्रिका जैसे कई बड़े संस्थानों के साथ भी जुड़े रहे.

Read More

google button