Sep 07, 2026 03:17 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान

सिमरनदीप कौन ने अपनी प्लानिंग में बदलाव करते हुए टॉपर्स की कॉपियों को देखा और यह समझने की कोशिश की कि बेहतर उत्तर किस तरह लिखा जाता है। इसके बाद उन्होंने अपनी गलतियों और कमियों को दूर किया।

आईएएस सिमरनदीप कौर की सक्सेस स्टोरी
कहते हैं कि सफलता की राह हमेशा आसान नहीं होती। कई बार मंजिल तक पहुंचने के लिए असफलताओं से गुजरना पड़ता है और लगातार खुद को बेहतर बनाना पड़ता है। पंजाब के पटियाला की रहने वाली सिमरनदीप कौर की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। किसान परिवार से आने वाली सिमरनदीप ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा में तीन असफलताओं के बाद हार नहीं मानी। चौथे प्रयास में उन्होंने देशभर में 15वीं रैंक हासिल कर IAS बनने का सपना पूरा किया। हालांकि यह राह बिल्कुल आसान नहीं थी। इसके लिए उन्होंने कई बार तैयारी की प्लानिंग में भी बदलाव किया। चलिए आज हम आपको उनकी सलफता का राज जानते हैंय़
कौन हैं सिमरनदीप कौर
सिमरनदीप कौर पटियाला के छोटे से गांव बिरारवाल की रहने वाली हैं। उनके पिता कुलदीप सिंह किसान हैं और मां अमनदीप कौर गृहिणी हैं। परिवार की आर्थिक सीमाओं के बावजूद उनके माता-पिता ने बेटी की पढ़ाई और UPSC की तैयारी में पूरा सहयोग किया। सिमरनदीप कौर की स्कूली पढ़ाई दयानंद पब्लिक स्कूल पंजाब से हुई है। इसके बाद उन्होंने खालसा कॉलेज पटियाला से ह्यूमैनिटीज में ग्रेजुएशन किया। ग्रेजुएशन की पढ़ाई के बाद सिमरनदीप ने पॉलिटिकल साइंस से पोस्ट ग्रेजुएशन किया और यूजीसी नेट भी क्वालिफाई किया। लेकिन उनका सपना था आईएएस बनना।
कैसे हुआ यूपीएससी की तरफ रुझान
दैनिक भास्कर में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, सिमरनदीप जब 12वीं कक्षा में मेडिकल स्ट्रीम से पढ़ाई कर रही थीं, उस दौरान उनके स्कूल में एक PCS अधिकारी मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे थे। अधिकारी का व्यक्तित्व, उनका रुतबा और समाज के लिए काम करने का नजरिया सिमरनदीप को काफी प्रभावित कर गया। इसी मुलाकात के बाद उन्होंने सिविल सेवा में जाने का लक्ष्य तय कर लिया।
तीन बार मिली असफलता, लेकिन नहीं मानी हार
UPSC की तैयारी के दौरान सिमरनदीप को लगातार तीन बार असफलता का सामना करना पड़ा। वह इन प्रयासों में प्रीलिम्स परीक्षा तो पास कर लेती थीं, लेकिन मेन्स में सफलता नहीं मिल पाती थी। तीन असफल प्रयासों के बाद उन्होंने अपनी तैयारी और खासकर उत्तर लिखने के तरीके पर गंभीरता से काम किया।
टॉपर्स के कॉपियों की नकल की
सिमरनदीप कौन ने अपनी प्लानिंग में बदलाव करते हुए टॉपर्स की कॉपियों को देखा और यह समझने की कोशिश की कि बेहतर उत्तर किस तरह लिखा जाता है। इसके बाद उन्होंने अपनी गलतियों और कमियों को दूर किया। उनकी यही बदली हुई रणनीति चौथे प्रयास में काम आई और उन्होंने ऑल इंडिया 15वीं रैंक हासिल कर ली।
बिना क्लासरूम कोचिंग के घर से की तैयारी
सिमरनदीप ने अपनी तैयारी में कंसिस्टेंसी यानी निरंतरता को सबसे ज्यादा महत्व दिया। उन्होंने बिना कोचिंग के घर से पढ़ाई की। रिपोर्ट्स के मुताबिक वो औसतन रोजाना 8 से 10 घंटे पढ़ाई करती थीं। हालांकि, उनका मानना है कि UPSC की तैयारी में केवल ज्यादा घंटे पढ़ना ही पर्याप्त नहीं है। लगातार पढ़ाई करना, पढ़े हुए विषयों का रिवीजन और अपनी गलतियों को सुधारना ज्यादा अहम है। ऐसे में उन्होंने हर टॉपिक के लिए दो पेज से ज्यादा के नोट्स नहीं बनाए और बार-बार रिवीजन पर जोर दिया।
प्रीलिम्स के लिए अपनाया थ्री-राउंड सिस्टम
सिमरनदीप की तैयारी की रणनीति में रिवीजन की अहम भूमिका रही। प्रीलिम्स की तैयारी के लिए उन्होंने थ्री-राउंड सिस्टम अपनाया। उनका फोकस ज्यादा से ज्यादा किताबें या स्टडी मैटेरियल इकट्ठा करने के बजाय उपलब्ध कंटेंट को बार-बार पढ़ने और मजबूत करने पर रहा। उनका ऑप्शनल विषय राजनीति विज्ञान और अंतर्राष्ट्रीय संबंध (PSIR) था। मेन्स में बेहतर प्रदर्शन के लिए उन्होंने खास तौर पर आंसर राइटिंग की कमियों को दूर किया और टॉपर्स की कॉपियों का एनालिसिस किया।
चौथे प्रयास में 14वीं रैंक की हासिल
आखिरकार, चौथे प्रयास में 15वीं रैंक हासिल कर सिमरनदीप ने साबित कर दिया कि असफलता मंजिल का अंत नहीं, बल्कि बेहतर तैयारी की शुरुआत हो सकती है। उनकी कहानी उन हजारों अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणा है जो UPSC जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं और शुरुआती असफलताओं से निराश हो जाते हैं।