
इलाहाबाद HC में पेश हुए यूपी के DGP राजीव कृष्णा
इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस समीर जैन की पीठ ने हाल ही में उत्तर प्रदेश के डीजीपी राजीव कृष्णा को तलब किया था और पूछा था कि पुलिस अधिकारी आखिर कोर्ट के आदेशों का पालन करने में आनाकानी क्यों करते हैं. कोर्ट ने डीजीपी से इसपर स्पष्टीकरण मांगा था. दरअसल, हाईकोर्ट ने ये चिंता जताई थी कि पुलिस अधिकारियों द्वारा नियमों का पालन न करने के कारण हत्या के मामलों में जमानत याचिकाएं काफी लंबे समय तक लंबित रहती हैं. इसके बाद मंगलवार को डीजीपी राजीव कृष्णा कोर्ट में पेश हुए और इस मामले पर अपनी सफाई दी.
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पुलिस जांच की गुणवत्ता, अदालत के आदेशों का पालन और पुलिस निर्देशों और रिकॉर्ड्स को समय पर पेश करने के संबंध में भी चिंता जताई. जस्टिस समीर जैन ने कहा कि यह मुद्दा केवल उसी मामले तक सीमित नहीं है, जिसमें मूल रूप से डीजीपी को तलब किया गया था बल्कि कई मामलों में देखा गया है कि अदालती आदेशों का पालन नहीं किया जाता और जांच भ्रष्ट तरीके से की जाती है. जांच का उचित संचालन सुनिश्चित करना डीजीपी की जिम्मेदारी है.
डीजीपी ने दोषसिद्धि दर का दिया हवाला
इसके बाद हाईकोर्ट ने डीजीपी से पूछा कि चिंताओं को दूर करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं. जवाब में डीजीपी ने दोषसिद्धि दर का हवाला दिया. हालांकि पीठ ने स्पष्ट किया कि दोषसिद्धि दर के आंकड़े इस चिंता का समाधान नहीं करते हैं. जस्टिस जैन ने कहा, ‘आप दोषसिद्धि दर के बारे में बात कर रहे हैं. हम गड़बड़ जांचों से निपटते हैं’. जस्टिस जैन ने हाईकोर्ट के सामने रखे गए आंकड़ों की प्रासंगिकता पर भी सवाल उठाया और कहा कि आप जिन आंकड़ों का जिक्र कर रहे हैं, उनका क्या मतलब है? हम हाईकोर्ट के न्यायाधीश होने के नाते सच्चाई जानते हैं.
पीठ ने जांच रिकॉर्ड और खासकर सीसीटीवी फुटेज की उपलब्धता को लेकर भी चिंता व्यक्त की. कोर्ट ने कहा, ‘कभी-कभी हलफनामे में सब कुछ होता है, लेकिन जब हम रिकॉर्ड मांगते हैं, तो कोई फुटेज नहीं मिलती’. जस्टिस समीर जैन ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता से संबंधित मामलों में निर्देश देने में पुलिस अधिकारियों द्वारा लिए गए समय का भी जिक्र किया.
पीठ ने डीजीपी से पूछा ये सवाल
उन्होंने कहा कि पहले निर्देश देने के लिए 10 दिन का समय दिया जाता था, जबकि अब सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मामलों में तीन दिन ही पर्याप्त हैं. इसके बाद बेंच ने डीजीपी से पूछा कि आप यह कैसे सुनिश्चित करेंगे कि पुलिस के निर्देश समय पर कोर्ट तक पहुंच जाएं?’. इसपर डीजीपी ने हाईकोर्ट को आश्वस्त किया और इस मुद्दे से निपटने वाली समितियों के अस्तित्व का हवाला दिया.
HC ने किस मामले पर DGP को किया था तलब?
दरअसल, पिछले महीने समीर जैन की पीठ ने हत्या के आरोपों से जुड़े एक मामले में पुष्पराज सिंह उर्फ बबलू द्वारा दायर जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान पुलिस द्वारा अदालत के आदेशों का पालन न करने पर चिंता व्यक्त की थी. अदालत ने उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने और यह बताने का निर्देश दिया था कि पुलिस अधिकारी अदालत द्वारा पारित आदेशों का पालन करने में ‘अनिच्छा’ क्यों दिखा रहे हैं.
ये भी पढ़ें: सरकार ने पूरा किया वादा, SC ने रद्द की प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज 129 FIR, अब CJP दिल्ली में नहीं करेगी मार्च

मनीष वर्मा
मनीष वर्मा 21 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वो IBN7, न्यूज़ एक्सप्रेस, नेशनल वॉयस, MH-1 न्यूज़ चैनल तथा न्यूज़-ट्रैक , इंडियन ओपिनियन में काम कर चुके हैं. मुख्य रूप से 'बुंदेलखंड की भूख- अवार्डेड स्टोरी ऑफ IBN7', चार महाकुम्भ/अर्धकुंभ (2001, 2007, 2013, 2019), महेश योगी समाधि का अंतराष्ट्रीय कार्यक्रम, कुख्यात डकैत ददुआ एनकाउंटर, कुख्यात डकैत ठोकिया द्वारा 7 जवानों की नृशंस हत्या की स्पेशल कवरेज कर चुके हैं.
Read More