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Ekadashi Paran Rules: एकादशी पारण के दिन सावन सोमवार का व्रत भी है तो कैसे खोलें? जानें आसान नियम - Haribhoomi

August 10, 2026

Kamika Ekadashi Paran 2026: 10 अगस्त को कामिका एकादशी के पारण के साथ सावन का दूसरा सोमवार भी है। जानें बिना अन्न खाए एकादशी का पारण कैसे करें और सोमवार का व्रत कैसे जारी रखें।

Ekadashi Paran Rules

Ekadashi Paran Rules

  • Published: 10 Aug 2026, 11:25 AM IST
  • Last Updated: 10 Aug 2026, 11:25 AM IST

Ekadashi Paran Rules: सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति के लिए खास माना जाता है। इस दौरान आने वाले सोमवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु व्रत रखते हैं। इस बार 10 अगस्त 2026 को एकादशी के पारण और सावन के दूसरे सोमवार का संयोग बन रहा है। ऐसे में उन भक्तों के सामने सवाल है जो एकादशी का व्रत रखने के साथ सोमवार का व्रत भी कर रहे हैं कि आखिर एकादशी का पारण किस तरह किया जाए।

पंचांग के अनुसार 9 अगस्त को कामिका एकादशी थी और 10 अगस्त को द्वादशी तिथि में इसका पारण किया जा रहा है। इसी दिन सावन का दूसरा सोमवार भी है।

एकादशी का पारण कब किया जाता है?
धार्मिक परंपरा में एकादशी व्रत का समापन द्वादशी तिथि में पारण करके किया जाता है। सामान्य तौर पर सूर्योदय के बाद और उचित पारण काल में व्रत खोलने की परंपरा है।

हालांकि, पारण का सटीक समय स्थान और पंचांग के अनुसार अलग हो सकता है। इसलिए अपने शहर के पंचांग के अनुसार पारण का समय देखना बेहतर माना जाता है।

सावन सोमवार भी हो तो क्या करें?
अगर एकादशी पारण के दिन सावन सोमवार का व्रत भी रखा गया है, तो दोनों व्रतों के नियमों को ध्यान में रखना जरूरी है। ऐसी स्थिति में अन्न ग्रहण करना हर किसी के लिए अनिवार्य नहीं माना जाता।

अपनी व्रत परंपरा के अनुसार भक्त तुलसी दल, गंगाजल, चरणामृत या फलाहार लेकर एकादशी व्रत का पारण कर सकते हैं। इसके बाद सावन सोमवार के व्रत के नियमों का पालन जारी रखा जा सकता है।

तुलसी दल से कैसे करें एकादशी पारण?
अगर सोमवार के व्रत के कारण अन्न ग्रहण नहीं करना चाहते हैं, तो धार्मिक मान्यता के अनुसार तुलसी दल से पारण किया जा सकता है। इसके लिए भगवान विष्णु का ध्यान करें और श्रद्धापूर्वक तुलसी दल ग्रहण करें। इसके बाद सावन सोमवार के व्रत के अनुसार भगवान शिव की पूजा और अन्य नियमों का पालन जारी रखा जा सकता है। तुलसी का संबंध भगवान विष्णु की पूजा से माना जाता है और एकादशी व्रत में इसका विशेष महत्व बताया गया है।

गंगाजल या चरणामृत से भी कर सकते हैं पारण
जो श्रद्धालु सोमवार को अन्न के साथ फलाहार भी नहीं लेना चाहते, वे अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार गंगाजल या चरणामृत ग्रहण करके एकादशी व्रत का समापन कर सकते हैं। इसके बाद पूरे दिन भगवान शिव की पूजा, शिवलिंग का जलाभिषेक और मंत्र जाप करते हुए सावन सोमवार का व्रत रखा जा सकता है।

क्या एकादशी पारण में अन्न खाना जरूरी है?
आम तौर पर एकादशी व्रत के बाद द्वादशी में पारण करने की परंपरा है। लेकिन यदि पारण के दिन कोई दूसरा व्रत भी हो, जिसमें अन्न का सेवन नहीं किया जाता, तो व्रत की अपनी परंपरा के अनुसार फलाहार या अन्य मान्य पदार्थों से पारण किया जा सकता है। इस मामले में व्रत रखने वाले व्यक्ति को अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय पंचांग के नियमों का ध्यान रखना चाहिए।

एकादशी पारण के बाद सावन सोमवार की पूजा कैसे करें?
पारण के बाद सोमवार के व्रत का संकल्प जारी रखा जा सकता है। भगवान शिव का जलाभिषेक करें और उन्हें बेलपत्र, फूल आदि अर्पित करें। इसके बाद भगवान शिव का ध्यान करते हुए 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप किया जा सकता है। पूरे दिन सोमवार व्रत के नियमों का पालन करें और अपनी परंपरा के अनुसार शाम को या निर्धारित समय पर व्रत का समापन करें।

ध्यान रखें ये जरूरी बात
एकादशी पारण का समय शहर, तिथि और स्थानीय पंचांग के अनुसार बदल सकता है। इसी तरह व्रत खोलने के नियम अलग-अलग परंपराओं में भिन्न हो सकते हैं। इसलिए यदि आप दोनों व्रत एक साथ कर रहे हैं, तो अपने स्थानीय पंचांग में दिए गए पारण समय और परिवार की धार्मिक परंपरा को प्राथमिकता देना उचित रहेगा।